कर्नाटक सरकार ने किसानों को दी ₹1,260 करोड़ की सूखा राहत, दीपावली से पहले पहली किस्त जारी
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक सरकार ने 5 नवंबर 2026 को दीपावली से पहले राज्य के सूखाग्रस्त किसानों को बड़ी राहत देते हुए इनपुट सब्सिडी की पहली किस्त के रूप में ₹1,260 करोड़ जारी किए, जो पात्र किसानों के खातों में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से सीधे भेजे जाएंगे। मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने घोषणा की कि अगले 15 दिनों में ₹2,500 की दूसरी किस्त भी जारी होगी, जिससे प्रत्येक किसान को कुल ₹5,000 की सहायता मिलेगी।
राहत राशि का ढाँचा और वितरण
मुख्यमंत्री शिवकुमार और उपमुख्यमंत्री एवं राजस्व मंत्री जी. परमेश्वर ने बेंगलुरु के विधान सौधा में पहली किस्त जारी करने की औपचारिक शुरुआत की। सरकार ने तय किया है कि किसानों को प्रति एकड़ ₹2,500 की सहायता दी जाएगी, जो अधिकतम दो एकड़ तक सीमित होगी। इस प्रकार एक किसान को अधिकतम ₹5,000 की राशि DBT के ज़रिए सीधे खाते में मिलेगी। शिवकुमार ने कहा, 'आज हम ₹2,500 की पहली किस्त जारी कर रहे हैं। अगले 15 दिनों में धन की व्यवस्था कर दूसरी किस्त के रूप में ₹2,500 और दिए जाएंगे।'
सूखे का व्यापक असर
मुख्यमंत्री ने बताया कि कर्नाटक इस समय गंभीर सूखे की चपेट में है। वैज्ञानिक आकलन और सरकारी मानकों के आधार पर राज्य के 226 तालुकों को सूखाग्रस्त घोषित किया जा चुका है। राज्य में करीब 57 लाख हेक्टेयर कृषि क्षेत्र प्रभावित हुआ है और किसानों को लगभग ₹62,000 करोड़ का नुकसान होने का अनुमान है। शिवकुमार ने स्पष्ट किया कि यह सूखा-घोषणा किसी राजनीतिक दबाव में नहीं, बल्कि तय नियमों और रिपोर्टों के आधार पर की गई है।
केंद्र से मदद की माँग
कर्नाटक सरकार ने केंद्र सरकार को सूखे से जुड़ी पूरी जानकारी भेजते हुए ₹22,400 करोड़ की सहायता की माँग की है। इसके अतिरिक्त, शिवकुमार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने का समय भी माँगा है, ताकि सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल के साथ सूखे की गंभीर स्थिति पर विस्तृत चर्चा हो सके। केंद्र सरकार की तीन टीमें स्थिति का आकलन करने के लिए राज्य का दौरा भी कर चुकी हैं।
बिजली और पानी की चुनौती
सूखे के कारण किसानों को बिजली और पेयजल उपलब्ध कराना भी बड़ी चुनौती बन गया है। शिवकुमार ने बताया कि सरकार अभी किसानों को मुफ्त बिजली देने पर करीब ₹20,000 करोड़ खर्च कर रही है, लेकिन सूखे के चलते यह खर्च बढ़कर लगभग ₹30,000 करोड़ तक पहुँच सकता है। पड़ोसी राज्यों में भी बिजली की कमी होने के कारण बाहर से बिजली खरीदना मुश्किल हो गया है। गौरतलब है कि राजस्थान के बाद कर्नाटक उन राज्यों में शामिल है जहाँ कृषि पर सबसे अधिक निर्भरता है।
आगे क्या होगा
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि यह राशि किसानों की जिंदगी पूरी तरह नहीं बदल सकती, परंतु सरकार इस कठिन दौर में — खासकर दीपावली के मौके पर — उनके साथ खड़े रहने के लिए प्रतिबद्ध है। विधानसभा में किए गए वादे के अनुसार सहायता राशि को सीधे किसानों के खातों में भेजने की प्रक्रिया अब शुरू हो गई है। सरकार का कहना है कि केंद्र से सूखा राहत पैकेज मिलने तक राज्य अपने संसाधनों से किसानों की मदद जारी रखेगा।