भारत और सेशेल्स के बीच ‘लामितिये–2026’ सैन्य अभ्यास की शुरुआत

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भारत और सेशेल्स के बीच ‘लामितिये–2026’ सैन्य अभ्यास की शुरुआत

सारांश

भारत की सशस्त्र सेनाओं का एक संयुक्त दल सेशेल्स में ‘लामितिये–2026’ सैन्य अभ्यास में भाग ले रहा है। इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग को मजबूत करना है।

मुख्य बातें

भारत और सेशेल्स के बीच सैन्य सहयोग को मजबूत करना।
अभ्यास में भारत की तीनों सेनाओं का शामिल होना।
अर्ध-शहरी सुरक्षा अभियानों पर ध्यान केंद्रित करना।
नई तकनीकों और उपकरणों का उपयोग करना।
द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करना।

नई दिल्ली, 9 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। भारत की सशस्त्र सेनाओं का एक संयुक्त दल हिंद महासागर के द्वीपीय राष्ट्र सेशेल्स में पहुँच चुका है। यहाँ यह भारतीय सैन्य दल सेशेल्स के रक्षा बलों के साथ एक संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘लामितिये–2026’ में सम्मिलित हो रहा है।

यह अभ्यास 9 मार्च से 20 मार्च तक सेशेल्स की रक्षा अकादमी में आयोजित किया जा रहा है। इस दौरान, भारत और सेशेल्स के सैनिक संयुक्त रूप से प्रशिक्षण लेंगे, विभिन्न सैन्य मिशनों की योजना बनाएंगे और विभिन्न सामरिक गतिविधियों का संचालन करेंगे। इसमें अर्ध-शहरी वातावरण में संभावित खतरों का सामना करने के लिए कई प्रकार की युद्धक कार्रवाई शामिल होगी।

इसके साथ ही, नई पीढ़ी के सैन्य उपकरणों और आधुनिक तकनीक के उपयोग का अभ्यास भी किया जाएगा। ‘लामितिये’ का अर्थ क्रियोल भाषा में मित्रता है। यह अभ्यास हर दो वर्ष में आयोजित होता है और 2001 से नियमित रूप से सेशेल्स में हो रहा है। इस वर्ष इसका ग्यारहवाँ संस्करण है।

भारत और सेशेल्स के बीच रक्षा सहयोग को मजबूती देने पर दोनों पक्षों का फोकस है। साथ ही, इस अभ्यास का उद्देश्य दोनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करना है। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, इस बार का अभ्यास विशेष महत्व रखता है, क्योंकि इसमें भारत की तीनों सेनाएं शामिल हैं। यहाँ उपस्थित भारतीय सैन्य दल में थल सेना, नौसेना और वायु सेना के जवान शामिल हैं।

रक्षा मंत्रालय के अनुसार, भारतीय सैन्य दल में मुख्य रूप से असम रेजिमेंट के सैनिक शामिल हैं। इसके अलावा, भारतीय नौसेना का युद्धपोत ‘आईएनएस त्रिकंड’ और भारतीय वायु सेना का भारी परिवहन विमान ‘सी–130’ भी इस अभ्यास में सम्मिलित हो रहा है। इस संयुक्त सैन्य अभ्यास का मुख्य लक्ष्य दोनों देशों की सेनाओं के बीच समन्वय, सहयोग और संयुक्त कार्य क्षमता को मजबूत करना है।

अभ्यास के दौरान विशेष रूप से अर्ध-शहरी क्षेत्रों में अभियानों से जुड़े प्रशिक्षण पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, शांति स्थापना से जुड़े अभियानों के दौरान दोनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल बनाने का प्रयास किया जाएगा। लगभग बारह दिनों तक चलने वाले इस अभ्यास में मैदान पर प्रशिक्षण, सामरिक चर्चाएँ, अध्ययन उदाहरण, व्याख्यान और प्रदर्शन जैसी गतिविधियाँ आयोजित की जाएंगी। अभ्यास के अंतिम चरण में दो दिन का अंतिम संयुक्त अभ्यास होगा, जिसमें अब तक सीखे गए सभी कौशलों और रणनीतियों का परीक्षण किया जाएगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के संयुक्त सैन्य अभ्यास दोनों देशों की सेनाओं के बीच आपसी विश्वास, समझ और सहयोग को और मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इससे सैनिकों को एक-दूसरे के अनुभव, कौशल और श्रेष्ठ सैन्य तरीकों को साझा करने का अवसर मिलता है। भारत और सेशेल्स के बीच लंबे समय से घनिष्ठ रक्षा संबंध रहे हैं।

हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता को बढ़ाने के लिए दोनों देश समय-समय पर इस प्रकार के संयुक्त सैन्य अभ्यास करते रहते हैं। ‘लामितिये–2026’ अभ्यास भी दोनों देशों के सैन्य संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

लामितिये–2026 सैन्य अभ्यास कब और कहाँ हो रहा है?
यह अभ्यास 9 मार्च से 20 मार्च तक सेशेल्स की रक्षा अकादमी में हो रहा है।
इस अभ्यास में कौन-कौन सी सेनाएँ शामिल हैं?
इस अभ्यास में भारत की थल सेना, नौसेना और वायु सेना तीनों शामिल हैं।
इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इसका मुख्य उद्देश्य दोनों देशों की सेनाओं के बीच समन्वय और सहयोग को बढ़ाना है।
लामितिये का अर्थ क्या है?
लामितिये का अर्थ क्रियोल भाषा में 'मित्रता' होता है।
यह अभ्यास कब से आयोजित किया जा रहा है?
यह अभ्यास 2001 से हर दो वर्ष में आयोजित किया जा रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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