भारत और सेशेल्स का संयुक्त सैन्य अभ्यास: हाईजैक बस के ऑपरेशन पर फोकस
सारांश
Key Takeaways
- हाईजैक बस की स्थिति से निपटने का अभ्यास
- सैन्य टुकड़ियों के बीच सहयोग और समन्वय
- आतंकवाद-रोधी रणनीतियों पर चर्चा
- आधुनिक तकनीकों का उपयोग और प्रशिक्षण
- हिंद महासागर क्षेत्र में शांति और सुरक्षा को बढ़ावा
नई दिल्ली, 13 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। भारत और सेशेल्स की सैन्य टुकड़ियों ने एक हाईजैक बस की स्थिति का सामना करने के लिए एक सैन्य अभ्यास किया। इस अभ्यास में सैनिकों ने बंधक बनाए गए व्यक्तियों को सुरक्षित निकालने के लिए त्वरित कार्रवाई की। आतंकवादियों के खिलाफ समन्वित प्रयास और तात्कालिक निर्णय लेने की प्रक्रिया का प्रदर्शन भी किया गया।
भारत और सेशेल्स के बीच चल रहा एक महत्वपूर्ण संयुक्त सैन्य अभ्यास, ‘लामितियेल 2026’, इस समय सेशेल्स रक्षा अकादमी में हो रहा है। यह अभ्यास 10 मार्च को आरंभ हुआ और 22 मार्च तक चलेगा। इस वर्ष इसका 11वां संस्करण आयोजित किया जा रहा है, जिसमें पहली बार भारत की थल सेना, नौसेना और वायु सेना के जवान एक साथ भाग ले रहे हैं। अभ्यास के तहत संचालनात्मक प्रदर्शन और व्यावहारिक अभ्यास का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रहा। इसमें सैनिकों ने निकटतम युद्ध और शत्रु ठिकानों पर कार्रवाई करने के लिए प्रशिक्षण प्राप्त किया।
सैनिकों ने इस दौरान रणनीतिक प्रवेश तकनीक, कमरे पर नियंत्रण स्थापित करने की प्रक्रिया और समन्वित हमलों की रणनीतियों का अभ्यास किया। भारत और सेशेल्स की संयुक्त टीमों के बीच अत्यधिक समन्वय और पेशेवर दक्षता देखने को मिली। अभ्यास में आतंकवाद-रोधी अभियानों पर विस्तृत चर्चा की गई, जिसमें भारतीय सेना के एक महत्वपूर्ण अभियान की केस स्टडी भी प्रस्तुत की गई। इस अध्ययन में योजना, खुफिया जानकारी के आधार पर लक्ष्य निर्धारण, विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय और कठिन भूभाग में आने वाली चुनौतियों पर चर्चा की गई।
अभ्यास के दौरान शहरी और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में घेराबंदी और तलाशी अभियान से संबंधित प्रशिक्षण भी दिया गया। इसमें संदिग्ध क्षेत्रों की घेराबंदी, क्षेत्र पर नियंत्रण बनाए रखना और भीड़ प्रबंधन की तकनीकें शामिल थीं। विभिन्न सुरक्षा इकाइयों के बीच तालमेल जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं पर भी अभ्यास किया गया, ताकि अभियान के दौरान नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए मिशन को सफल बनाया जा सके। इस दौरान दोनों देशों के सैनिकों के बीच कई पेशेवर चर्चाएँ, व्याख्यान और व्यावहारिक प्रशिक्षण आयोजित किए गए।
भारतीय सेना का कहना है कि इस ट्रेनिंग का उद्देश्य संयुक्त अभियानों की प्रक्रियाओं को बेहतर बनाना, अनुभवों का आदान-प्रदान करना और आपसी समन्वय को मजबूत करना है। अभ्यास के दौरान आधुनिक और उभरते क्षेत्रों से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई। इसमें मानवीय सहायता और आपदा राहत कार्यों में हेलीकॉप्टरों की भूमिका पर प्रस्तुति दी गई। उदाहरण के लिए, आपदा की स्थिति में हेलीकॉप्टरों का उपयोग घायल व्यक्तियों को निकालने और राहत सामग्री पहुँचाने में किस प्रकार किया जाता है, इस पर चर्चा हुई। इसके अलावा, आपदा प्रबंधन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग पर भी विचार किया गया।
इसमें आंकड़ों का विश्लेषण, भविष्यवाणी आधारित मॉडल और तकनीक पर आधारित आपूर्ति व्यवस्थाएँ शामिल थीं, ताकि राहत कार्यों को अधिक तेज और प्रभावी बनाया जा सके। युद्ध क्षेत्र में चिकित्सा सहायता के विषय पर भी चर्चा की गई, जिसमें घायल सैनिकों को प्राथमिक उपचार, सुरक्षित स्थान पर पहुँचाने और चिकित्सा संसाधनों का समन्वय शामिल है। समुद्री सुरक्षा से संबंधित प्रशिक्षण भी अभ्यास का हिस्सा रहा, जिसमें सेशेल्स तटरक्षक बल ने संदिग्ध जहाजों की जांच और नियंत्रण की प्रक्रिया का प्रदर्शन किया।
जहाज पर चढ़ने, तलाशी लेने और समुद्री कानून के तहत कार्रवाई करने की तकनीकों को प्रदर्शित किया गया, जिससे हिंद महासागर क्षेत्र में तटीय और समुद्री सुरक्षा संबंधी अभियानों की समझ और बेहतर हुई। इस अभ्यास में सांस्कृतिक और खेल गतिविधियाँ भी शामिल थीं। दोनों देशों के सैनिकों ने योग सत्र और सेना की मार्शल आर्ट में भाग लिया, जिससे शारीरिक क्षमता और मानसिक दृढ़ता को बढ़ावा मिला।
इसके अलावा, दोनों दलों के बीच मैत्रीपूर्ण फुटबॉल मैच और अन्य अनौपचारिक कार्यक्रम भी आयोजित किए गए, जिनसे सैनिकों के बीच आपसी मित्रता और विश्वास को और मजबूत किया गया। अब तक हुए विभिन्न अभ्यासों ने भारत और सेशेल्स की सेनाओं के बीच पेशेवर सहयोग और आपसी समन्वय को बढ़ाया है। यह संयुक्त अभ्यास दोनों देशों के रक्षा संबंधों को मजबूती प्रदान करने के साथ ही हिंद महासागर क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और सहयोग को बढ़ावा देने में मदद कर रहा है।