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ट्रांस-अरुणाचल हाईवे मुआवजा घोटाला: ईडी ने ₹6.77 करोड़ की संपत्तियाँ जब्त कीं, कुल वसूली ₹16.90 करोड़ पहुँची

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ट्रांस-अरुणाचल हाईवे मुआवजा घोटाला: ईडी ने ₹6.77 करोड़ की संपत्तियाँ जब्त कीं, कुल वसूली ₹16.90 करोड़ पहुँची

सारांश

ट्रांस-अरुणाचल हाईवे मुआवजा घोटाले में ईडी की जाँच का शिकंजा और कसा — ₹6.77 करोड़ की ताज़ा संपत्ति जब्ती के साथ कुल वसूली ₹16.90 करोड़ पहुँची। एक पूर्व उपायुक्त, एक जूनियर इंजीनियर और एक कथित अयोग्य लाभार्थी की संपत्तियाँ इस बार निशाने पर रहीं।

मुख्य बातें

ईडी ने 6 नवंबर 2026 को ट्रांस-अरुणाचल हाईवे (TAH) मुआवजा घोटाले में ₹6.77 करोड़ की तीन अचल संपत्तियाँ PMLA के तहत जब्त कीं।
जब्त संपत्तियाँ स्वर्गीय केमो लोलेन (तत्कालीन डिप्टी कमिश्नर, जिरो), टोको ताजे के पुत्र और तादार बाबिन के नाम पर दर्ज हैं।
जाँच के अनुसार सरकारी कर्मचारियों ने मिलीभगत से ₹44.98 करोड़ का फर्ज़ी मुआवजा वितरित किया।
तादार बाबिन को कथित तौर पर ₹5.47 करोड़ का मुआवजा मिला, जबकि परियोजना क्षेत्र में उनकी कोई ज़मीन या संपत्ति नहीं थी।
इस मामले में अब तक कुल ₹16.90 करोड़ की अपराध-अर्जित संपत्ति जब्त की जा चुकी है।
विशेष न्यायालय (PMLA), युपिया में अभियोजन शिकायत दर्ज; 30 मार्च 2026 को पूरक शिकायत भी दाखिल।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के ईटानगर उप-क्षेत्रीय कार्यालय ने 6 नवंबर 2026 को ट्रांस-अरुणाचल हाईवे (TAH) भूमि अधिग्रहण मुआवजा घोटाले में ₹6.77 करोड़ मूल्य की अचल संपत्तियों को धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 की धारा 5(1) के तहत अस्थायी रूप से जब्त किया है। इस कार्रवाई के साथ इस मामले में अब तक ज़ब्त की गई कुल अपराध-अर्जित संपत्ति ₹16.90 करोड़ तक पहुँच गई है।

कौन-सी संपत्तियाँ जब्त हुईं

ताज़ा जब्ती में तीन अचल संपत्तियाँ शामिल हैं। पहली, पश्चिम सियांग जिले के आलो स्थित येग्गो गाँव में लगभग 2,250 वर्ग मीटर की एक आवासीय संपत्ति है, जो जीरो के तत्कालीन उपायुक्त स्वर्गीय केमो लोलेन के नाम पर है और जिसका मूल्य ₹2.40 करोड़ आँका गया है। दूसरी, पापुम पारे जिले के दोईमुख स्थित टिगडो गाँव में लगभग 10,720 वर्ग मीटर में फैला 'जेयूच हट्स रिसॉर्ट' है, जो तत्कालीन जूनियर इंजीनियर टोको ताजे के बेटे टोको थाट जोतम के नाम पर दर्ज है और जिसका मूल्य ₹2 करोड़ है। तीसरी, नाहरलगुन के ए-सेक्टर में एक आवासीय/व्यावसायिक संपत्ति है, जो तादार बाबिन के नाम पर है और जिसकी कीमत ₹2.37 करोड़ बताई गई है।

घोटाले का पूरा घटनाक्रम

ईडी ने यह जाँच ईटानगर के एसआईसी (सतर्कता) पुलिस स्टेशन में दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की थी। जाँच में सामने आया कि सरकारी कर्मचारियों ने निजी व्यक्तियों के साथ मिलीभगत करके और सरकारी रिकॉर्ड में हेरफेर करके टीएएच परियोजना (पोटिन-बोपी खंड) के तहत फर्ज़ी या अयोग्य लाभार्थियों को कथित तौर पर ₹44.98 करोड़ का भुगतान किया, जिससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान पहुँचा।

जाँच के अनुसार, एक अयोग्य व्यक्ति को धोखाधड़ी से लाभार्थी सूची में शामिल करने के बदले स्वर्गीय केमो लोलेन को कथित तौर पर ₹2 करोड़ दिए गए। इनमें से ₹40 लाख 'मेसर्स तेनजिन एंटरप्राइज़ेज़' के ज़रिए भेजे गए और बाद में उनके बेटे के माध्यम से उन्हें सौंपे गए।

इसके अलावा, ₹2 करोड़ टोको ताजे की पत्नी टोको योच के बैंक खाते में स्थानांतरित किए गए, जिन्हें बाद में कई अलग-अलग खातों के ज़रिए लेयरिंग द्वारा छिपाने की कोशिश की गई। वहीं तादार बाबिन को कथित तौर पर लगभग ₹5.47 करोड़ का मुआवजा दिया गया, जबकि जाँच में पाया गया कि परियोजना क्षेत्र में उनके पास न कोई भूमि थी, न कोई ढाँचा, और न ही वे कानूनी रूप से मुआवजे के हकदार थे।

