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हाईवे घोटाला: डीएमके विधायक ई.वी. वेलु डीवीएसी के सामने पेश, ₹3.23 करोड़ के कथित घोटाले में पूछताछ

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हाईवे घोटाला: डीएमके विधायक ई.वी. वेलु डीवीएसी के सामने पेश, ₹3.23 करोड़ के कथित घोटाले में पूछताछ

सारांश

मद्रास उच्च न्यायालय के आदेश के बाद DMK विधायक और पूर्व राजमार्ग मंत्री ई.वी. वेलु 15 जुलाई को DVAC के सामने पेश हुए। करूर जिले में ₹3.23 करोड़ की कथित अधूरी सड़क परियोजना के घोटाले में उन सहित 11 लोग आरोपी हैं। 25 जून की छापेमारी में 20 ठिकानों से दस्तावेज़ ज़ब्त किए गए थे।

मुख्य बातें

पूर्व राजमार्ग मंत्री और DMK विधायक ई.वी.
वेलु 15 जुलाई को DVAC के सामने पूछताछ के लिए पेश हुए।
मामला करूर जिले में कथित रूप से अधूरी सड़क परियोजना के लिए ₹3.23 करोड़ की सरकारी राशि के दुरुपयोग से जुड़ा है।
DVAC ने वेलु सहित राजमार्ग विभाग के 9 इंजीनियरों और एक अन्य अधिकारी — कुल 11 लोगों — को आरोपी बनाया है।
25 जून को 20 ठिकानों पर छापेमारी की गई, जिनमें चेन्नई के अलवरपेट स्थित वेलु का आवास भी शामिल था।
मद्रास उच्च न्यायालय के निर्देश पर वेलु पेश हुए; पहले 3 जुलाई को सिंगापुर में इलाज का हवाला देकर पेश नहीं हुए थे।

तमिलनाडु के पूर्व राजमार्ग मंत्री और द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) विधायक ई.वी. वेलु 15 जुलाई को चेन्नई स्थित सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक निदेशालय (DVAC) कार्यालय में पेश हुए, जहाँ उनसे ₹3.23 करोड़ के कथित राजमार्ग घोटाले के सिलसिले में पूछताछ की गई। यह मामला पिछली DMK सरकार के कार्यकाल के दौरान करूर जिले में कथित रूप से अधूरी छोड़ी गई सड़क निर्माण परियोजना से जुड़ा है, जिसके लिए सरकारी राशि का दावा किया गया था।

मामले की पृष्ठभूमि

जाँच एजेंसी के अनुसार, करूर जिले में एक सड़क निर्माण परियोजना के लिए ₹3.23 करोड़ की सरकारी राशि का दावा किया गया, जबकि आरोप है कि यह परियोजना कभी पूरी ही नहीं की गई। DVAC ने इस मामले में तिरुवन्नामलाई विधानसभा क्षेत्र से विधायक ई.वी. वेलु, राजमार्ग विभाग के नौ इंजीनियरों और एक अन्य अधिकारी सहित कुल 11 लोगों को आरोपी बनाया है। जाँचकर्ताओं को संदेह है कि अधूरे या न किए गए कार्य का भुगतान प्राप्त करने के लिए फर्जी रिकॉर्ड और नकली दस्तावेजों का सहारा लिया गया।

छापेमारी और दस्तावेज़ ज़ब्ती

DVAC अधिकारियों ने 25 जून को आरोपियों से जुड़े करीब 20 ठिकानों पर छापेमारी की, जिनमें चेन्नई के अलवरपेट स्थित ई.वी. वेलु का आवास भी शामिल था। तलाशी के दौरान जाँचकर्ताओं ने कई दस्तावेज़ और रिकॉर्ड ज़ब्त किए, जिनके बारे में माना जाता है कि वे इस मामले से प्रत्यक्ष रूप से जुड़े हैं। बरामद सामग्री की जाँच अभी जारी है, ताकि कथित वित्तीय अनियमितताओं की सीमा और संबंधित व्यक्तियों की भूमिका स्पष्ट हो सके।

