ईडी की पूर्व पंजाब मंत्री सुंदर शाम अरोड़ा के 14 ठिकानों पर छापेमारी, PSIEC प्लॉट घोटाले की जांच
सारांश
मुख्य बातें
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने पूर्व पंजाब उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री सुंदर शाम अरोड़ा, उनके बेटे प्रतीक अरोड़ा और उनके कारोबारी सहयोगियों से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में 2 और 3 नवंबर 2026 को पंजाब और चंडीगढ़ में 14 ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया। ईडी के जालंधर जोनल कार्यालय ने यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत की। यह जांच पंजाब विजिलेंस ब्यूरो द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू हुई थी, जिसमें अरोड़ा पर ज्ञात आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोप हैं।
छापेमारी में क्या मिला
तलाशी के दौरान ईडी ने होशियारपुर स्थित सुंदर शाम अरोड़ा के आवास, शिवम अस्पताल तथा चंडीगढ़ और मोहाली में स्थित कई व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर दबिश दी। बरामद सामग्री में मोबाइल फोन, आपत्तिजनक दस्तावेज, संपत्ति संबंधी कागजात, पंजाब स्मॉल इंडस्ट्रीज एंड एक्सपोर्ट कॉरपोरेशन (PSIEC) के औद्योगिक प्लॉटों से जुड़े रिकॉर्ड और डिजिटल उपकरण शामिल हैं। साथ ही कुछ बैंक लॉकर भी फ्रीज किए गए हैं।
जिन कंपनियों के ठिकानों पर छापे पड़े, उनमें एसआरजी बिल्डर्स एंड प्रमोटर्स प्राइवेट लिमिटेड, जीआरजी डेवलपर्स एंड प्रमोटर्स एलएलपी और गुलमोहर टाउनशिप इंडिया प्राइवेट लिमिटेड शामिल हैं। इन कंपनियों के प्रमोटरों, निदेशकों और सहयोगियों के परिसर भी जांच के दायरे में आए।
रिश्वत और गिरफ्तारी का पृष्ठभूमि
ईडी के अनुसार, अरोड़ा ने अपने खिलाफ लंबित विजिलेंस जांच को निपटाने के लिए एक वरिष्ठ अधिकारी को ₹1 करोड़ की रिश्वत देने की पेशकश की थी। उन्हें 15 अक्टूबर 2022 को जीरकपुर में ₹50 लाख नकद अग्रिम राशि देते समय रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया था।
गौरतलब है कि सुंदर शाम अरोड़ा मार्च 2017 से सितंबर 2021 तक पंजाब के उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री रहे थे। इस अवधि के दौरान उनका PSIEC के कामकाज पर सीधा प्रशासनिक नियंत्रण था।
PSIEC प्लॉट आवंटन में कथित अनियमितताएँ
जांच एजेंसी का आरोप है कि मंत्री पद पर रहते हुए अरोड़ा ने निजी रियल एस्टेट कंपनियों को PSIEC के मूल्यवान औद्योगिक भूखंडों के हस्तांतरण में अनुचित लाभ पहुँचाया। बदले में, कथित तौर पर उन्होंने अपने बेटे प्रतीक अरोड़ा के नाम पर इन कंपनियों में हिस्सेदारी हासिल की।
एक विशेष मामले में, मोहाली फेज-8 स्थित औद्योगिक प्लॉट संख्या ए-32 — जो मूल रूप से PSIEC द्वारा जेसीटी इलेक्ट्रॉनिक्स को आवंटित था — फरवरी 2020 में एआरसीआईएल (ARCIL) द्वारा आयोजित नीलामी के जरिए जीआरजी डेवलपर्स एंड प्रमोटर्स एलएलपी को ₹90.56 करोड़ में बेचा गया।
ईडी का कहना है कि लीज डीड की शर्तों के तहत PSIEC को बिक्री मूल्य का 50 प्रतिशत हिस्सा, बढ़ी हुई भूमि लागत और ट्रांसफर शुल्क मिलना चाहिए था, लेकिन यह राशि पूरी तरह जमा नहीं की गई।
त्रिपक्षीय समझौते और बकाया वसूली में ढिलाई
एजेंसी के मुताबिक, अगस्त 2021 में PSIEC, ARCIL और जीआरजी के बीच त्रिपक्षीय समझौता रद्द होने के बावजूद न तो लीज रद्द की गई और न ही प्लॉट वापस लेने की कोई कार्रवाई की गई। ईडी का आरोप है कि तत्कालीन मंत्री अरोड़ा ने बाद में बकाया राशि और शुल्क की गणना से जुड़े प्रस्तावों को मंजूरी दी थी, और वे इस प्लॉट से जुड़े मामलों में सीधे तौर पर शामिल थे।
बैंक रिकॉर्ड के विश्लेषण में कथित तौर पर यह भी सामने आया है कि अरोड़ा ने अपने बेटे प्रतीक अरोड़ा के माध्यम से इस प्लॉट की खरीद में निवेश किया था। यह ऐसे समय में आया है जब केंद्रीय एजेंसियाँ राज्यों में PSIEC जैसे सार्वजनिक उपक्रमों में कथित भ्रष्टाचार की श्रृंखला की जांच तेज कर रही हैं। आने वाले दिनों में ईडी इस मामले में और गिरफ्तारियाँ या संपत्तियों की कुर्की कर सकती है।