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ईडी ने मोगा विधायक अमनदीप कौर अरोड़ा के 7 ठिकानों पर छापा, NH मुआवजा घोटाले में बड़ी कार्रवाई

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ईडी ने मोगा विधायक अमनदीप कौर अरोड़ा के 7 ठिकानों पर छापा, NH मुआवजा घोटाले में बड़ी कार्रवाई

सारांश

ईडी ने मोगा विधायक अमनदीप कौर अरोड़ा के 7 ठिकानों पर छापा मारा। NH 754ए के लिए जमीन अधिग्रहण के मुआवजे में ₹1 करोड़ से अधिक की धोखाधड़ी, बेनामी संपत्तियाँ और राजस्व रिकॉर्ड में हेरफेर — पंजाब में एक और बड़ा भूमि घोटाला सामने।

मुख्य बातें

ईडी ने 4 नवंबर 2026 को पंजाब के मोगा विधायक अमनदीप कौर अरोड़ा और सहयोगियों के 7 ठिकानों पर तलाशी ली।
कार्रवाई पीएमएलए, 2002 के तहत, NH 754ए भूमि मुआवजे में ₹1 करोड़ से अधिक की कथित धोखाधड़ी के मामले में।
तलाशी में दस्तावेज़, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और बेनामी संपत्तियों से जुड़े साक्ष्य मिले; अरोड़ा का अस्पताल और नशा मुक्ति केंद्र भी जांच के दायरे में।
कथित धोखाधड़ी में केंद्र, राज्य, नगर निगम और चैरिटेबल संस्था की कुल 5 अलग-अलग संपत्तियाँ शामिल।
मुआवजे की रकम दिलखुश कुमारी के बैंक खाते में जमा हुई, जिसे बाद में फ्रीज कर दिया गया।
पंजाब पुलिस पटवारी नवदीप सिंह के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर चुकी है; ईडी की जांच जारी।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 4 नवंबर 2026 को पंजाब के मोगा निर्वाचन क्षेत्र की विधायक एवं चिकित्सक अमनदीप कौर अरोड़ा, उनके परिवार के सदस्यों और सहयोगियों के सात ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया। यह कार्रवाई नेशनल हाईवे नंबर 754ए के लिए अधिग्रहीत भूमि के मुआवजे में ₹1 करोड़ से अधिक की कथित धोखाधड़ी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में की गई है।

मामले की पृष्ठभूमि

ईडी के चंडीगढ़ जोनल ऑफिस-I ने यह तलाशी 'प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट' (पीएमएलए), 2002 के प्रावधानों के तहत चलाई। जांच की शुरुआत मोगा जिले के धर्मकोट पुलिस स्टेशन में पटवारी नवदीप सिंह, दिलखुश कुमारी और अन्य आरोपियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर के आधार पर की गई थी।

यह एफआईआर मोगा जिले के अधरमन गांव में सरकारी जमीन के राजस्व रिकॉर्ड में कथित हेराफेरी से संबंधित है, जिसके कारण हाईवे अधिग्रहण के बदले ₹1 करोड़ से ज़्यादा का मुआवजा गलत तरीके से वितरित किए जाने का आरोप है।

तलाशी में क्या मिला

तलाशी के दौरान ईडी को दस्तावेज़, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और अन्य साक्ष्य मिले, जो कथित रूप से बेनामी संपत्तियों के अधिग्रहण की ओर इशारा करते हैं। जिन परिसरों में छापा मारा गया, उनमें अरोड़ा से जुड़ा एक अस्पताल और एक नशा मुक्ति केंद्र भी शामिल है।

ईडी के अनुसार, कथित तौर पर मुआवजे की रकम दिलखुश कुमारी के बैंक खाते में जमा की गई थी, जिसे बाद में बैंक ने फ्रीज कर दिया। जांच में यह भी सामने आया है कि विधायक, उनके पति और सहयोगियों ने मिलकर इस रकम को कथित रूप से हड़पने और इधर-उधर करने में सहयोग किया।

संपत्तियों की धोखाधड़ी का खुलासा

ईडी की जांच में कई सरकारी, नगर निगम और चैरिटेबल संपत्तियों को कथित रूप से धोखाधड़ी से हासिल करने और हस्तांतरित करने का खुलासा हुआ है। इनमें निम्नलिखित शामिल हैं:

