असम बाढ़ राहत विवाद: अखिल गोगोई ने बिमल बोराह को शिवसागर के गार्डियन मिनिस्टर पद से हटाने की मांग की
सारांश
मुख्य बातें
रायजोर दल के अध्यक्ष एवं विधायक अखिल गोगोई ने 7 अगस्त 2026 को गुवाहाटी में पत्रकारों से बात करते हुए असम के मंत्री बिमल बोराह को शिवसागर ज़िले के गार्डियन मिनिस्टर पद से तत्काल हटाने की माँग की। उनका आरोप है कि शिवसागर और चराइदेव जिलों में बाढ़ राहत सामग्री वितरण में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी और राजनीतिक पक्षपात बरता गया, जिससे वास्तविक पीड़ित परिवार सरकारी सहायता से वंचित रह गए।
राहत वितरण में कथित गड़बड़ी
गोगोई ने आरोप लगाया कि मंत्री बोराह ने पारदर्शी एवं निष्पक्ष प्रक्रिया अपनाने के बजाय भारतीय जनता पार्टी (BJP) के कार्यकर्ताओं और पार्टी से जुड़े वार्ड सदस्यों के माध्यम से राहत सामग्री बँटवाई। उनके अनुसार, कई ऐसे परिवारों को राहत मिली जो इसके पात्र नहीं थे, जबकि बाढ़ से वास्तविक रूप से प्रभावित अनेक परिवार ₹15,000 की घोषित आर्थिक सहायता से महरूम रहे।
गोगोई ने यह भी दावा किया कि BJP के एक वार्ड सदस्य ने बाढ़ पीड़ितों के लिए भेजी गई राहत सामग्री का दुरुपयोग किया। कथित तौर पर जब स्थानीय लोगों ने यह मामला उठाया, तो आरोपी के विरुद्ध कार्रवाई करने के बजाय शिकायत करने वाले व्यक्ति को ही गिरफ्तार कर लिया गया।
BJP पर देरी से सक्रिय होने का आरोप
रायजोर दल के नेता ने दावा किया कि बाढ़ के शुरुआती और सबसे संकटपूर्ण दिनों में BJP नेता प्रभावित क्षेत्रों में अनुपस्थित रहे। उनके अनुसार, उस दौरान रायजोर दल के कार्यकर्ता बचाव एवं राहत कार्यों में सक्रिय रूप से जुटे हुए थे। BJP के पदाधिकारी कथित तौर पर तभी सामने आए जब इन गतिविधियों पर जनता और मीडिया का ध्यान जाने लगा।
लाभार्थी चयन पर सवाल
गोगोई ने शिवसागर और चराइदेव में लाभार्थियों के चयन की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए। उनका कहना है कि इस चयन में राजनीतिक कारणों का असर साफ़ दिखता है, जिससे राज्य सरकार के बाढ़ राहत कार्यक्रम की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लगता है।
मुख्यमंत्री से निष्पक्ष जाँच की माँग
गोगोई ने मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा से आग्रह किया कि लाभार्थियों की सूची राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं के बजाय निष्पक्ष सरकारी अधिकारियों द्वारा तैयार की जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि राहत वितरण में पारदर्शिता नहीं लाई गई, तो यह विवाद और गहरा सकता है। यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब असम के कई ज़िले मानसूनी बाढ़ की मार झेल रहे हैं और राहत तंत्र की कार्यकुशलता पर पूरे राज्य की नज़र है।