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बिहार भाजपा का 'लोकतंत्र बचाओ, भीड़तंत्र हटाओ' अभियान 22 अक्टूबर से, 5 नवंबर तक 15 दिन चलेगा

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बिहार भाजपा का 'लोकतंत्र बचाओ, भीड़तंत्र हटाओ' अभियान 22 अक्टूबर से, 5 नवंबर तक 15 दिन चलेगा

सारांश

बिहार भाजपा ने 22 अक्टूबर से 5 नवंबर तक 'लोकतंत्र बचाओ, भीड़तंत्र हटाओ' अभियान शुरू करने का ऐलान किया है। 15 दिन के इस राजनीतिक आक्रमण में रैलियाँ, युवा संवाद और सोशल मीडिया के ज़रिए कांग्रेस व सीजेपी पर निशाना साधा जाएगा।

मुख्य बातें

बिहार भाजपा का 'लोकतंत्र बचाओ, भीड़तंत्र हटाओ' अभियान 22 अक्टूबर से 5 नवंबर 2026 तक चलेगा।
अभियान की अवधि 15 दिन ; प्रदेशभर में रैलियाँ, युवा संवाद, छात्र प्रतियोगिताएँ और इन्फ्लुएंसर आउटरीच शामिल।
प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने 21 अक्टूबर को पटना में समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की।
भाजपा का आरोप — कांग्रेस और सीजेपी मतदाता सूची को लेकर भ्रम फैलाते हैं और लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमज़ोर करते हैं।
अभियान में मतदाता सूची की शुद्धता, मताधिकार की रक्षा और संवैधानिक मूल्यों को केंद्रीय मुद्दा बनाया जाएगा।

बिहार भाजपा (भारतीय जनता पार्टी) ने 22 अक्टूबर 2026 से 5 नवंबर 2026 तक प्रदेशभर में 'लोकतंत्र बचाओ, भीड़तंत्र हटाओ' अभियान चलाने का निर्णय लिया है। 15 दिनों तक चलने वाले इस अभियान के अंतर्गत रैलियाँ, प्रेस वार्ता, युवा संवाद, छात्र प्रतियोगिताएँ और सोशल मीडिया आउटरीच सहित बहुस्तरीय कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

अभियान की तैयारी और बैठक

प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने बुधवार, 21 अक्टूबर को पटना स्थित प्रदेश कार्यालय में एक समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की, जिसमें अभियान की रणनीति और तैयारियों पर विचार-विमर्श हुआ। प्रदेश संगठन महामंत्री भीखूभाई दलसानिया भी इस बैठक में उपस्थित रहे।

इसके अतिरिक्त सरावगी ने जिला अध्यक्षों और जिला स्तरीय पदाधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से भी बैठक की, जिसमें कार्यक्रमों के संचालन, जनसंपर्क और संगठनात्मक समन्वय पर विशेष चर्चा की गई।

अभियान की कार्ययोजना

भाजपा के अनुसार, इस अभियान की कार्ययोजना में निम्न कार्यक्रम शामिल हैं — 'लोकतंत्र बचाओ-भीड़तंत्र हटाओ' रैलियाँ, 'राष्ट्र चिंतन संवाद', 'लोकतंत्र बनाम भीड़तंत्र: युवा संवाद', छात्रों के लिए प्रतियोगिताएँ और 'घुसपैठिया हटाओ, लोकतंत्र बचाओ' विषय पर इन्फ्लुएंसर आउटरीच कार्यक्रम। इसके अलावा विशेषांक पत्रिकाओं, साहित्य व पुस्तिकाओं का वितरण और प्रचार सामग्री के माध्यम से जनसंपर्क भी किया जाएगा।

पार्टी के आरोप और मुख्य मुद्दे

भाजपा का कहना है कि अभियान के दौरान लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता, मतदाता सूची की शुद्धता, मताधिकार की रक्षा और संवैधानिक मूल्यों जैसे विषयों को जनता के बीच उठाया जाएगा। पार्टी का आरोप है कि विपक्षी दल — विशेषकर कांग्रेस और सीजेपी — मतदाता सूची एवं निर्वाचन प्रक्रिया को लेकर भ्रम फैलाते हैं और लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति जनता के विश्वास को कमज़ोर करने का प्रयास करते हैं।

गौरतलब है कि यह अभियान ऐसे समय में शुरू हो रहा है जब बिहार में आगामी चुनावी तैयारियों को लेकर राजनीतिक सरगर्मी बढ़ रही है और मतदाता सूची की सटीकता पर विभिन्न दलों के बीच विवाद जारी है।

