14 जुलाई 2026
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'प्रगति 2026' रक्षा प्रदर्शनी: मेघालय में 52 भारतीय कंपनियों ने 12 मित्र देशों को दिखाई स्वदेशी सैन्य ताकत

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'प्रगति 2026' रक्षा प्रदर्शनी: मेघालय में 52 भारतीय कंपनियों ने 12 मित्र देशों को दिखाई स्वदेशी सैन्य ताकत

सारांश

मेघालय के उमरोई में 'प्रगति 2026' के साथ भारत ने पहली बार किसी बहुपक्षीय सैन्य अभ्यास के साथ रक्षा उद्योग प्रदर्शनी को जोड़ा — 52 कंपनियाँ, 12 देश, और ड्रोन से AI तक की स्वदेशी तकनीक। यह आत्मनिर्भर भारत की रक्षा कूटनीति का नया चेहरा है।

मुख्य बातें

'प्रगति 2026' रक्षा प्रदर्शनी 30 मई 2026 को मेघालय के उमरोई में शुरू हुई, जो 31 मई तक चलेगी।
प्रदर्शनी का उद्घाटन सेना उप प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ ने किया।
52 रक्षा संगठनों में 47 निजी कंपनियाँ (MSME व स्टार्टअप सहित) और 5 सार्वजनिक उपक्रम शामिल हैं।
भूटान, इंडोनेशिया, नेपाल, श्रीलंका सहित 12 मित्र देशों के वरिष्ठ सैन्य प्रतिनिधिमंडल भाग ले रहे हैं।
ड्रोन, AI-आधारित रक्षा समाधान, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली और स्वायत्त सैन्य वाहन प्रमुख प्रदर्शनी उत्पाद हैं।
यह पहली बार आयोजित बहुपक्षीय सैन्य अभ्यास 'प्रगति' के साथ समानांतर रूप से आयोजित की जा रही है।

भारतीय सेना की पूर्वी कमान और भारतीय उद्योग एवं वाणिज्य महासंघ (FICCI) के संयुक्त तत्वावधान में मेघालय के उमरोई स्थित विदेशी प्रशिक्षण केंद्र में 30 मई 2026 को बहुपक्षीय रक्षा उद्योग प्रदर्शनी 'प्रगति 2026' का शुभारंभ हुआ। 52 भारतीय रक्षा कंपनियों की भागीदारी और 12 मित्र देशों के वरिष्ठ सैन्य प्रतिनिधिमंडलों की उपस्थिति के साथ यह प्रदर्शनी आत्मनिर्भर भारत के रक्षा निर्यात महत्वाकांक्षाओं की दिशा में एक उल्लेखनीय कदम मानी जा रही है।

प्रदर्शनी का उद्घाटन और आयोजन

प्रदर्शनी का उद्घाटन सेना के उप प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ ने वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों और विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों की उपस्थिति में किया। यह दो दिवसीय आयोजन 30 और 31 मई 2026 तक चलेगा। इसे भारतीय सेना के डिजाइन ब्यूरो के सहयोग से भी आयोजित किया गया है।

गौरतलब है कि यह प्रदर्शनी पहली बार आयोजित हो रहे बहुपक्षीय संयुक्त सैन्य अभ्यास 'प्रगति' के साथ समानांतर रूप से आयोजित की जा रही है, जो हिंद महासागर क्षेत्र के देशों के बीच सहयोग, विकास और सुरक्षा संबंधों को मजबूत करने पर केंद्रित है।

भाग लेने वाले देश और प्रतिनिधिमंडल

प्रदर्शनी में भूटान, कंबोडिया, इंडोनेशिया, लाओस, मलेशिया, मालदीव, म्यांमार, नेपाल, फिलीपींस, सेशेल्स, श्रीलंका और वियतनाम — कुल 12 मित्र देशों के रक्षा अधिकारी, खरीद विशेषज्ञ और रणनीतिक प्रतिनिधि शामिल हैं। ये प्रतिनिधि भारतीय रक्षा उद्योग से सीधे संवाद कर उत्पादों और तकनीकों का मूल्यांकन कर रहे हैं।

यह ऐसे समय में आया है जब भारत हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अपनी रणनीतिक साझेदारियाँ गहरी करने पर विशेष ज़ोर दे रहा है और रक्षा निर्यात को कूटनीतिक संबंधों का एक नया आयाम बना रहा है।

प्रदर्शित तकनीकें और उत्पाद

प्रदर्शनी में ड्रोन और ड्रोन-रोधी प्रणालियाँ, निगरानी उपकरण, सुरक्षित संचार प्रणालियाँ, हथियार और गोला-बारूद, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित रक्षा समाधान, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणालियाँ, साइबर सुरक्षा तकनीक और मानवरहित वाहन प्रमुख आकर्षण हैं। इसके साथ ही रात्रि दृष्टि उपकरण, सटीक हथियार, रक्षा सिम्युलेटर और स्वायत्त सैन्य प्रणालियाँ भी प्रदर्शित की जा रही हैं।

