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'राहत मित्र': भारत-म्यांमार की पहली त्रि-सेवा HADR कवायद चेन्नई में शुरू, 300 से अधिक जवान शामिल

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'राहत मित्र': भारत-म्यांमार की पहली त्रि-सेवा HADR कवायद चेन्नई में शुरू, 300 से अधिक जवान शामिल

सारांश

भारत और म्यांमार के बीच पहली बार तीनों सेनाओं को एक साथ जोड़ते हुए 'राहत मित्र' अभ्यास चेन्नई में शुरू हुआ। 300 से अधिक जवानों के साथ यह दो दिवसीय कवायद 'पड़ोसी प्रथम' नीति के तहत क्षेत्रीय आपदा प्रतिक्रिया में नई साझेदारी की शुरुआत है।

मुख्य बातें

भारत-म्यांमार के बीच पहली त्रि-सेवा HADR सैन्य कवायद 'राहत मित्र' 5 नवंबर 2026 को चेन्नई में शुरू हुई।
दो दिवसीय अभ्यास ( 5-6 नवंबर ) में दोनों देशों के 300 से अधिक थल सेना, नौसेना और वायुसेना के जवान भाग ले रहे हैं।
अभ्यास में बाढ़ राहत, बचाव अभियान, जल निकासी और पुल निर्माण जैसी आपदा राहत क्षमताओं का प्रदर्शन किया गया।
यह अभ्यास भारत की 'पड़ोसी प्रथम' नीति और 'महासागर' रणनीति के तहत आयोजित किया गया है।
भारतीय नौसेना के तत्वावधान में आयोजित इस पहले संयुक्त अभ्यास का उद्देश्य आपदा राहत में द्विपक्षीय समन्वय मज़बूत करना है।

भारत और म्यांमार के बीच पहली त्रि-सेवा मानवीय सहायता एवं आपदा राहत (HADR) संयुक्त सैन्य अभ्यास 'राहत मित्र' 5 नवंबर 2026 को चेन्नई में शुरू हुई। यह दो दिवसीय अभ्यास 6 नवंबर तक चलेगा, जिसमें दोनों देशों की थल सेना, नौसेना और वायुसेना के 300 से अधिक रक्षा कर्मी हिस्सा ले रहे हैं। भारतीय नौसेना के तत्वावधान में आयोजित यह पहला संयुक्त त्रि-सेवा अभ्यास द्विपक्षीय संबंधों में एक नया मील का पत्थर माना जा रहा है।

अभ्यास का उद्देश्य और संरचना

रक्षा मंत्रालय के अनुसार, 'राहत मित्र' का मुख्य लक्ष्य भारत और म्यांमार के रक्षा बलों के बीच द्विपक्षीय सहयोग को सुदृढ़ करना, आपसी विश्वास बढ़ाना और आपदा राहत अभियानों में तालमेल बेहतर करना है। इस अभ्यास में थल, समुद्र और वायु — तीनों क्षेत्रों में एकीकृत एवं जटिल सैन्य गतिविधियाँ आयोजित की जा रही हैं।

दोनों देशों के रक्षा कर्मियों को पेशेवर अनुभव साझा करने और एक-दूसरे की कार्यप्रणाली समझने का अवसर मिल रहा है। गौरतलब है कि यह पहली बार है जब भारत और म्यांमार के बीच तीनों सेनाओं को एक साथ शामिल करते हुए इस स्तर का मानवीय सहायता अभ्यास आयोजित किया गया है।

प्रदर्शित क्षमताएँ

अभ्यास के दौरान भारतीय सेना, भारतीय नौसेना और भारतीय वायुसेना ने संयुक्त रूप से आपदा राहत क्षमताओं का प्रदर्शन किया। इसमें बाढ़ राहत टुकड़ियों (फ्लड रिलीफ कॉलम) और इंजीनियर टास्क फोर्स की क्षमताएँ प्रमुख रूप से शामिल रहीं।

रक्षा मंत्रालय के चेन्नई स्थित जनसंपर्क अधिकारी के अनुसार, बचाव अभियान, जल निकासी और संपर्क बहाल करने के लिए पुल निर्माण जैसी महत्वपूर्ण गतिविधियों का प्रदर्शन किया गया। इन संयुक्त अभियानों के ज़रिए आपात स्थितियों में तीनों सेनाओं की समन्वित कार्रवाई की क्षमता परखी गई।