बैठक में शामिल प्रमुख पदाधिकारी

बैठक में प्रदेश महामंत्री धनराज शर्मा और सरोज रंजन पटेल, प्रदेश उपाध्यक्ष शीला कुशवाहा और पवन जायसवाल, विधायक संजय गुप्ता, विधान पार्षद अनामिका सिंह पटेल, प्रदेश प्रवक्ता प्रेम रंजन पटेल और सुरेश रूंगटा सहित अभियान से जुड़ी प्रदेश स्तरीय टोली के अनेक पदाधिकारी उपस्थित रहे।

आगे की राह

प्रदेश अध्यक्ष सरावगी ने अभियान की सफलता के लिए जिला स्तर पर समन्वित प्रयासों पर बल दिया। पार्टी का लक्ष्य विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से मतदाता सूची की शुद्धता, लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं और संवैधानिक मूल्यों पर प्रदेशभर में व्यापक जनसंवाद स्थापित करना है। अभियान के अंतिम परिणाम और जमीनी प्रभाव पर राजनीतिक पर्यवेक्षकों की नज़र बनी रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

भीड़तंत्र हटाओ' जैसा नारा महज़ एक राजनीतिक पैकेजिंग नहीं है — यह भाजपा की उस रणनीति का हिस्सा है जिसमें चुनावी तैयारियों को नैरेटिव युद्ध की शक्ल दी जाती है। मतदाता सूची की शुद्धता और 'घुसपैठिए' जैसे शब्दों को अभियान के केंद्र में रखना स्पष्ट संकेत देता है कि पार्टी विपक्ष को चुनाव-प्रक्रिया विरोधी साबित करने की कोशिश कर रही है। हालाँकि, आलोचकों का कहना है कि ऐसे अभियान मतदाताओं में ध्रुवीकरण बढ़ाते हैं और जटिल मसलों को सरलीकृत कर देते हैं। असली कसौटी यह होगी कि यह 15-दिवसीय अभियान ज़मीनी स्तर पर मतदाताओं की भागीदारी बढ़ाता है या केवल सोशल मीडिया की सुर्खियों तक सीमित रह जाता है।
RashtraPress
21 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बिहार भाजपा का 'लोकतंत्र बचाओ, भीड़तंत्र हटाओ' अभियान क्या है?
यह बिहार भाजपा द्वारा 22 अक्टूबर से 5 नवंबर 2026 तक चलाया जाने वाला 15-दिवसीय राजनीतिक जागरूकता अभियान है। इसमें रैलियाँ, युवा संवाद, छात्र प्रतियोगिताएँ, इन्फ्लुएंसर आउटरीच और सोशल मीडिया अभियान शामिल हैं।
अभियान में कौन-से मुख्य मुद्दे उठाए जाएंगे?
भाजपा के अनुसार अभियान में लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता, मतदाता सूची की शुद्धता, मताधिकार की रक्षा और संवैधानिक मूल्यों को प्रमुखता से उठाया जाएगा। साथ ही कांग्रेस और सीजेपी की नीतियों पर भी सवाल खड़े किए जाएंगे।
अभियान का नेतृत्व कौन कर रहा है?
बिहार भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी इस अभियान की अगुवाई कर रहे हैं। प्रदेश संगठन महामंत्री भीखूभाई दलसानिया सहित प्रदेश और जिला स्तर के वरिष्ठ पदाधिकारी इसमें शामिल हैं।
भाजपा ने कांग्रेस और सीजेपी पर क्या आरोप लगाए हैं?
भाजपा का आरोप है कि कांग्रेस और सीजेपी मतदाता सूची एवं निर्वाचन प्रक्रिया को लेकर भ्रम फैलाते हैं और लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति जनता के विश्वास को कमज़ोर करने की कोशिश करते हैं। पार्टी इसी के खिलाफ जनमत तैयार करना चाहती है।
अभियान के तहत किस तरह के कार्यक्रम होंगे?
अभियान में 'राष्ट्र चिंतन संवाद', 'लोकतंत्र बनाम भीड़तंत्र: युवा संवाद', छात्र प्रतियोगिताएँ, इन्फ्लुएंसर आउटरीच, पत्रिका विशेषांक और प्रचार सामग्री का वितरण शामिल है। सोशल मीडिया के ज़रिए भी व्यापक जनसंपर्क किया जाएगा।
राष्ट्र प्रेस
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