पहले की जाँच कार्रवाइयाँ

इस मामले में पूर्व की कार्रवाइयों में लगभग ₹5.14 करोड़ के बैंक बैलेंस और जमा को फ्रीज़ करना तथा 6 फरवरी 2026 को की गई तलाशी में ₹2.62 करोड़ नकद जब्त करना शामिल है। इस नकदी में लिखा माज से ₹2.40 करोड़ और तादार बाबिन से ₹22 लाख बरामद हुए थे। साथ ही तादार बाबिन और लिखा माज की ₹2.37 करोड़ मूल्य की अचल संपत्तियाँ भी पहले जब्त की जा चुकी हैं।

न्यायालय में कार्यवाही

ईडी ने इस मामले में 12 मार्च 2024 को अभियोजन शिकायत दर्ज की थी, जिसका संज्ञान विशेष न्यायालय (PMLA), युपिया ने 14 मार्च 2024 को लिया। इसके बाद 30 मार्च 2026 को एक पूरक अभियोजन शिकायत भी दाखिल की गई। ईडी की ओर से आगे की जाँच जारी बताई जा रही है।

आगे क्या होगा

गौरतलब है कि यह मामला अरुणाचल प्रदेश में सार्वजनिक बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं में भूमि अधिग्रहण मुआवजे की प्रक्रिया में कथित पारदर्शिता की कमी को उजागर करता है। ईडी की जाँच का दायरा अभी और विस्तृत होने की संभावना है, क्योंकि ₹44.98 करोड़ के कुल कथित भुगतान के सापेक्ष अब तक ₹16.90 करोड़ की ही वसूली हो पाई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

यानी करोड़ों अभी भी अज्ञात हैं। इससे बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या TAH जैसी राष्ट्रीय महत्व की परियोजनाओं में प्रशासनिक निगरानी तंत्र पर्याप्त रूप से मज़बूत है। एक मृत अधिकारी की संपत्ति जब्त होना और एक ऐसे व्यक्ति को ₹5.47 करोड़ का मुआवजा मिलना जिसकी वहाँ एक इंच जमीन भी नहीं थी — ये तथ्य अकेले ही बताते हैं कि यह प्रणालीगत विफलता थी, न कि महज व्यक्तिगत भ्रष्टाचार।
RashtraPress
6 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ट्रांस-अरुणाचल हाईवे मुआवजा घोटाला क्या है?
यह TAH परियोजना के पोटिन-बोपी खंड के तहत भूमि अधिग्रहण मुआवजे के आकलन और वितरण में हुई कथित अनियमितताओं से जुड़ा मामला है। जाँच के अनुसार सरकारी कर्मचारियों ने मिलीभगत से रिकॉर्ड में हेरफेर करके फर्ज़ी या अयोग्य लाभार्थियों को ₹44.98 करोड़ का भुगतान किया।
ईडी ने इस बार किन संपत्तियों को जब्त किया है?
ईडी ने ₹6.77 करोड़ की तीन अचल संपत्तियाँ जब्त की हैं — पश्चिम सियांग जिले में स्वर्गीय केमो लोलेन की ₹2.40 करोड़ की आवासीय संपत्ति, पापुम पारे में टोको ताजे के बेटे के नाम पर दर्ज ₹2 करोड़ का 'जेयूच हट्स रिसॉर्ट', और नाहरलगुन में तादार बाबिन की ₹2.37 करोड़ की आवासीय/व्यावसायिक संपत्ति।
इस घोटाले में अब तक कुल कितनी संपत्ति जब्त हुई है?
ताज़ा जब्ती के बाद इस मामले में कुल ₹16.90 करोड़ की अपराध-अर्जित संपत्ति जब्त की जा चुकी है। इसमें ₹5.14 करोड़ के फ्रीज़ बैंक खाते, 6 फरवरी 2026 की तलाशी में ₹2.62 करोड़ नकद, पहले जब्त अचल संपत्तियाँ और अब की ₹6.77 करोड़ की ताज़ा जब्ती शामिल हैं।
तादार बाबिन को मुआवजा देने पर सवाल क्यों उठे हैं?
जाँच में पाया गया कि तादार बाबिन के पास परियोजना क्षेत्र में न कोई भूमि थी, न कोई ढाँचा, और न ही वे कानूनी रूप से मुआवजे के पात्र थे। इसके बावजूद उन्हें कथित तौर पर ₹5.47 करोड़ का मुआवजा दिया गया, जिसे ईडी ने 'अपराध से अर्जित राशि' माना है।
इस मामले में न्यायालय की कार्यवाही की स्थिति क्या है?
ईडी ने 12 मार्च 2024 को विशेष न्यायालय (PMLA), युपिया में अभियोजन शिकायत दायर की थी, जिसका संज्ञान 14 मार्च 2024 को लिया गया। इसके बाद 30 मार्च 2026 को पूरक अभियोजन शिकायत भी दाखिल की गई है और आगे की जाँच जारी है।
राष्ट्र प्रेस
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