भाजपा की 'लोकतंत्र बचाओ' पदयात्रा पर विपक्ष का पलटवार, नितिन नवीन ने नई दिल्ली में किया नेतृत्व
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने बुधवार, 28 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' पदयात्रा का नेतृत्व किया। इस मार्च में दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, राज्य के मंत्री और भाजपा सांसद भी शामिल रहे। यात्रा के शुरू होते ही विपक्षी दलों ने तीखी प्रतिक्रिया दी और भाजपा पर ही 'अराजकता' फैलाने का आरोप लगाया।
कांग्रेस का पलटवार
कांग्रेस प्रवक्ता अतुल लोंढे ने व्यंग्य करते हुए कहा कि भाजपा ने संवैधानिक संस्थाओं को अपने अधीन कर रखा है और अब 'लोकतंत्र बचाने' की बात कर रही है। उन्होंने कहा, 'जब भाजपा के लोग विपक्ष में थे तो इंदिरा गांधी के खिलाफ अराजकता फैलाते थे। आज विपक्ष अगर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ इस्तीफे की माँग रखता है तो वे हमें अराजक बताते हैं, जबकि असल अराजकता वे खुद फैला रहे हैं।'
कांग्रेस नेता राजेंद्र पाल गौतम ने और आगे जाते हुए कहा कि यदि किसी ने लोकतंत्र की हत्या की है तो वह भाजपा है और अराजकता फैलाने का काम भी भाजपा और उसके सहयोगी कर रहे हैं।
एनसीपी (एसपी) का यात्राओं पर ऐतिहासिक संदर्भ
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) यानी एनसीपी (एसपी) के नेता नसीम सिद्दीकी ने कहा कि यात्राएँ निकालने में भाजपा माहिर है और इसकी शुरुआत लालकृष्ण आडवाणी ने 1992 में की थी। उन्होंने कहा, 'यात्राओं के बलबूते ही वे सत्ता में आए हैं। राहुल गांधी ने भी यात्रा निकाली, अब नितिन नवीन भी निकाल रहे हैं — लेकिन यात्राओं से शांति और भाईचारे का संदेश जाना चाहिए, नफरत का नहीं।'
इंडिया गठबंधन की तैयारी
कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने इंडिया (INDIA) गठबंधन की प्रस्तावित रैली का संदर्भ देते हुए कहा कि 'लोकतंत्र की लूट हो रही है, उसी के खिलाफ हमारा आंदोलन है।' यह बयान इस बात का संकेत है कि विपक्षी खेमा अपना एक अलग प्रति-अभियान तैयार कर रहा है।
सपा का विधान परिषद चुनाव पर आरोप
समाजवादी पार्टी (सपा) के नेता योगेश प्रताप सिंह ने हाल के विधान परिषद चुनाव परिणामों का ज़िक्र करते हुए कहा कि नतीजे और बेहतर हो सकते थे, लेकिन भाजपा और राज्य के मुख्यमंत्री ने इसे प्रतिष्ठा का सवाल बनाकर जिलाधिकारियों, पुलिस कप्तानों और शिक्षा विभाग के अधिकारियों को काम पर लगा दिया। उन्होंने यह भी कहा कि स्कूल प्रबंधकों और शिक्षकों को नोटिस भेजे गए और बार-बार चुनाव आयोग से गुहार लगाने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई।
आगे क्या
गौरतलब है कि यह यात्रा ऐसे समय में आई है जब विपक्ष मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की माँग को लेकर आक्रामक है और इंडिया गठबंधन अपनी अलग रैली की तैयारी कर रहा है। दोनों पक्षों के इस राजनीतिक संघर्ष का असर आने वाले चुनावी कैलेंडर पर पड़ सकता है।