4 नवंबर 2026
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भाजपा की 'लोकतंत्र बचाओ' रैली पर सपा का तंज: 'सत्ता में रहते सड़क पर आंदोलन पहली बार'

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भाजपा की 'लोकतंत्र बचाओ' रैली पर सपा का तंज: 'सत्ता में रहते सड़क पर आंदोलन पहली बार'

सारांश

सत्ता में रहते सड़क पर उतरना — सपा ने भाजपा की 'लोकतंत्र बचाओ' रैली को इसी एक पंक्ति में बेनकाब करने की कोशिश की। लखनऊ में 4 नवंबर को दिए गए इन बयानों ने 2027 के यूपी चुनाव से पहले विपक्षी एकजुटता और भाजपा की रणनीति पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

मुख्य बातें

सपा सांसद रमाशंकर राजभर ने भाजपा की 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' रैली पर सवाल उठाया — 'सत्ता में रहकर अराजकता का आरोप लगाना विरोधाभासी है।' सपा विधायक अमिताभ बाजपेई ने कहा — 'यह पहली बार है कि कोई सत्तारूढ़ दल सरकार में रहते हुए सड़क पर आंदोलन कर रहा है।' धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के भगवान कृष्ण पर दिए बयान को सपा ने 'निंदनीय' बताया और प्रशासनिक कार्रवाई की माँग की।
कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने अखिलेश यादव को 'इंडिया' ब्लॉक का प्रमुख नेता बताया और उनके किसी भी फैसले को गठबंधन की स्वीकृति का आश्वासन दिया।
2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों से पहले सपा-कांग्रेस गठबंधन ने दलित, पिछड़े और आदिवासी मुद्दों पर एकजुटता का संकेत दिया।

समाजवादी पार्टी (सपा) और कांग्रेस ने 4 नवंबर 2026 को लखनऊ में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' रैली पर तीखा पलटवार किया। सपा सांसद, विधायक और कांग्रेस प्रवक्ता ने एक सुर में सवाल उठाया कि सत्तारूढ़ दल का सड़क पर उतरकर नारेबाज़ी करना खुद उनकी विफलता का स्वीकरोक्ति है।

सपा सांसद का सीधा सवाल

सपा सांसद रमाशंकर राजभर ने कहा, 'भाजपा का यह नारा किसे संबोधित कर रहा है? अगर देश में अराजकता का माहौल है, तो इसके लिए भाजपा और उसकी सरकार जिम्मेदार हैं। भाजपा सत्ता में है और सरकार चला रही है, तो फिर वह दूसरों के खिलाफ 'देश बचाओ और अराजकता खत्म करो' जैसे नारे क्यों लगा रही है?' उन्होंने यह भी कहा कि बागेश्वर धाम पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की भगवान कृष्ण पर की गई टिप्पणी 'पूरी तरह निंदनीय' है और प्रशासन को दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई करनी चाहिए।

सपा विधायक का तीखा तंज

सपा विधायक अमिताभ बाजपेई ने रैली को लेकर कहा, ''लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' रैली निकालकर भाजपा यह मान रही है कि देश में अराजकता है। यह पहली बार है कि कोई राजनीतिक दल सरकार में रहते हुए सड़क पर आंदोलन कर रहा है।' उन्होंने आगे दावा किया कि 'इस रैली के ज़रिए भाजपा नेता विपक्ष की भूमिका निभाने की तैयारी कर रहे हैं।'

बाजपेई ने धीरेंद्र शास्त्री के बयान पर भी प्रतिक्रिया दी और कहा कि 'अगर कोई विपक्ष का नेता ऐसा बयान देता, तो अब तक हंगामा हो गया होता।' यह टिप्पणी भाजपा पर चुनिंदा धार्मिक संवेदनशीलता का आरोप लगाती है।

कांग्रेस की प्रतिक्रिया और 'इंडिया' ब्लॉक

कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों से पहले सपा प्रमुख अखिलेश यादव की रणनीति का समर्थन करते हुए कहा, 'अगर समाजवादी पार्टी पिछड़े समुदायों, दलितों और आदिवासियों के मुद्दों को उठा रही है, तो यह एक स्वागत योग्य कदम है।' उन्होंने स्पष्ट किया कि अखिलेश यादव चुनाव लड़ें या न लड़ें, वे 'इंडिया' ब्लॉक के प्रमुख नेताओं में से एक हैं और उनका कोई भी फैसला गठबंधन को मंज़ूर होगा।