जीरा रोड पर केंद्र सरकार की 13 मरला जमीन; सिविल लाइंस में पंजाब सरकार की 7 मरला जमीन; रेलवे रोड पर मार्केट कमेटी की 6 मरला जमीन; मोगा महला सिंह-3 में नगर निगम की 3 कनाल 16 मरला जमीन; और 'यूनाइटेड चर्च ऑफ नॉर्दर्न इंडिया ट्रस्ट एसोसिएशन' की 52 मरला 8 सरसाही जमीन।

ईडी के बयान के अनुसार, इन संपत्तियों को राजस्व रिकॉर्ड में कथित हेरफेर और जाली दस्तावेज़ तैयार करके विधायक के रिश्तेदारों और संबंधित व्यक्तियों के नाम हस्तांतरित किया गया।

चार्जशीट और आगे की जांच

पंजाब पुलिस पहले ही पटवारी नवदीप सिंह के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर चुकी है। ईडी ने बताया कि मोगा में एक आवासीय संपत्ति के अधिग्रहण में कथित तौर पर बिना हिसाब-किताब वाली नगदी के इस्तेमाल की बात भी जांच में सामने आई है।

बरामद की गई सामग्री की जांच जारी है। गौरतलब है कि यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब पंजाब में सत्ता और नौकरशाही के बीच भूमि रिकॉर्ड से जुड़ी अनियमितताओं पर पहले से ही बहस चल रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

सरकारी, नगर निगम और धार्मिक संस्थाओं की ज़मीनें एक साथ जाली दस्तावेजों के ज़रिए हस्तांतरित की गईं — यह किसी एकाकी घटना का नहीं, बल्कि सुनियोजित तंत्र का संकेत है। असली सवाल यह है कि पटवारी स्तर की एफआईआर से शुरू हुई यह जांच एक निर्वाचित प्रतिनिधि तक कैसे पहुंची, और क्या ईडी की जांच संपत्ति फ्रीज और चार्जशीट तक पहुंच पाएगी।
RashtraPress
6 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ईडी ने मोगा विधायक अमनदीप कौर अरोड़ा के ठिकानों पर छापा क्यों मारा?
ईडी ने यह छापेमारी नेशनल हाईवे नंबर 754ए के लिए अधिग्रहीत भूमि के मुआवजे में ₹1 करोड़ से अधिक की कथित धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग की जांच के तहत की। आरोप है कि राजस्व रिकॉर्ड में हेरफेर कर सरकारी और अन्य संपत्तियाँ विधायक के रिश्तेदारों के नाम हस्तांतरित की गईं।
इस मामले में पहली एफआईआर किसके खिलाफ दर्ज हुई थी?
पहली एफआईआर मोगा के धर्मकोट पुलिस स्टेशन में पटवारी नवदीप सिंह, दिलखुश कुमारी और अन्य लोगों के खिलाफ आईपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज की गई थी। पंजाब पुलिस नवदीप सिंह के खिलाफ चार्जशीट भी दाखिल कर चुकी है।
तलाशी में कौन-सी संपत्तियाँ संदिग्ध पाई गईं?
ईडी की जांच में पाँच श्रेणियों की संपत्तियाँ संदिग्ध पाई गईं — केंद्र सरकार की 13 मरला, पंजाब सरकार की 7 मरला, मार्केट कमेटी की 6 मरला, नगर निगम की 3 कनाल 16 मरला, और 'यूनाइटेड चर्च ऑफ नॉर्दर्न इंडिया ट्रस्ट एसोसिएशन' की 52 मरला 8 सरसाही जमीन।
मुआवजे की रकम का क्या हुआ?
ईडी के अनुसार, हाईवे अधिग्रहण की कथित धोखाधड़ी से मिली मुआवजे की रकम दिलखुश कुमारी के बैंक खाते में जमा की गई थी, जिसे बाद में बैंक ने फ्रीज कर दिया। जांच में यह भी सामने आया है कि विधायक, उनके पति और सहयोगियों ने इस रकम को आगे ठिकाने लगाने में कथित भूमिका निभाई।
इस मामले में आगे क्या हो सकता है?
ईडी बरामद दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जांच जारी रखे हुए है। पीएमएलए के तहत जांच पूरी होने के बाद संपत्तियों की कुर्की और आरोपियों के खिलाफ औपचारिक कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
राष्ट्र प्रेस
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