22 अक्टूबर 2026
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भाजपा का 'लोकतंत्र बचाओ' अभियान: राजीव चंद्रशेखर बोले — भीड़ नहीं, मतपेटी बदलती है सरकारें

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भाजपा का 'लोकतंत्र बचाओ' अभियान: राजीव चंद्रशेखर बोले — भीड़ नहीं, मतपेटी बदलती है सरकारें

सारांश

भाजपा ने 22 अक्टूबर को 'लोकतंत्र बचाओ, भीड़तंत्र हटाओ' नाम से 15 दिवसीय राष्ट्रव्यापी अभियान शुरू किया। केरल अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर का साफ संदेश — सरकारें हिंसक भीड़ नहीं, केवल शांतिपूर्ण मतदान से बदलती हैं। यह अभियान चुनाव आयोग विवाद और विपक्षी कथा का सीधा जवाब है।

मुख्य बातें

भाजपा केरल अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने 22 अक्टूबर 2026 को तिरुवनंतपुरम में कहा कि सरकारें केवल शांतिपूर्ण मतदान से बदली जा सकती हैं।
भाजपा ने 'लोकतंत्र बचाओ, भीड़तंत्र हटाओ' शीर्षक से 15 दिवसीय राष्ट्रव्यापी अभियान शुरू किया, जो 5 नवंबर 2026 तक चलेगा।
अभियान में रैलियाँ, प्रेस कॉन्फ्रेंस, युवा संवाद और नागरिक समाज के साथ जनसंपर्क शामिल।
अभियान का उद्देश्य मतदाता सूची SIR विवाद और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की माँग का खंडन करना भी है।
चंद्रशेखर ने कांग्रेस और CPI(M) पर जानबूझकर अराजकता फैलाने का आरोप लगाया।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के केरल अध्यक्ष और विधायक राजीव चंद्रशेखर ने 22 अक्टूबर 2026 को तिरुवनंतपुरम में स्पष्ट किया कि लोकतंत्र और भीड़तंत्र एक-दूसरे के सर्वथा विपरीत हैं — और सरकारें केवल शांतिपूर्ण मतदान से बदली जा सकती हैं, न कि हिंसा, अराजकता या सड़क-प्रदर्शनों के ज़रिये। उनकी यह टिप्पणी उसी दिन आई जब भाजपा ने 'लोकतंत्र बचाओ, भीड़तंत्र हटाओ' शीर्षक से अपना 15 दिवसीय राष्ट्रव्यापी अभियान आरंभ किया, जो 5 नवंबर 2026 तक चलेगा।

मुख्य बयान: मतदाता ही सर्वोच्च

चंद्रशेखर ने कहा, 'लोकतंत्र और भीड़तंत्र एक-दूसरे के विपरीत हैं। ऐसा लोकतंत्र नहीं हो सकता, जहाँ सरकारों का परिवर्तन शांतिपूर्ण मतदान के अलावा किसी और तरीके से हो। मतदाता तय करते हैं कि प्रधानमंत्री कौन होगा, सरकार कौन बनाएगा और मुख्यमंत्री कौन होगा। यही लोकतंत्र है।'

उन्होंने आगे कहा, 'हिंसक भीड़, अराजकतावादी, उपद्रवी या अपराधी सड़कों पर उतरकर यह तय नहीं कर सकते कि देश या राज्य का नेता कौन होगा।' उनके अनुसार, सरकार या जनप्रतिनिधि को बदलने का एकमात्र वैध तरीका शांतिपूर्ण मतदान है — और यही भारत की संवैधानिक पहचान है।

अभियान का स्वरूप और उद्देश्य

पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के अनुसार, इस 15 दिवसीय अभियान में रैलियाँ, प्रेस कॉन्फ्रेंस, युवाओं व छात्रों के साथ संवाद, और नागरिक समाज समूहों के साथ जनसंपर्क कार्यक्रम शामिल होंगे।

भाजपा का यह अभियान मुख्य रूप से दो विषयों को साधने के लिए तैयार किया गया है: पहला, चुनावी प्रक्रियाओं पर पार्टी के रुख का बचाव; और दूसरा, मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़े विपक्षी आरोपों तथा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की माँग का खंडन। गौरतलब है कि यह अभियान ऐसे समय में आया है जब विपक्ष चुनाव आयोग की निष्पक्षता को लेकर सवाल उठा रहा है।

विपक्ष पर निशाना

इंडिया ब्लॉक की वर्चुअल बैठक पर प्रतिक्रिया देते हुए चंद्रशेखर ने आरोप लगाया कि 'चुनाव प्रचार का प्रमुख चेहरा एक और छुट्टी मनाने देश से बाहर चला गया है।' उन्होंने कहा, 'जाहिर है, उन्हें वर्चुअल बैठक करनी ही होगी क्योंकि इस फर्जी, अराजक और अव्यवस्थित चुनाव प्रचार का तथाकथित प्रतीक भारत छोड़कर एक और छुट्टी पर चला गया है। इंटरनेट उन्हें वर्चुअल चुनाव प्रचार करने में मदद कर रहा है।'

