प्रगति 2026 सैन्य अभ्यास संपन्न: 12 देशों के 400 से अधिक सैनिकों ने उमरोई में दिखाई ताकत
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय सेना का बहुराष्ट्रीय सैन्य अभ्यास प्रगति 2026 — 'हिंद महासागर क्षेत्र में विकास और रूपांतरण हेतु क्षेत्रीय सेनाओं की साझेदारी' — मेघालय के उमरोई में सफलतापूर्वक संपन्न हो गया। 30 मई 2026 को समाप्त हुए इस दो सप्ताह के अभ्यास में 12 मित्र देशों के 400 से अधिक सैनिकों ने भाग लिया और हिंद महासागर क्षेत्र में शांति, स्थिरता तथा सामूहिक सुरक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को और सुदृढ़ किया। यह इस अभ्यास का पहला संस्करण था, जिसे एक ऐतिहासिक बहुराष्ट्रीय सैन्य पहल के रूप में देखा जा रहा है।
समापन समारोह में वरिष्ठ सैन्य नेतृत्व की उपस्थिति
अभ्यास के समापन समारोह और अंतिम वैलिडेशन अभ्यास में भारतीय सेना के उप प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ ने भाग लिया। उनके साथ सहभागी देशों के उप सेना प्रमुख और वरिष्ठ सैन्य अधिकारी भी मौजूद रहे। यह उपस्थिति इस बात का संकेत है कि सहभागी देश इस बहुपक्षीय मंच को रणनीतिक रूप से कितना महत्व देते हैं।
सहभागी देश और अभ्यास का दायरा
इस अभ्यास में भूटान, कंबोडिया, इंडोनेशिया, लाओस, मलेशिया, मालदीव, म्यांमार, नेपाल, फिलीपींस, सेशेल्स, श्रीलंका और वियतनाम के सैनिकों ने हिस्सा लिया। अभ्यास का केंद्रीय उद्देश्य क्षेत्रीय सहयोग, सैन्य समन्वय और विभिन्न देशों की सेनाओं के बीच परस्पर तालमेल को मजबूत करना था। गौरतलब है कि यह देश हिंद महासागर क्षेत्र की भू-रणनीतिक स्थिरता में निर्णायक भूमिका निभाते हैं।
प्रशिक्षण गतिविधियाँ और सैन्य कौशल
अर्ध-पहाड़ी और जंगली भूभाग में सैनिकों ने आतंकवाद विरोधी अभियानों का गहन प्रशिक्षण लिया। भारतीय सेना की इंजीनियर्स कोर की अधिकारी मेजर सुस्मिता एस. वारियर ने बताया कि अभ्यास में काउंटर-आईईडी ऑपरेशन, रूम इंटरवेंशन ड्रिल, एमवीसीपी ड्रिल तथा आतंकवाद और उग्रवाद विरोधी अभियानों से जुड़ी कई महत्वपूर्ण गतिविधियों का अभ्यास किया गया। विभिन्न देशों की सैन्य टुकड़ियों ने अपने अनुभव साझा किए और आधुनिक रणनीतियों पर मिलकर काम किया।
आत्मनिर्भर भारत और स्वदेशी रक्षा तकनीक का प्रदर्शन
अभ्यास के दौरान सहभागी देशों को भारत की स्वदेशी रक्षा तकनीक और रक्षा निर्माण क्षमताओं का प्रदर्शन भी दिखाया गया। यह 'आत्मनिर्भर भारत' अभियान के अंतर्गत भविष्य की सैन्य जरूरतों के लिए घरेलू समाधान विकसित करने की भारत की प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है। इस प्रदर्शन ने भारत को एक विश्वसनीय रक्षा भागीदार के रूप में स्थापित करने में भी योगदान दिया।
क्षेत्रीय सुरक्षा पर दीर्घकालिक प्रभाव
यह ऐसे समय में आया है जब हिंद महासागर क्षेत्र में रणनीतिक प्रतिस्पर्धा तेज हो रही है और भारत अपनी 'नेबरहुड फर्स्ट' तथा 'सागर' (क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा और विकास) नीतियों के तहत बहुपक्षीय सहयोग को प्राथमिकता दे रहा है। 'प्रगति 2026' ने न केवल सैन्य सहयोग को नई दिशा दी, बल्कि साझा जिम्मेदारी और क्षेत्रीय स्थिरता की भावना को भी नई ऊर्जा प्रदान की। अगले संस्करण की तैयारियों पर सहभागी देशों की नजरें टिकी रहेंगी।