राजनीतिक पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि यह बयानबाज़ी ऐसे समय में आई है जब उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव करीब आ रहे हैं और सपा-कांग्रेस गठबंधन अपनी स्थिति मज़बूत करने में जुटा है। भाजपा की रैली को विपक्ष ने सत्ता में रहते हुए जनता का ध्यान भटकाने की कोशिश के रूप में प्रस्तुत किया। आलोचकों का कहना है कि इस तरह की रैलियाँ उस राजनीतिक असुरक्षा का संकेत हो सकती हैं जो सत्तारूढ़ दल को बड़े चुनावी मुकाबले से पहले घेर रही है।

आगे क्या होगा

2027 के चुनावों को देखते हुए यह राजनीतिक घमासान और तेज़ होने की संभावना है। 'इंडिया' ब्लॉक के दलों की एकजुटता और भाजपा की जन-संपर्क रणनीति — दोनों की परीक्षा आने वाले महीनों में होगी। विशेषज्ञों के अनुसार, धार्मिक और सामाजिक मुद्दों पर बयानबाज़ी उत्तर प्रदेश की चुनावी राजनीति का अहम हिस्सा बने रहने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

वह रणनीतिक दृष्टि से चतुर है — लेकिन यह भी उतना ही सच है कि सत्तारूढ़ दलों द्वारा जन-संपर्क अभियान और रैलियाँ करना नया नहीं है। असली सवाल यह है कि क्या विपक्ष का यह 'विरोधाभास' वाला तर्क यूपी की जनता में पैठ बना पाएगा, जहाँ 2027 की लड़ाई जातीय समीकरणों पर टिकी है। धीरेंद्र शास्त्री विवाद पर सपा की प्रतिक्रिया ध्यान देने योग्य है — वही दल जो अक्सर धार्मिक मुद्दों पर सतर्क रहता है, अब हिंदू भावनाओं का हवाला देकर भाजपा को उसी के मैदान में चुनौती दे रहा है। 'इंडिया' ब्लॉक की एकजुटता के दावे और ज़मीनी सच्चाई के बीच का फासला 2027 में साफ़ दिखेगा।
RashtraPress
4 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भाजपा की 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' रैली क्या है?
यह भारतीय जनता पार्टी (BJP) द्वारा आयोजित एक जन-संपर्क रैली है, जिस पर समाजवादी पार्टी और कांग्रेस ने 4 नवंबर 2026 को लखनऊ में तीखी प्रतिक्रिया दी। विपक्ष का आरोप है कि सत्तारूढ़ दल का सड़क पर उतरना उनकी अपनी नाकामी का स्वीकरोक्ति है।
सपा ने भाजपा की रैली पर क्या आपत्ति जताई?
सपा विधायक अमिताभ बाजपेई ने कहा कि यह पहली बार है जब कोई सत्तारूढ़ दल सरकार में रहते हुए सड़क पर आंदोलन कर रहा है। सपा सांसद रमाशंकर राजभर ने तर्क दिया कि अगर देश में अराजकता है, तो उसकी जिम्मेदारी खुद भाजपा और उसकी सरकार पर है।
धीरेंद्र शास्त्री के बयान पर सपा की क्या प्रतिक्रिया है?
सपा सांसद रमाशंकर राजभर और विधायक अमिताभ बाजपेई दोनों ने बागेश्वर धाम पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के बयान को 'निंदनीय' और 'आहत करने वाला' बताया। उन्होंने प्रशासन से कार्रवाई की माँग करते हुए आरोप लगाया कि अगर विपक्ष का कोई नेता ऐसा बोलता तो सरकार तुरंत प्रतिक्रिया देती।
2027 के यूपी चुनावों से पहले 'इंडिया' ब्लॉक की स्थिति क्या है?
कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत के अनुसार, सपा और कांग्रेस मिलकर दलित, पिछड़े और आदिवासी वर्गों को एकजुट करने में लगे हैं। उन्होंने अखिलेश यादव को 'इंडिया' ब्लॉक का प्रमुख नेता बताया और कहा कि उनका कोई भी फैसला गठबंधन को स्वीकार्य होगा।
क्या सत्तारूढ़ दल द्वारा इस तरह की रैली करना असामान्य है?
सपा विधायक अमिताभ बाजपेई के अनुसार, सत्ता में रहते हुए सड़क पर आंदोलन करना भारतीय राजनीति में 'पहली बार' हो रहा है। उनका कहना है कि इससे लगता है कि भाजपा नेता विपक्ष की भूमिका निभाने की तैयारी कर रहे हैं, जो 2027 के चुनावों से पहले उनकी चिंता का संकेत है।
राष्ट्र प्रेस
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