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ईडी की पूर्व पंजाब मंत्री सुंदर शाम अरोड़ा के 14 ठिकानों पर छापेमारी, PSIEC प्लॉट घोटाले की जांच

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ईडी की पूर्व पंजाब मंत्री सुंदर शाम अरोड़ा के 14 ठिकानों पर छापेमारी, PSIEC प्लॉट घोटाले की जांच

सारांश

ईडी ने पूर्व पंजाब मंत्री सुंदर शाम अरोड़ा के 14 ठिकानों पर छापे मारे — यह PSIEC के ₹90.56 करोड़ के औद्योगिक प्लॉट हस्तांतरण, ₹1 करोड़ की कथित रिश्वत और बेटे के नाम पर रियल एस्टेट हिस्सेदारी से जुड़ी व्यापक मनी लॉन्ड्रिंग जांच का हिस्सा है।

मुख्य बातें

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 2-3 नवंबर 2026 को पंजाब और चंडीगढ़ में 14 ठिकानों पर PMLA के तहत तलाशी ली।
पूर्व मंत्री सुंदर शाम अरोड़ा को 15 अक्टूबर 2022 को ₹50 लाख नकद रिश्वत देते हुए जीरकपुर में गिरफ्तार किया गया था; कुल रिश्वत राशि ₹1 करोड़ कथित।
मोहाली फेज-8 स्थित PSIEC प्लॉट ए-32 को ₹90.56 करोड़ में जीआरजी डेवलपर्स को हस्तांतरित किया गया; PSIEC को लीज शर्तों के तहत 50% हिस्सा नहीं मिला।
अरोड़ा पर आरोप: बेटे प्रतीक अरोड़ा के नाम पर रियल एस्टेट कंपनियों में हिस्सेदारी और प्लॉट खरीद में निवेश।
छापों में मोबाइल, दस्तावेज, डिजिटल उपकरण बरामद; कई बैंक लॉकर फ्रीज ।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने पूर्व पंजाब उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री सुंदर शाम अरोड़ा, उनके बेटे प्रतीक अरोड़ा और उनके कारोबारी सहयोगियों से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में 2 और 3 नवंबर 2026 को पंजाब और चंडीगढ़ में 14 ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया। ईडी के जालंधर जोनल कार्यालय ने यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत की। यह जांच पंजाब विजिलेंस ब्यूरो द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू हुई थी, जिसमें अरोड़ा पर ज्ञात आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोप हैं।

छापेमारी में क्या मिला

तलाशी के दौरान ईडी ने होशियारपुर स्थित सुंदर शाम अरोड़ा के आवास, शिवम अस्पताल तथा चंडीगढ़ और मोहाली में स्थित कई व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर दबिश दी। बरामद सामग्री में मोबाइल फोन, आपत्तिजनक दस्तावेज, संपत्ति संबंधी कागजात, पंजाब स्मॉल इंडस्ट्रीज एंड एक्सपोर्ट कॉरपोरेशन (PSIEC) के औद्योगिक प्लॉटों से जुड़े रिकॉर्ड और डिजिटल उपकरण शामिल हैं। साथ ही कुछ बैंक लॉकर भी फ्रीज किए गए हैं।

जिन कंपनियों के ठिकानों पर छापे पड़े, उनमें एसआरजी बिल्डर्स एंड प्रमोटर्स प्राइवेट लिमिटेड, जीआरजी डेवलपर्स एंड प्रमोटर्स एलएलपी और गुलमोहर टाउनशिप इंडिया प्राइवेट लिमिटेड शामिल हैं। इन कंपनियों के प्रमोटरों, निदेशकों और सहयोगियों के परिसर भी जांच के दायरे में आए।

रिश्वत और गिरफ्तारी का पृष्ठभूमि

ईडी के अनुसार, अरोड़ा ने अपने खिलाफ लंबित विजिलेंस जांच को निपटाने के लिए एक वरिष्ठ अधिकारी को ₹1 करोड़ की रिश्वत देने की पेशकश की थी। उन्हें 15 अक्टूबर 2022 को जीरकपुर में ₹50 लाख नकद अग्रिम राशि देते समय रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया था।

गौरतलब है कि सुंदर शाम अरोड़ा मार्च 2017 से सितंबर 2021 तक पंजाब के उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री रहे थे। इस अवधि के दौरान उनका PSIEC के कामकाज पर सीधा प्रशासनिक नियंत्रण था।

PSIEC प्लॉट आवंटन में कथित अनियमितताएँ

जांच एजेंसी का आरोप है कि मंत्री पद पर रहते हुए अरोड़ा ने निजी रियल एस्टेट कंपनियों को PSIEC के मूल्यवान औद्योगिक भूखंडों के हस्तांतरण में अनुचित लाभ पहुँचाया। बदले में, कथित तौर पर उन्होंने अपने बेटे प्रतीक अरोड़ा के नाम पर इन कंपनियों में हिस्सेदारी हासिल की।

