भारतीय नौसेना और सेशेल्स रक्षा बलों की समुद्री सुरक्षा में मित्रता का उज्ज्वल उदाहरण
सारांश
Key Takeaways
- संयुक्त सैन्य अभ्यास ने दोनों देशों के बीच रक्षा संबंधों को मजबूत किया।
- 72 घंटे का फाइनल टेस्ट प्रासलिन द्वीप पर आयोजित किया गया।
- अभ्यास में अंतर-संचालन क्षमता बढ़ाई गई।
- सभी अभियानों में उच्च स्तर का तालमेल देखा गया।
- यह अभ्यास क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता को बढ़ावा देता है।
नई दिल्ली, 19 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। भारतीय नौसेना के मरीन कमांडो (मार्कोस) और सेशेल्स रक्षा बल के जवानों ने मिलकर समुद्री जहाज पर चढ़ाई, तलाशी और नियंत्रण जैसे महत्वपूर्ण अभियानों को सफलतापूर्वक संचालित किया है। यह सभी ऑपरेशन संयुक्त सैन्य अभ्यास 'लामितिये 2026' का हिस्सा हैं।
यह अभ्यास यह दर्शाता है कि दोनों सेनाएं कठिन परिस्थितियों में एक साथ काम कर सकती हैं। भारतीय सशस्त्र बलों और सेशेल्स रक्षा बल का यह 11वां संस्करण है, जो सेशेल्स में 9 मार्च से शुरू हुआ है और 20 मार्च तक जारी रहेगा। इस अभ्यास का सबसे रोमांचक चरण 72 घंटे का फाइनल टेस्ट रहा, जो प्रासलिन द्वीप पर आयोजित किया गया। इसमें समुद्र के माध्यम से घुसपैठ, ड्रोन से निगरानी, छापेमारी और घायल सैनिकों को निकालने जैसे ऑपरेशन शामिल थे।
इस अभ्यास से भारतीय सशस्त्र बल और सेशेल्स रक्षा बल ने अंतर-संचालन क्षमता, परिचालन समन्वय और आपसी समझ को और मजबूत किया। यह अभ्यास विशेष रूप से अर्ध-शहरी और समुद्री सुरक्षा परिदृश्यों पर केंद्रित रहा।
गौरतलब है कि क्रियोल भाषा में 'लामितिये' का अर्थ है मित्रता। यह अभ्यास भारत और सेशेल्स के बीच गहरे रक्षा संबंधों को दिखाता है। इसमें सेशेल्स रक्षा बल के तटरक्षक, वायुसेना और विशेष अभियान इकाई ने समन्वित रूप से भाग लिया। भारतीय पक्ष से नौसेना का युद्धपोत आईएनएस त्रिकंड समुद्री अभियानों के लिए तैनात किया गया। अभ्यास के दौरान दोनों देशों की सेनाओं ने भूमि और समुद्र दोनों क्षेत्रों में संयुक्त योजना और अभियानों का अभ्यास किया।
मुख्य गतिविधियों में संयुक्त ऑपरेशंस केंद्र की स्थापना, अर्ध-शहरी क्षेत्रों में घेराबंदी और तलाशी अभियान, और सटीक हमले शामिल थे, जिन्होंने उच्च स्तर के तालमेल और आपसी विश्वास को प्रदर्शित किया। अभ्यास के दौरान दोनों देशों ने कई प्रकार के ऑपरेशन किए, जिससे आपसी तालमेल और भरोसा और मजबूत हुआ।
अभ्यास का समापन प्रासलिन द्वीप पर आयोजित 72 घंटे के उच्च-तीव्रता वाले सत्यापन चरण के साथ किया जा रहा है, जिसमें संयुक्त उभयचर अभियान, मानव रहित हवाई वाहन आधारित निगरानी, समन्वित छापेमारी और एकीकृत घायल निकासी अभ्यास सफलतापूर्वक किए गए। इस अभियान ने रणनीतियों, तकनीकों और प्रक्रियाओं को प्रमाणित किया, और संयुक्तता तथा अंतर-संचालन क्षमता को मजबूत किया।
वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, 'लामितिये 2026' भारत और सेशेल्स के बीच बढ़ते रक्षा सहयोग और हिंद महासागर क्षेत्र में क्षेत्रीय सुरक्षा, स्थिरता और परिचालन उत्कृष्टता के लिए साझा प्रतिबद्धता का एक ठोस प्रमाण है।