भारत-थाईलैंड संयुक्त युद्धाभ्यास 'मैत्री' शुरू: जंगल युद्ध, ड्रोन और मुए थाई का प्रशिक्षण
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय सेना और रॉयल थाई सेना के बीच थाईलैंड के सूरतथानी स्थित विभावदी रंगसित शिविर में संयुक्त युद्धाभ्यास 'मैत्री' का आगाज़ हो गया है। 21 अगस्त 2026 से शुरू हुए इस अभ्यास में दोनों देशों के 85-85 जवान जंगल युद्ध, आतंकवाद रोधी अभियान और मानवरहित हवाई वाहनों (ड्रोन) के संचालन का प्रशिक्षण ले रहे हैं। यह अभ्यास 31 अगस्त 2026 तक चलेगा।
मुख्य घटनाक्रम
अभ्यास का उद्घाटन समारोह रॉयल थाई सेना के 4वें आर्मी एरिया के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल नोराथिप फोयनोक की अध्यक्षता में हुआ। भारतीय दल का प्रतिनिधित्व 9 गोरखा राइफल्स कर रही है, जबकि थाईलैंड की ओर से 3वीं बटालियन, 25वीं इन्फैंट्री ब्रिगेड इस अभ्यास में भाग ले रही है।
दोनों देशों के सैनिक जंगल और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में आतंकवाद रोधी तथा उग्रवाद रोधी अभियानों का अभ्यास कर रहे हैं। इसमें जंगल में आतंकवादियों से मुकाबला करना, प्राथमिक उपचार और घायल सैनिकों को सुरक्षित निकालने की तकनीकें शामिल हैं।
मुए थाई और आधुनिक तकनीक का समन्वय
अभ्यास की एक विशेष पहलू यह रही कि भारतीय सैनिकों को थाईलैंड की पारंपरिक युद्धकला मुए थाई का प्रशिक्षण दिया गया, जिसे आमतौर पर 'आठ अंगों की कला' कहा जाता है। इसमें मुक्कों, कोहनियों, घुटनों और पिंडलियों का समन्वित इस्तेमाल किया जाता है। इस प्रशिक्षण से सैनिकों की शारीरिक क्षमता, फुर्ती और नज़दीकी लड़ाई के कौशल को मज़बूती मिली।
इसके साथ ही, संयुक्त अभियानों में मानवरहित हवाई वाहनों (ड्रोन) के इस्तेमाल पर भी प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिससे सैनिकों को आधुनिक तकनीक के साथ अभियान चलाने का व्यावहारिक अनुभव मिल रहा है।
सांस्कृतिक और सैन्य आदान-प्रदान
यह ऐसे समय में आया है जब भारत अपने दक्षिण-पूर्व एशियाई पड़ोसियों के साथ रक्षा सहयोग को लगातार गहरा कर रहा है। मुए थाई प्रशिक्षण ने दोनों देशों के सैनिकों को एक-दूसरे की संस्कृति और सैन्य परंपराओं को समझने का अवसर दिया, जिससे दोनों दलों के बीच आपसी विश्वास और मैत्री को बल मिला। गौरतलब है कि सैनिक एक-दूसरे के अभियान अनुभव और युद्धक तकनीकों का भी गहन अध्ययन कर रहे हैं।
आगे क्या होगा
अभ्यास के अगले चरणों में प्रशिक्षण को और कठिन बनाया जाएगा। इसका समापन एक प्रमाणीकरण अभ्यास के साथ होगा, जिसमें दोनों देशों के सैनिक संयुक्त अभियान में अर्जित क्षमताओं का प्रदर्शन करेंगे। 'मैत्री' से भारत और थाईलैंड की सेनाओं के बीच सैन्य सहयोग, आपसी समझ और अभियान में तालमेल और मज़बूत होने की उम्मीद है।