'प्रगति 2026' रक्षा प्रदर्शनी: मेघालय में 52 भारतीय कंपनियों ने 12 मित्र देशों को दिखाई स्वदेशी सैन्य ताकत
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय सेना की पूर्वी कमान और भारतीय उद्योग एवं वाणिज्य महासंघ (FICCI) के संयुक्त तत्वावधान में मेघालय के उमरोई स्थित विदेशी प्रशिक्षण केंद्र में 30 मई 2026 को बहुपक्षीय रक्षा उद्योग प्रदर्शनी 'प्रगति 2026' का शुभारंभ हुआ। 52 भारतीय रक्षा कंपनियों की भागीदारी और 12 मित्र देशों के वरिष्ठ सैन्य प्रतिनिधिमंडलों की उपस्थिति के साथ यह प्रदर्शनी आत्मनिर्भर भारत के रक्षा निर्यात महत्वाकांक्षाओं की दिशा में एक उल्लेखनीय कदम मानी जा रही है।
प्रदर्शनी का उद्घाटन और आयोजन
प्रदर्शनी का उद्घाटन सेना के उप प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ ने वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों और विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों की उपस्थिति में किया। यह दो दिवसीय आयोजन 30 और 31 मई 2026 तक चलेगा। इसे भारतीय सेना के डिजाइन ब्यूरो के सहयोग से भी आयोजित किया गया है।
गौरतलब है कि यह प्रदर्शनी पहली बार आयोजित हो रहे बहुपक्षीय संयुक्त सैन्य अभ्यास 'प्रगति' के साथ समानांतर रूप से आयोजित की जा रही है, जो हिंद महासागर क्षेत्र के देशों के बीच सहयोग, विकास और सुरक्षा संबंधों को मजबूत करने पर केंद्रित है।
भाग लेने वाले देश और प्रतिनिधिमंडल
प्रदर्शनी में भूटान, कंबोडिया, इंडोनेशिया, लाओस, मलेशिया, मालदीव, म्यांमार, नेपाल, फिलीपींस, सेशेल्स, श्रीलंका और वियतनाम — कुल 12 मित्र देशों के रक्षा अधिकारी, खरीद विशेषज्ञ और रणनीतिक प्रतिनिधि शामिल हैं। ये प्रतिनिधि भारतीय रक्षा उद्योग से सीधे संवाद कर उत्पादों और तकनीकों का मूल्यांकन कर रहे हैं।
यह ऐसे समय में आया है जब भारत हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अपनी रणनीतिक साझेदारियाँ गहरी करने पर विशेष ज़ोर दे रहा है और रक्षा निर्यात को कूटनीतिक संबंधों का एक नया आयाम बना रहा है।
प्रदर्शित तकनीकें और उत्पाद
प्रदर्शनी में ड्रोन और ड्रोन-रोधी प्रणालियाँ, निगरानी उपकरण, सुरक्षित संचार प्रणालियाँ, हथियार और गोला-बारूद, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित रक्षा समाधान, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणालियाँ, साइबर सुरक्षा तकनीक और मानवरहित वाहन प्रमुख आकर्षण हैं। इसके साथ ही रात्रि दृष्टि उपकरण, सटीक हथियार, रक्षा सिम्युलेटर और स्वायत्त सैन्य प्रणालियाँ भी प्रदर्शित की जा रही हैं।
निजी क्षेत्र और स्टार्टअप की भूमिका
प्रदर्शनी में भाग ले रहे 52 संगठनों में से 47 निजी क्षेत्र की कंपनियाँ हैं, जिनमें सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) तथा नवाचार-आधारित स्टार्टअप भी शामिल हैं। शेष 5 रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम (DPSUs) हैं। यह संरचना भारत के रक्षा विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र में निजी क्षेत्र की बढ़ती भागीदारी को रेखांकित करती है।
रणनीतिक महत्व और आगे की राह
भारतीय सेना के अनुसार, यह प्रदर्शनी रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। साथ ही यह मित्र देशों के साथ रणनीतिक साझेदारी को सुदृढ़ करने, संयुक्त विकास को प्रोत्साहित करने और भारत को एक विश्वसनीय वैश्विक रक्षा निर्यातक के रूप में स्थापित करने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है। आने वाले वर्षों में इस तरह के आयोजन भारत-हिंद महासागर क्षेत्र रक्षा सहयोग की रीढ़ बन सकते हैं।