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) [CPI(M)] के समर्थन से जानबूझकर अराजकता और अव्यवस्था पैदा कर रही है। चंद्रशेखर ने कहा, 'भारत की जनता इस तरह की अराजकता को उजागर करने के लिए दृढ़संकल्पित है और उसने तय कर लिया है कि वह इसे बर्दाश्त नहीं करेगी।'

राजनीतिक पृष्ठभूमि

यह ऐसे समय में आया है जब केरल में विधानसभा चुनावों की तैयारियाँ पृष्ठभूमि में चल रही हैं और राज्य में CPI(M) नीत वाम मोर्चा सरकार के विरुद्ध भाजपा अपनी उपस्थिति मज़बूत करने की कोशिश में है। यह भाजपा के 'लोकतंत्र-केंद्रित' संदेश को राष्ट्रीय स्तर पर प्रसारित करने की रणनीति का हिस्सा दिखती है, जो विपक्ष की 'लोकतंत्र खतरे में' की कथा का प्रति-आख्यान है।

आगे की राह

अभियान 5 नवंबर 2026 तक देश के विभिन्न राज्यों में चलेगा। भाजपा नेताओं के अनुसार, इसमें युवाओं को विशेष रूप से जोड़ने पर बल दिया जाएगा। चंद्रशेखर का बयान राष्ट्रीय स्तर पर उस राजनीतिक बहस को और पैना करता है जो चुनावी प्रक्रियाओं की वैधता और विरोध-प्रदर्शन की सीमाओं के इर्द-गिर्द घूम रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसकी असली धार विपक्ष — विशेषकर इंडिया ब्लॉक — की उस कथा को काटने में है जो चुनाव आयोग की स्वायत्तता और SIR प्रक्रिया पर सवाल उठा रही है। 'भीड़तंत्र बनाम लोकतंत्र' का फ्रेम चतुराई से विरोध-प्रदर्शन को अवैध ठहराने का उपकरण बन सकता है — यह रेखा कहाँ खिंचती है, इसका जवाब अभियान नहीं देता। मुख्यधारा की कवरेज इस बहस के संस्थागत पहलू — यानी SIR प्रक्रिया की वैधता — को अक्सर नज़रअंदाज़ करती है, जो इस पूरे राजनीतिक संघर्ष की असली जड़ है।
RashtraPress
22 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भाजपा का 'लोकतंत्र बचाओ, भीड़तंत्र हटाओ' अभियान क्या है?
यह भाजपा द्वारा 22 अक्टूबर 2026 को शुरू किया गया 15 दिवसीय राष्ट्रव्यापी अभियान है, जो 5 नवंबर 2026 तक चलेगा। इसमें रैलियाँ, प्रेस कॉन्फ्रेंस और युवा संवाद कार्यक्रम शामिल हैं, और इसका मुख्य संदेश है कि सरकारें केवल शांतिपूर्ण मतदान से बदली जानी चाहिए।
राजीव चंद्रशेखर ने भीड़तंत्र पर क्या कहा?
भाजपा केरल अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने कहा कि हिंसक भीड़, अराजकतावादी या उपद्रवी सड़कों पर उतरकर यह तय नहीं कर सकते कि देश या राज्य का नेता कौन होगा। उनके अनुसार मतदाताओं के पास ही यह अधिकार है।
भाजपा का यह अभियान चुनाव आयोग विवाद से कैसे जुड़ा है?
अभियान का एक उद्देश्य मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़े विपक्षी आरोपों और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की माँग का खंडन करना भी है। भाजपा इसे चुनावी प्रक्रियाओं की वैधता के पक्ष में अपनी स्थिति स्पष्ट करने के अवसर के रूप में देख रही है।
चंद्रशेखर ने इंडिया ब्लॉक की वर्चुअल बैठक पर क्या टिप्पणी की?
उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी अभियान का 'प्रमुख चेहरा' देश से बाहर छुट्टी पर है, इसीलिए इंडिया ब्लॉक को वर्चुअल बैठक करनी पड़ रही है। यह टिप्पणी विपक्षी नेतृत्व पर व्यंग्यात्मक प्रहार के रूप में देखी जा रही है।
भाजपा ने कांग्रेस और CPI(M) पर क्या आरोप लगाए?
चंद्रशेखर ने आरोप लगाया कि कांग्रेस, CPI(M) के समर्थन से, जानबूझकर देश में अराजकता और अव्यवस्था पैदा कर रही है। उन्होंने कहा कि भारत की जनता इसे बर्दाश्त नहीं करेगी और इस अराजकता को उजागर करने के लिए दृढ़संकल्पित है।
राष्ट्र प्रेस
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