निजी क्षेत्र और स्टार्टअप की भूमिका

प्रदर्शनी में भाग ले रहे 52 संगठनों में से 47 निजी क्षेत्र की कंपनियाँ हैं, जिनमें सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) तथा नवाचार-आधारित स्टार्टअप भी शामिल हैं। शेष 5 रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम (DPSUs) हैं। यह संरचना भारत के रक्षा विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र में निजी क्षेत्र की बढ़ती भागीदारी को रेखांकित करती है।

रणनीतिक महत्व और आगे की राह

भारतीय सेना के अनुसार, यह प्रदर्शनी रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। साथ ही यह मित्र देशों के साथ रणनीतिक साझेदारी को सुदृढ़ करने, संयुक्त विकास को प्रोत्साहित करने और भारत को एक विश्वसनीय वैश्विक रक्षा निर्यातक के रूप में स्थापित करने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है। आने वाले वर्षों में इस तरह के आयोजन भारत-हिंद महासागर क्षेत्र रक्षा सहयोग की रीढ़ बन सकते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि भारत की उस रणनीतिक सोच का प्रतिबिंब है जो हिंद महासागर क्षेत्र में रक्षा कूटनीति को व्यापार और तकनीकी साझेदारी से जोड़ना चाहती है। पूर्वोत्तर भारत में ऐसे आयोजन का चुनाव भी संकेतात्मक है — यह क्षेत्र म्यांमार, बांग्लादेश और दक्षिण-पूर्व एशिया की सीमाओं से लगा है। असली कसौटी यह होगी कि प्रदर्शनी में हुई बातचीत वास्तविक रक्षा खरीद अनुबंधों में तब्दील होती है या नहीं — क्योंकि भारत का रक्षा निर्यात लक्ष्य ₹50,000 करोड़ का है, जबकि वर्तमान निर्यात अभी उससे काफी पीछे है। निजी क्षेत्र और स्टार्टअप की 47 कंपनियों की उपस्थिति उत्साहजनक है, पर इन्हें वैश्विक खरीदारों की कठोर गुणवत्ता और आपूर्ति श्रृंखला अपेक्षाओं पर खरा उतरना होगा।
RashtraPress
14 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'प्रगति 2026' रक्षा प्रदर्शनी क्या है?
यह मेघालय के उमरोई में 30-31 मई 2026 को आयोजित एक बहुपक्षीय रक्षा उद्योग प्रदर्शनी है, जिसमें 52 भारतीय रक्षा कंपनियाँ अपनी स्वदेशी तकनीकें और उत्पाद 12 मित्र देशों के सामने प्रस्तुत कर रही हैं। इसका उद्देश्य रक्षा निर्यात के नए अवसर तलाशना और हिंद महासागर क्षेत्र में सुरक्षा सहयोग मजबूत करना है।
इस प्रदर्शनी में कौन-से देश भाग ले रहे हैं?
भूटान, कंबोडिया, इंडोनेशिया, लाओस, मलेशिया, मालदीव, म्यांमार, नेपाल, फिलीपींस, सेशेल्स, श्रीलंका और वियतनाम — कुल 12 मित्र देशों के वरिष्ठ सैन्य प्रतिनिधिमंडल इसमें भाग ले रहे हैं। इन देशों के रक्षा अधिकारी और खरीद विशेषज्ञ भारतीय उत्पादों का सीधे मूल्यांकन कर रहे हैं।
प्रदर्शनी में किस तरह की तकनीकें प्रदर्शित की जा रही हैं?
ड्रोन और ड्रोन-रोधी प्रणालियाँ, AI-आधारित रक्षा समाधान, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणालियाँ, साइबर सुरक्षा तकनीक, मानवरहित वाहन, रात्रि दृष्टि उपकरण और स्वायत्त सैन्य प्रणालियाँ इस प्रदर्शनी के प्रमुख आकर्षण हैं। सुरक्षित संचार प्रणालियाँ और सटीक हथियार भी प्रदर्शित किए जा रहे हैं।
इस प्रदर्शनी का आयोजन किसने किया और इसका महत्व क्या है?
इसका आयोजन भारतीय उद्योग एवं वाणिज्य महासंघ (FICCI), भारतीय सेना की पूर्वी कमान और सेना के डिजाइन ब्यूरो ने संयुक्त रूप से किया है। यह पहली बार आयोजित बहुपक्षीय सैन्य अभ्यास 'प्रगति' के साथ-साथ हो रही है, जो इसे रणनीतिक और व्यावसायिक दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण बनाता है।
इस प्रदर्शनी में निजी क्षेत्र की क्या भूमिका है?
52 भाग लेने वाले संगठनों में से 47 निजी क्षेत्र की कंपनियाँ हैं, जिनमें MSME और नवाचार-आधारित स्टार्टअप भी शामिल हैं। शेष 5 रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम हैं, जो भारत के रक्षा विनिर्माण में निजी क्षेत्र की बढ़ती भागीदारी को दर्शाता है।
राष्ट्र प्रेस
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