क्या तरुण चुघ ने 'वोटर अधिकार यात्रा' को 'घुसपैठिया बचाओ यात्रा' करार दिया?

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क्या तरुण चुघ ने 'वोटर अधिकार यात्रा' को 'घुसपैठिया बचाओ यात्रा' करार दिया?

सारांश

भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ ने बिहार में चल रहे वोटर अधिकार यात्रा को 'घुसपैठिया बचाओ यात्रा' कहा है, जो सुरक्षा और अखंडता के खिलाफ है। उनकी टिप्पणी कांग्रेस के वोट बैंक की भूख और घुसपैठियों के संरक्षण पर भी है। क्या यह बयान चुनावी राजनीति में एक नया मोड़ लाएगा?

Key Takeaways

  • तरुण चुघ का बयान विवादित है।
  • वोटर अधिकार यात्रा की आलोचना।
  • कांग्रेस पर घुसपैठियों के संरक्षण का आरोप।
  • मोदी सरकार की सुरक्षा नीतियों का समर्थन।
  • राजनीतिक बयानबाजी में बढ़ती कटुता।

नई दिल्ली, 30 अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ ने बिहार में चल रही वोटर अधिकार यात्रा पर कटाक्ष करते हुए इसे 'घुसपैठिया बचाओ यात्रा' कहा है।

राष्ट्र प्रेस से बातचीत में उन्होंने कहा कि राहुल गांधी की तथाकथित 'वोटर बचाओ यात्रा' वास्तव में 'घुसपैठिया बचाओ यात्रा' है, जो देश की सुरक्षा और अखंडता के खिलाफ है।

उन्होंने कहा कि भाजपा का रुख स्पष्ट है कि घुसपैठिए किसी भी हालत में देश में नहीं रह सकते। यह देश की सुरक्षा, गरीबों, वंचितों और एससी-एसटी के अधिकार का सवाल है।

तरुण चुघ ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की सरकार देश की सुरक्षा और हाशिए पर पड़े समुदायों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए घुसपैठियों के नेटवर्क को तोड़ने के लिए दृढ़ संकल्पित है।

उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस और विपक्षी दल वोट बैंक की भूख में विदेशी घुसपैठियों के संरक्षण में जुटे हुए हैं। विपक्षी दल जो षड्यंत्र रच रहे हैं, वह गरीब, दलित, आदिवासी के खिलाफ है, लेकिन हम विपक्षी दलों के षड्यंत्र को कामयाब नहीं होने देंगे।

टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा के केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर दिए गए बयान पर भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ ने कहा कि महुआ मोइत्रा का बयान किसी भी लोकतांत्रिक राजनीति पर एक धब्बा है। इस जहरीली भाषा ने बंगाल और देशभर के लोगों का अपमान किया है। भाजपा नेताओं को इस तरह की हिंसक धमकियां देना टीएमसी और इंडी गठबंधन की हताशा, कुंठा और अराजक मानसिकता को दर्शाता है। मॉडर्न जिन्ना के रूप में खड़ी ममता बनर्जी को बताना चाहिए कि क्या उनकी पार्टी में लोकतांत्रिक बहस की अनुमति नहीं दी जाती है या केवल जहरीली और हिंसक भाषा का इस्तेमाल ही किया जाता है।

उन्होंने कहा कि देश के गृहमंत्री अमित शाह आतंकवाद और नक्सलवाद को खत्म कर रहे हैं। उनके खिलाफ ऐसी टिप्पणी लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं है। यह भारत की लोकतांत्रिक परंपराओं और संविधान पर हमला है। यह सोच अर्बन नक्सल के इकोसिस्टम का हिस्सा है।

Point of View

हमें यह समझना होगा कि राजनीतिक बयानों का प्रभाव केवल चुनावों तक सीमित नहीं होता, बल्कि यह समाज में विभाजन और असहमति को भी बढ़ा सकता है। हमें एक सशक्त और समरस समाज की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।
NationPress
30/08/2025

Frequently Asked Questions

तरुण चुघ ने क्या कहा?
तरुण चुघ ने वोटर अधिकार यात्रा को 'घुसपैठिया बचाओ यात्रा' कहा है, जो देश की सुरक्षा के खिलाफ है।
इस बयान का क्या प्रभाव हो सकता है?
इस बयान का प्रभाव चुनावी राजनीति में और भी तनाव बढ़ा सकता है, विशेषकर कांग्रेस और भाजपा के बीच।