प्रगति-2026 सैन्य अभ्यास संपन्न: 13 देशों के 400 सैनिकों ने मेघालय में सीखे आतंकवाद-रोधी अभियानों के गुर
सारांश
मुख्य बातें
मेघालय के उमरोई सैन्य स्टेशन में आयोजित भारतीय सेना के बहुराष्ट्रीय सैन्य अभ्यास 'प्रगति-2026' का 30 मई 2026 को सफलतापूर्वक समापन हुआ। 20 मई से शुरू हुए इस दस दिवसीय संयुक्त अभ्यास में 13 मित्र देशों के 400 से अधिक सैनिकों ने पहाड़ी और जंगल क्षेत्रों में आतंकवाद-रोधी तथा विद्रोह-रोधी अभियानों का गहन प्रशिक्षण लिया। समापन समारोह में भारतीय सेना के वाइस चीफ लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ सहित छह मित्र देशों के उप सेनाध्यक्ष और 40 से अधिक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
अभ्यास का मुख्य घटनाक्रम
अभ्यास का समापन एक 72 घंटे के विशेष युद्धाभ्यास के साथ हुआ, जिसमें एक काल्पनिक परिदृश्य तैयार किया गया। इस परिदृश्य में एक गाँव में उग्रवादियों के छिपे होने की सूचना के आधार पर संयुक्त अभियान चलाया गया। भारतीय सेना के ऑल-टेरेन वाहनों के ज़रिए सैनिकों को तैनात कर गाँव को चारों ओर से घेरा गया।
थल सेना और वायु सेना के हेलिकॉप्टरों से सैनिकों को स्लिदरिंग तकनीक के माध्यम से ऑपरेशन क्षेत्र में उतारा गया, और इसके बाद छिपे आतंकवादियों को मार गिराने अथवा गिरफ्तार करने की कार्रवाई का प्रदर्शन किया गया। अभ्यास में के-9 डॉग स्क्वॉड, रोबोटिक म्यूल और ड्रोन जैसी आधुनिक तकनीकों का भी उपयोग किया गया।
भाग लेने वाले देश और प्रशिक्षण की विषयवस्तु
इस अभ्यास में भारत, भूटान, कंबोडिया, मलेशिया, मालदीव, म्यांमार, नेपाल, फिलीपींस, सेशेल्स, श्रीलंका, वियतनाम, इंडोनेशिया और लाओस की सेनाओं ने हिस्सा लिया। दस दिनों के प्रशिक्षण में सैनिकों ने चट्टानों पर चढ़ाई, घात और प्रतिघात अभ्यास, जंगल में निशानेबाज़ी, कमरों और बसों में बचाव अभियान, आईईडी की पहचान तथा घायलों को सुरक्षित निकालने जैसे विशेष सैन्य कौशलों का अभ्यास किया।
विभिन्न देशों के सैनिकों को मिलाकर बनाई गई मिश्रित टीमों ने संयुक्त प्रशिक्षण लिया, जिससे अंतर-संचालन क्षमता और आपसी विश्वास को मज़बूती मिली।
अभ्यास का उद्देश्य और रणनीतिक महत्व
अभ्यास का नेतृत्व कर रहे भारतीय सेना के कर्नल संदीप पुनिया ने बताया कि 'प्रगति' का अर्थ है — 'हिंद महासागर क्षेत्र में विकास और परिवर्तन के लिए क्षेत्रीय सेनाओं की साझेदारी।' उन्होंने कहा कि इस अभ्यास का उद्देश्य मित्र देशों की सेनाओं के बीच समन्वय स्थापित करना, अंतर-संचालन क्षमता विकसित करना और आपसी विश्वास को सुदृढ़ बनाना था। साथ ही नवीनतम तकनीकों को सैन्य अभियानों में शामिल करने पर भी विस्तृत चर्चा हुई।
गौरतलब है कि यह अभ्यास ऐसे समय में आयोजित हुआ जब हिंद महासागर क्षेत्र में क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोग की माँग लगातार बढ़ रही है। भारत की 'पड़ोसी पहले' और 'एक्ट ईस्ट' नीति के अंतर्गत ऐसे बहुपक्षीय अभ्यास क्षेत्रीय सहयोग का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बनते जा रहे हैं।
मित्र देशों की प्रतिक्रिया
सेशेल्स आर्मी के कंटिंजेंट कमांडर लेफ्टिनेंट कर्नल लुईस अगाथीन ने कहा, 'भारत के लोग अपने अनुभवों को अपने तक सीमित नहीं रखते, बल्कि उन्हें साझा करते हैं। हम यहाँ से बहुत कुछ सीखकर अपने देश लौटेंगे और उसे व्यवहार में लाएँगे। यहाँ आकर हम स्वयं को गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं।'
रॉयल भूटान आर्मी के कंटिंजेंट कमांडर लेफ्टिनेंट कर्नल संगाय जाम्त्शो ने भारतीय सेना को इस पहल के लिए धन्यवाद देते हुए कहा कि 'प्रगति-2026' एक अत्यंत सफल और भव्य बहुराष्ट्रीय अभ्यास रहा, जिसने उनके सैनिकों को आतंकवाद-रोधी अभियानों से जुड़े अनुभव साझा करने का महत्वपूर्ण अवसर दिया। फिलीपींस मरीन कॉर्प्स की स्टाफ सार्जेंट मैरी सिमोंगो ने भी भारतीय सेना की गर्मजोशी भरी मेहमाननवाज़ी और उत्कृष्ट आयोजन की सराहना की।
आगे की दिशा
इस अभ्यास ने हिंद महासागर क्षेत्र के देशों के बीच सामूहिक सुरक्षा क्षमता को एक नया आयाम दिया है। विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे संयुक्त अभ्यासों से न केवल सैन्य अंतर-संचालन क्षमता बढ़ती है, बल्कि क्षेत्रीय स्थिरता के लिए कूटनीतिक विश्वास का भी निर्माण होता है। आने वाले वर्षों में 'प्रगति' श्रृंखला के और विस्तार की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।