एक विशेष मामले में, मोहाली फेज-8 स्थित औद्योगिक प्लॉट संख्या ए-32 — जो मूल रूप से PSIEC द्वारा जेसीटी इलेक्ट्रॉनिक्स को आवंटित था — फरवरी 2020 में एआरसीआईएल (ARCIL) द्वारा आयोजित नीलामी के जरिए जीआरजी डेवलपर्स एंड प्रमोटर्स एलएलपी को ₹90.56 करोड़ में बेचा गया।

ईडी का कहना है कि लीज डीड की शर्तों के तहत PSIEC को बिक्री मूल्य का 50 प्रतिशत हिस्सा, बढ़ी हुई भूमि लागत और ट्रांसफर शुल्क मिलना चाहिए था, लेकिन यह राशि पूरी तरह जमा नहीं की गई।

त्रिपक्षीय समझौते और बकाया वसूली में ढिलाई

एजेंसी के मुताबिक, अगस्त 2021 में PSIEC, ARCIL और जीआरजी के बीच त्रिपक्षीय समझौता रद्द होने के बावजूद न तो लीज रद्द की गई और न ही प्लॉट वापस लेने की कोई कार्रवाई की गई। ईडी का आरोप है कि तत्कालीन मंत्री अरोड़ा ने बाद में बकाया राशि और शुल्क की गणना से जुड़े प्रस्तावों को मंजूरी दी थी, और वे इस प्लॉट से जुड़े मामलों में सीधे तौर पर शामिल थे।

बैंक रिकॉर्ड के विश्लेषण में कथित तौर पर यह भी सामने आया है कि अरोड़ा ने अपने बेटे प्रतीक अरोड़ा के माध्यम से इस प्लॉट की खरीद में निवेश किया था। यह ऐसे समय में आया है जब केंद्रीय एजेंसियाँ राज्यों में PSIEC जैसे सार्वजनिक उपक्रमों में कथित भ्रष्टाचार की श्रृंखला की जांच तेज कर रही हैं। आने वाले दिनों में ईडी इस मामले में और गिरफ्तारियाँ या संपत्तियों की कुर्की कर सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

और त्रिपक्षीय समझौता रद्द होने के बाद भी कोई कार्रवाई न होना — यह संस्थागत निगरानी की विफलता की ओर इशारा करता है, न कि महज व्यक्तिगत भ्रष्टाचार की। असली सवाल यह है कि जब समझौता टूटा, तब PSIEC के बोर्ड और राज्य सरकार ने चुप्पी क्यों साधी — और यह जाँच वहाँ तक पहुँचती है या नहीं।
RashtraPress
6 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ईडी ने सुंदर शाम अरोड़ा के ठिकानों पर छापे क्यों मारे?
ईडी ने पूर्व पंजाब उद्योग मंत्री सुंदर शाम अरोड़ा, उनके बेटे प्रतीक अरोड़ा और सहयोगियों के खिलाफ चल रही मनी लॉन्ड्रिंग जांच के तहत PMLA, 2002 के तहत 2-3 नवंबर को 14 ठिकानों पर तलाशी ली। यह जांच पंजाब विजिलेंस ब्यूरो की उस एफआईआर पर आधारित है जिसमें अरोड़ा पर ज्ञात आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने का आरोप है।
सुंदर शाम अरोड़ा को कब और कैसे गिरफ्तार किया गया था?
अरोड़ा को 15 अक्टूबर 2022 को जीरकपुर में उस समय रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया जब वे विजिलेंस ब्यूरो के एक वरिष्ठ अधिकारी को ₹50 लाख नकद अग्रिम राशि दे रहे थे। आरोप है कि यह ₹1 करोड़ की कुल रिश्वत का हिस्सा था जो अपने खिलाफ लंबित जांच रुकवाने के लिए दी जा रही थी।
PSIEC के मोहाली प्लॉट से जुड़ा घोटाला क्या है?
मोहाली फेज-8 स्थित प्लॉट ए-32, जो PSIEC द्वारा जेसीटी इलेक्ट्रॉनिक्स को आवंटित था, फरवरी 2020 में ARCIL की नीलामी के ज़रिए जीआरजी डेवलपर्स एंड प्रमोटर्स एलएलपी को ₹90.56 करोड़ में हस्तांतरित किया गया। ईडी का आरोप है कि लीज शर्तों के तहत PSIEC को देय 50% हिस्सा और अन्य शुल्क पूरी तरह जमा नहीं किए गए।
इस मामले में प्रतीक अरोड़ा की क्या भूमिका बताई गई है?
ईडी के अनुसार, सुंदर शाम अरोड़ा ने अपने बेटे प्रतीक अरोड़ा के नाम पर रियल एस्टेट कंपनियों में हिस्सेदारी हासिल की और मोहाली प्लॉट की खरीद में बेटे के माध्यम से निवेश किया। बैंक रिकॉर्ड से यह कथित संबंध सामने आया है।
छापेमारी के बाद आगे क्या हो सकता है?
बरामद दस्तावेजों, डिजिटल उपकरणों और फ्रीज किए गए बैंक लॉकरों के विश्लेषण के आधार पर ईडी आगे संपत्तियों की कुर्की या नई गिरफ्तारियाँ कर सकती है। पंजाब विजिलेंस ब्यूरो की मूल एफआईआर में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के तहत मामला पहले से दर्ज है।
राष्ट्र प्रेस
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