रणनीतिक महत्व

रक्षा मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि यह अभ्यास भारत की 'पड़ोसी प्रथम' (Neighbourhood First) नीति और 'महासागर' (क्षेत्रों में सुरक्षा एवं विकास के लिए पारस्परिक और समग्र उन्नति) की रणनीतिक सोच के अनुरूप है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत अपने पड़ोसी देशों के साथ रक्षा सहयोग के नए आयाम स्थापित कर रहा है।

विशेषज्ञों के अनुसार म्यांमार के साथ इस अभ्यास का आयोजन क्षेत्रीय आपदा प्रतिक्रिया ढाँचे को मज़बूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, क्योंकि दोनों देश प्राकृतिक आपदाओं के प्रति संवेदनशील क्षेत्र में स्थित हैं।

आगे की राह

इस पहले संयुक्त त्रि-सेवा अभ्यास से शांति एवं स्थिरता बनाए रखने और संकट के समय मानवीय सहायता उपलब्ध कराने की दोनों देशों की साझा प्रतिबद्धता को बल मिलेगा। रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि 'राहत मित्र' भविष्य में और अधिक व्यापक द्विपक्षीय रक्षा सहयोग की नींव रख सकता है, विशेषकर हिंद महासागर क्षेत्र में बढ़ती भू-राजनीतिक सक्रियता के परिप्रेक्ष्य में।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह भारत के म्यांमार के साथ संबंधों को एक नए स्तर पर ले जाने की कोशिश है — ऐसे वक्त में जब म्यांमार की राजनीतिक अस्थिरता और सीमापार तनाव के बीच भारत की 'पड़ोसी प्रथम' नीति की साख दाँव पर है। थल, समुद्र और वायु तीनों आयामों में एकसाथ अभ्यास करना रणनीतिक परिपक्वता का संकेत है, लेकिन असली परीक्षा तब होगी जब वास्तविक आपदा में इस तालमेल की ज़रूरत पड़े। यह अभ्यास 'महासागर' रणनीति की दिशा में एक ठोस कदम है, पर हिंद महासागर में चीन की बढ़ती उपस्थिति के मद्देनज़र इसे महज़ मानवीय सहयोग तक सीमित नहीं देखा जा सकता।
RashtraPress
6 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'राहत मित्र' सैन्य अभ्यास क्या है?
'राहत मित्र' भारत और म्यांमार के बीच पहली त्रि-सेवा मानवीय सहायता एवं आपदा राहत (HADR) संयुक्त कवायद है, जो 5-6 नवंबर 2026 को चेन्नई में आयोजित की जा रही है। इसमें दोनों देशों के 300 से अधिक थल सेना, नौसेना और वायुसेना के जवान शामिल हैं।
इस अभ्यास में कौन-कौन सी गतिविधियाँ शामिल हैं?
अभ्यास में बाढ़ राहत टुकड़ियों की तैनाती, बचाव अभियान, जल निकासी और पुल निर्माण जैसी आपदा राहत गतिविधियाँ शामिल हैं। इनके माध्यम से तीनों सेनाओं के बीच संयुक्त कार्रवाई और समन्वय की क्षमता का प्रदर्शन किया गया।
यह अभ्यास भारत की किस नीति के तहत आयोजित हुआ है?
रक्षा मंत्रालय के अनुसार यह अभ्यास भारत की 'पड़ोसी प्रथम' (Neighbourhood First) नीति और 'महासागर' रणनीतिक सोच के तहत आयोजित किया गया है। इसका उद्देश्य क्षेत्रीय शांति, स्थिरता और आपदा के समय मानवीय सहायता सुनिश्चित करना है।
इस अभ्यास का रणनीतिक महत्व क्या है?
यह पहला त्रि-सेवा अभ्यास है जो दोनों देशों के रक्षा बलों को एक साथ एकीकृत मंच पर लाता है। यह हिंद महासागर क्षेत्र में द्विपक्षीय रक्षा सहयोग को नई ऊँचाई देता है और आपदा प्रतिक्रिया में समन्वय का आधार तैयार करता है।
इस अभ्यास में कितने देशों और सेवाओं की भागीदारी है?
इस अभ्यास में भारत और म्यांमार — दो देशों की तीनों सेनाएँ (थल, नौ और वायु) शामिल हैं। कुल मिलाकर 300 से अधिक रक्षा कर्मी इस दो दिवसीय कवायद में भाग ले रहे हैं।
राष्ट्र प्रेस
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