28 अक्टूबर 2026
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पटना में भाजपा की 'लोकतंत्र बचाओ' पदयात्रा, सम्राट चौधरी ने विपक्ष पर साधा निशाना

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पटना में भाजपा की 'लोकतंत्र बचाओ' पदयात्रा, सम्राट चौधरी ने विपक्ष पर साधा निशाना

सारांश

पटना के गांधी मैदान पर भाजपा की 'लोकतंत्र बचाओ' पदयात्रा महज एक रैली नहीं थी — यह 1974 के जेपी आंदोलन की विरासत को साधने की सुनियोजित कोशिश थी। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने ईवीएम, मतदाता सूची और आपातकाल — तीनों मोर्चों पर विपक्ष को घेरते हुए 2030 तक पलायन रोकने का वादा भी किया।

मुख्य बातें

भाजपा ने 28 अक्टूबर 2026 को पटना में 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' अभियान के तहत पदयात्रा निकाली।
पदयात्रा कारगिल चौक से शुरू होकर गांधी मैदान स्थित जेपी प्रतिमा तक पहुँची।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने विपक्ष पर ईवीएम और मतदाता सूची को लेकर झूठे आरोप लगाने का आरोप लगाया।
मोदी सरकार ने देशभर में 4 करोड़ गरीबों को पक्के मकान दिए, जिनमें बिहार के 50 लाख से अधिक लाभार्थी शामिल।
वर्ष 2030 तक बिहार में रोजगार उपलब्ध कराने का लक्ष्य ताकि श्रमिकों को पलायन न करना पड़े।
एनडीए ने बिहार विधानसभा में 202 सीटें जीतकर सरकार बनाई है।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने 28 अक्टूबर 2026 को पटना में 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' अभियान के अंतर्गत एक बड़ी पदयात्रा आयोजित की। इस मार्च में बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी और पटना साहिब से सांसद एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद समेत कई वरिष्ठ नेता, मंत्री, विधायक व विधान पार्षद शामिल हुए। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर विपक्ष पर लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने और अराजकता फैलाने के आरोप लगाए।

पदयात्रा का मार्ग और भागीदारी

यह पदयात्रा कारगिल चौक से शुरू होकर गांधी मैदान स्थित लोकनायक जयप्रकाश नारायण की प्रतिमा तक पहुँची। सैकड़ों की संख्या में जुटे भाजपा कार्यकर्ताओं ने पार्टी के झंडे और नारों की तख्तियाँ थामे विपक्ष के खिलाफ नारेबाजी की। महिला कार्यकर्ताओं की भी उल्लेखनीय भागीदारी देखी गई। समापन पर नेताओं ने जेपी की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की।

सम्राट चौधरी के मुख्य बयान

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि भाजपा लोकतंत्र की रक्षा के लिए पूरी मजबूती से खड़ी है। उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि देश ने आपातकाल का वह दौर देखा है, जब पत्रकारों को जेलों में बंद किया गया था। चौधरी ने जोर देकर कहा कि लोकतंत्र में जनता के सवालों का जवाब देना सरकार की जिम्मेदारी है, जबकि विपक्ष को भी लोकतांत्रिक मर्यादाओं का पालन करना चाहिए।

उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) पर विपक्ष के सवालों को खारिज करते हुए कहा कि विपक्ष ईवीएम और बैलेट पेपर — दोनों पर सवाल उठाता है। कांग्रेस के शासनकाल में कथित बूथ कैप्चरिंग और सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता का विश्वास सर्वोपरि है।

मतदाता सूची विवाद और सरकार का पक्ष

बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर विपक्ष के आरोपों को चौधरी ने सिरे से नकार दिया। उन्होंने दावा किया कि विपक्ष ने मतदाता सूची से जिन लोगों के नाम हटाने का मुद्दा उठाया था, उनके नाम संबंधित सूची में दर्ज पाए गए। उन्होंने कहा कि राजनीति तथ्यों पर आधारित होनी चाहिए, आरोपों पर नहीं।

केंद्र सरकार की योजनाओं का उल्लेख

मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि केंद्र सरकार गरीबों के कल्याण के लिए अथक काम कर रही है। उन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना, मुफ्त अनाज और आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं का विशेष उल्लेख किया। उनके अनुसार, मोदी सरकार ने देशभर में 4 करोड़ गरीबों को पक्के मकान उपलब्ध कराए हैं, जिनमें बिहार के 50 लाख से अधिक लाभार्थी शामिल हैं।

बिहार के लिए 2030 का लक्ष्य

चौधरी ने घोषणा की कि वर्ष 2030 तक ऐसी व्यवस्था विकसित करने का प्रयास किया जाएगा, जिससे बिहार के श्रमिकों को रोजगार के लिए दूसरे राज्यों में पलायन न करना पड़े। उन्होंने एनडीए की बिहार विधानसभा में 202 सीटों की जीत का हवाला देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी और पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में बिहार को समृद्ध बनाने का लक्ष्य निर्धारित है। गौरतलब है कि यह पदयात्रा उसी गांधी मैदान पर समाप्त हुई जहाँ से 1974 का ऐतिहासिक आंदोलन शुरू हुआ था — एक प्रतीकात्मक संदेश जिसे भाजपा ने सचेत रूप से चुना।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या 2030 का रोजगार वादा ठोस नीति पर टिका है या चुनावी बयानबाजी। बिहार से पलायन दशकों पुरानी समस्या है जिसे पिछली कई सरकारें हल नहीं कर पाईं — मुख्यमंत्री के दावों को उनके कार्यकाल के बचे समय में जमीनी नतीजों से ही परखा जाएगा।
RashtraPress
28 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' अभियान क्या है?
यह भारतीय जनता पार्टी (BJP) का एक राजनीतिक अभियान है, जिसके तहत 28 अक्टूबर 2026 को पटना में पदयात्रा निकाली गई। इस अभियान का उद्देश्य विपक्ष पर लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने के आरोप लगाते हुए पार्टी की लोकतंत्र-समर्थक छवि को मजबूत करना है।
पटना की भाजपा पदयात्रा में कौन-कौन शामिल हुए?
पदयात्रा में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी, पटना साहिब के सांसद एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद तथा कई वरिष्ठ नेता, मंत्री, विधायक और विधान पार्षद शामिल हुए। सैकड़ों कार्यकर्ता और महिला भाजपा सदस्य भी इस मार्च में उपस्थित रहे।
सम्राट चौधरी ने ईवीएम पर विपक्ष के आरोपों पर क्या कहा?
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि विपक्ष ईवीएम और बैलेट पेपर — दोनों पर सवाल उठाता है, जो उसकी नीयत को दर्शाता है। उन्होंने कांग्रेस के शासनकाल में कथित बूथ कैप्चरिंग का जिक्र कर विपक्ष की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा किया।
बिहार में मतदाता सूची पुनरीक्षण (SIR) विवाद क्या है?
विपक्ष ने आरोप लगाया था कि बिहार में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए। मुख्यमंत्री चौधरी ने इन आरोपों को खारिज करते हुए दावा किया कि जिन लोगों के नाम हटाने का मुद्दा उठाया गया, वे संबंधित मतदाता सूची में दर्ज पाए गए।
सम्राट चौधरी का 2030 वाला रोजगार वादा क्या है?
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2030 तक बिहार में ऐसी व्यवस्था बनाने का प्रयास किया जाएगा, जिससे राज्य के श्रमिकों को रोजगार के लिए दूसरे राज्यों में पलायन न करना पड़े। यह वादा बिहार की दशकों पुरानी प्रवासी मजदूर समस्या के संदर्भ में किया गया है।
राष्ट्र प्रेस
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