13 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

'प्रगति 2026': मेघालय के उमरोई में 12 देशों की सेनाओं का आतंकवादरोधी संयुक्त अभ्यास जारी

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
'प्रगति 2026': मेघालय के उमरोई में 12 देशों की सेनाओं का आतंकवादरोधी संयुक्त अभ्यास जारी

सारांश

'प्रगति 2026' सिर्फ एक सैन्य अभ्यास नहीं — यह भारत की क्षेत्रीय सुरक्षा नेतृत्व की घोषणा है। मेघालय के उमरोई में 12 देशों की सेनाएं जंगल और पहाड़ी इलाकों में एकजुट हैं, जो हिंद महासागर क्षेत्र में सामूहिक सुरक्षा की भारत की बढ़ती भूमिका को रेखांकित करता है।

मुख्य बातें

'प्रगति 2026' बहुराष्ट्रीय सैन्य अभ्यास मेघालय के उमरोई में जारी है।
इसमें भारत सहित 12 देशों — भूटान, कंबोडिया, इंडोनेशिया, लाओस, मलेशिया, मालदीव, म्यांमार, नेपाल, फिलीपींस, सेशेल्स, श्रीलंका और वियतनाम — की सेनाएं भाग ले रही हैं।
अभ्यास का फोकस अर्ध-पहाड़ी और जंगल क्षेत्रों में आतंकवाद-रोधी अभियानों पर है।
संयुक्त ड्रिल, सामरिक अभ्यास और मिशन-उन्मुख प्रशिक्षण के ज़रिए आपसी तालमेल और संचालन क्षमता मज़बूत की जा रही है।
भाग लेने वाले देशों ने हिंद महासागर क्षेत्र में क्षेत्रीय स्थिरता और रक्षा सहयोग के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई।

मेघालय के उमरोई में भारतीय सेना की अगुवाई में 'प्रगति 2026' बहुराष्ट्रीय सैन्य अभ्यास पूरे जोश के साथ जारी है, जिसमें 12 मित्र देशों की सेनाएं अर्ध-पहाड़ी और घने जंगल वाले क्षेत्रों में आतंकवाद-रोधी अभियानों का संयुक्त प्रशिक्षण ले रही हैं। 28 मई 2026 को भारतीय सेना ने इस अभ्यास की प्रगति की जानकारी देते हुए बताया कि यह अभ्यास रणनीतिक समन्वय और साझा सुरक्षा उद्देश्यों की भावना के साथ संचालित हो रहा है।

भाग लेने वाले देश और अभ्यास का स्वरूप

इस महत्वपूर्ण बहुराष्ट्रीय अभ्यास में भारत के अलावा भूटान, कंबोडिया, इंडोनेशिया, लाओस, मलेशिया, मालदीव, म्यांमार, नेपाल, फिलीपींस, सेशेल्स, श्रीलंका और वियतनाम की सैन्य टुकड़ियां सक्रिय रूप से भाग ले रही हैं। यह अभ्यास मुख्य रूप से अर्ध-पहाड़ी और जंगल क्षेत्रों में आतंकवाद-रोधी अभियानों पर केंद्रित है, जो वास्तविक परिचालन परिस्थितियों के अत्यंत निकट है।

मुख्य प्रशिक्षण गतिविधियाँ

अभ्यास के दौरान विभिन्न देशों के सैनिक संयुक्त ड्रिल, सामरिक अभ्यास और मिशन-उन्मुख प्रशिक्षण गतिविधियों में हिस्सा ले रहे हैं। इन गतिविधियों का प्रमुख उद्देश्य भाग लेने वाली सेनाओं के बीच आपसी तालमेल, संचालन क्षमता और संयुक्त अभियानों में सहयोग को सुदृढ़ करना है। सेना के अनुसार, कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में किया जा रहा यह प्रशिक्षण सैनिकों को वास्तविक परिस्थितियों के अनुरूप तैयार करता है।

सामरिक और कूटनीतिक महत्व

रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, तेज़ी से बदलते वैश्विक और क्षेत्रीय सुरक्षा परिदृश्य में यह अभ्यास सामूहिक सुरक्षा और रक्षा सहयोग की दिशा में अत्यंत महत्वपूर्ण है। गौरतलब है कि 'प्रगति 2026' न केवल सामरिक समन्वय को मज़बूत करता है, बल्कि आपदा प्रबंधन, आतंकवाद-रोधी अभियानों और मानवीय सहायता कार्यों में भी देशों के बीच बेहतर सहयोग सुनिश्चित करता है। यह अभ्यास भारत की 'आर्मी टू आर्मी' संबंधों को प्रगाढ़ करने की नीति का भी हिस्सा है।