मद्रास हाई कोर्ट का हस्तक्षेप

DVAC ने वेलु को पहले 3 जुलाई को पूछताछ के लिए बुलाया था, लेकिन उनके वकीलों ने एजेंसी को सूचित किया कि वे सिंगापुर के एक अस्पताल में इलाज करा रहे हैं और पेश होने में असमर्थ हैं। इसके बाद वेलु ने मद्रास उच्च न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाया और जाँच के विरुद्ध राहत माँगी। न्यायालय ने उन्हें सख्त कार्रवाई से अंतरिम राहत देते हुए निर्देश दिया कि वे जाँच में पूर्ण सहयोग करें और 15 जुलाई को DVAC के समक्ष उपस्थित हों। न्यायालय के आदेश का पालन करते हुए वेलु निर्धारित तिथि पर DVAC कार्यालय पहुँचे।

पूछताछ का दायरा

अधिकारियों के अनुसार, पूछताछ में कथित सड़क परियोजना के कार्य-विवरण, व्यय की स्वीकृति प्रक्रिया और छापेमारी के दौरान ज़ब्त दस्तावेजों से जुड़े सवाल शामिल हैं। गौरतलब है कि यह मामला पिछली सरकार के दौरान शुरू की गई सड़क अवसंरचना परियोजनाओं में कथित अनियमितताओं की व्यापक जाँच का हिस्सा माना जा रहा है।

आगे की कार्रवाई

DVAC की जाँच अभी जारी है। अधिकारियों ने संकेत दिया है कि आगे की कार्रवाई पूछताछ के निष्कर्षों और एकत्र किए गए साक्ष्यों की समीक्षा के आधार पर तय की जाएगी। यह देखना अहम होगा कि क्या इस जाँच का दायरा अन्य परियोजनाओं तक भी विस्तारित होता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो इस जाँच को राजनीतिक रूप से संवेदनशील बनाता है। मद्रास उच्च न्यायालय को हस्तक्षेप करना पड़ा — यह दर्शाता है कि जाँच एजेंसी और आरोपी के बीच टकराव कानूनी मोर्चे पर भी जारी है। असली परीक्षा यह होगी कि ज़ब्त दस्तावेज़ों के आधार पर DVAC अभियोजन तक पहुँच पाती है या नहीं, क्योंकि तमिलनाडु में राजनीतिक रसूख वाले मामले अक्सर जाँच के स्तर पर ही ठंडे पड़ जाते हैं।
RashtraPress
15 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ई.वी. वेलु पर क्या आरोप हैं?
ई.वी. वेलु पर आरोप है कि करूर जिले में एक सड़क निर्माण परियोजना के लिए ₹3.23 करोड़ की सरकारी राशि का दावा किया गया, जबकि यह परियोजना कथित तौर पर कभी पूरी नहीं की गई। DVAC ने उनके खिलाफ राजमार्ग विभाग के 9 इंजीनियरों और एक अन्य अधिकारी सहित कुल 11 लोगों पर मामला दर्ज किया है।
DVAC ने इस मामले में क्या कार्रवाई की है?
DVAC ने 25 जून को आरोपियों से जुड़े करीब 20 ठिकानों पर छापेमारी की, जिनमें चेन्नई के अलवरपेट स्थित ई.वी. वेलु का आवास भी शामिल था। इस दौरान कई दस्तावेज़ और रिकॉर्ड ज़ब्त किए गए, जिनकी जाँच जारी है।
ई.वी. वेलु 3 जुलाई को DVAC के सामने क्यों नहीं पेश हुए?
उनके वकीलों ने DVAC को सूचित किया कि वे सिंगापुर के एक अस्पताल में इलाज करा रहे हैं, इसलिए तय तारीख पर पेश होना संभव नहीं था। इसके बाद वेलु ने मद्रास उच्च न्यायालय में राहत के लिए अर्जी दाखिल की।
मद्रास उच्च न्यायालय ने इस मामले में क्या आदेश दिया?
मद्रास उच्च न्यायालय ने ई.वी. वेलु को सख्त कार्रवाई से अंतरिम राहत देते हुए निर्देश दिया कि वे जाँच में पूरा सहयोग करें और 15 जुलाई को DVAC के समक्ष उपस्थित हों। न्यायालय के इसी आदेश के अनुपालन में वेलु 15 जुलाई को DVAC कार्यालय पहुँचे।
इस मामले में आगे क्या होगा?
DVAC की जाँच अभी जारी है और आगे की कार्रवाई पूछताछ के निष्कर्षों तथा ज़ब्त दस्तावेजों की समीक्षा पर निर्भर करेगी। यह मामला पिछली सरकार के कार्यकाल की सड़क अवसंरचना परियोजनाओं में कथित अनियमितताओं की व्यापक जाँच का हिस्सा है।
राष्ट्र प्रेस
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