उज्बेकिस्तान में भारतीय सेना का युद्धाभ्यास: रॉकेट, ड्रोन और आतंकवाद पर कार्रवाई
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली, 20 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। भारतीय सेना के सैनिक उज्बेकिस्तान में दोनों हाथों से पिस्तौल चलाने की कला का प्रदर्शन कर रहे हैं। ये जवान तेज गोलीबारी, रॉकेट हमले, बिना हथियार के युद्ध और संगीन से लड़ाई जैसे घातक मिशनों को सफलतापूर्वक अंजाम दे रहे हैं।
यह अभ्यास वास्तव में उज्बेकिस्तान की सेना के साथ एक महत्वपूर्ण युद्धाभ्यास का हिस्सा है। इस दौरान, दोनों देशों की सेनाएं युद्ध क्षेत्र में मानव रहित यंत्रों का उपयोग, शहरी क्षेत्र में 'फायर एंड मूव', और घायल सैनिकों को सुरक्षित निकालने जैसे अभ्यास कर रही हैं। इसके अतिरिक्त, ठिकानों की टोही, आतंकियों के ठिकानों पर छापेमारी, पर्वतारोहण, रस्सी के सहारे उतरना, स्नाइपर प्रशिक्षण और दिशा ज्ञान भी इस अभ्यास का हिस्सा है।
उज्बेकिस्तान में यह संयुक्त युद्धाभ्यास 25 अप्रैल तक जारी रहेगा। भारत और उज्बेकिस्तान के बीच का यह संयुक्त सैन्य अभ्यास “डस्टलिक 2026” का सातवां संस्करण है। इस युद्धाभ्यास का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों की सेनाओं के बीच आपसी तालमेल, सामरिक दक्षता और संयुक्त अभियान क्षमता को बढ़ाना है।
इस अभ्यास के तहत, दोनों देशों की सेनाएं संयुक्त योजना बनाने पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं। सामरिक अभ्यास किए जा रहे हैं, और विशेष सैन्य हथियारों के उपयोग एवं अवैध सशस्त्र समूहों के खिलाफ रणनीतियों पर कार्य किया जा रहा है। अब तक के अभ्यास में सैनिकों ने क्षेत्र की जानकारी एकत्रित करने, एक-दूसरे की कार्यप्रणालियों का आदान-प्रदान करने और विभिन्न प्रकार के युद्ध कौशलों का अभ्यास किया है।
भारत और उज्बेकिस्तान के बीच का यह संयुक्त सैन्य अभ्यास डस्टलिक 2026, दोनों देशों के रक्षा संबंधों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। अभ्यास का मुख्य ध्यान संयुक्त योजना और संचालन क्षमता को विकसित करना है। इसमें सैनिकों को सर्च ऑपरेशन, घेराबंदी, छापेमारी, और बंधकों को सुरक्षित निकालने जैसे जटिल कार्यों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। आधुनिक युद्धक तकनीक जैसे ड्रोन और निगरानी प्रणालियों का उपयोग भी सिखाया जा रहा है।
डस्टलिक 2026 के दौरान, दोनों देशों की सेनाएं अपने अनुभवों और रणनीतियों का आदान-प्रदान कर रही हैं। इससे न केवल उनकी युद्धक दक्षता में सुधार होगा, बल्कि आपसी समझ और समन्वय भी मजबूत होगा। इसके अतिरिक्त, दोनों देशों के जवानों की शारीरिक क्षमता और टीम भावना को बढ़ाने के लिए दौड़, व्यायाम, योग और आत्मविश्वास बढ़ाने वाली गतिविधियाँ भी आयोजित की जा रही हैं। आने वाले दिनों में यह अभ्यास और जटिल चरण में प्रवेश करेगा, जिसमें अर्ध-पहाड़ी क्षेत्रों में संयुक्त मिशनों को अंजाम दिया जाएगा।