क्षेत्रीय स्थिरता के प्रति प्रतिबद्धता

संयुक्त प्रशिक्षण और साझा अनुभवों के माध्यम से भाग लेने वाले देशों ने क्षेत्रीय स्थिरता, रक्षा सहयोग तथा सुरक्षित हिंद महासागर क्षेत्र के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। उमरोई में जारी यह अभ्यास भारत की साझा सुरक्षा और साझा समृद्धि की नीति को भी सशक्त संदेश दे रहा है। एक्सरसाइज 'प्रगति' सेनाओं के बीच शांति, स्थिरता, सुरक्षा और सहयोगात्मक विकास के प्रति साझा संकल्प का प्रतीक बनकर उभरी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि भारत की 'नेबरहुड फर्स्ट' और 'एक्ट ईस्ट' नीतियों का सामरिक प्रदर्शन है। यह ऐसे समय में आया है जब हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शक्ति-संतुलन को लेकर प्रतिस्पर्धा तेज़ हो रही है और भारत अपने पड़ोस में सुरक्षा नेतृत्व की भूमिका को संस्थागत रूप देने की कोशिश कर रहा है। हालांकि, आलोचकों का कहना है कि इस तरह के अभ्यासों की वास्तविक परिचालन उपयोगिता तभी सिद्ध होती है जब इनमें स्थापित संयुक्त कमान संरचनाएं और सूचना-साझाकरण प्रोटोकॉल भी शामिल हों। म्यांमार जैसे देशों की भागीदारी — जहाँ आंतरिक सुरक्षा परिदृश्य जटिल है — यह सवाल भी उठाती है कि 'साझा सुरक्षा' की परिभाषा इन सभी भागीदारों के लिए एक समान है या नहीं।
RashtraPress
13 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'प्रगति 2026' सैन्य अभ्यास क्या है?
'प्रगति 2026' एक बहुराष्ट्रीय आतंकवाद-रोधी सैन्य अभ्यास है जो मेघालय के उमरोई में आयोजित किया जा रहा है। इसमें भारत सहित 12 मित्र देशों की सेनाएं अर्ध-पहाड़ी और जंगल क्षेत्रों में संयुक्त प्रशिक्षण ले रही हैं।
'प्रगति 2026' में कौन-कौन से देश भाग ले रहे हैं?
इस अभ्यास में भारत के अलावा भूटान, कंबोडिया, इंडोनेशिया, लाओस, मलेशिया, मालदीव, म्यांमार, नेपाल, फिलीपींस, सेशेल्स, श्रीलंका और वियतनाम — कुल 12 मित्र देश — भाग ले रहे हैं।
यह अभ्यास किस चीज़ पर केंद्रित है?
अभ्यास मुख्य रूप से अर्ध-पहाड़ी और घने जंगल वाले क्षेत्रों में आतंकवाद-रोधी अभियानों पर केंद्रित है। इसमें संयुक्त ड्रिल, सामरिक अभ्यास और मिशन-उन्मुख प्रशिक्षण के ज़रिए सेनाओं के बीच तालमेल और संचालन क्षमता बढ़ाई जा रही है।
'प्रगति 2026' का सामरिक महत्व क्या है?
रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार यह अभ्यास बदलते वैश्विक और क्षेत्रीय सुरक्षा परिदृश्य में सामूहिक सुरक्षा और रक्षा सहयोग को मज़बूत करता है। यह हिंद महासागर क्षेत्र में स्थिरता के प्रति भाग लेने वाले देशों की साझा प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है।
यह अभ्यास भारत की विदेश नीति से कैसे जुड़ा है?
यह अभ्यास भारत की 'साझा सुरक्षा और साझा समृद्धि' की नीति का हिस्सा है और देशों के बीच 'आर्मी टू आर्मी' संबंधों को प्रगाढ़ करने का माध्यम है। यह भारत की 'एक्ट ईस्ट' नीति और पड़ोसी देशों के साथ रक्षा साझेदारी को संस्थागत रूप देने की दिशा में एक ठोस कदम माना जा रहा है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 1 महीना पहले
  6. 7 महीने पहले
  7. 7 महीने पहले
  8. 10 महीने पहले