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भारत-उज्बेकिस्तान रक्षा सहयोग: ताशकंद में छठी JWG बैठक, आतंकवाद-रोधी अभ्यास और रक्षा उद्योग पर जोर

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भारत-उज्बेकिस्तान रक्षा सहयोग: ताशकंद में छठी JWG बैठक, आतंकवाद-रोधी अभ्यास और रक्षा उद्योग पर जोर

सारांश

भारत और उज्बेकिस्तान ने ताशकंद में छठी JWG रक्षा बैठक में आतंकवाद-रोधी अभ्यास, रक्षा शिक्षा और उद्योग सहयोग को नई दिशा दी। 2019 से चले आ रहे इस ढाँचे के तहत 'डस्टलिक' अभ्यास का सातवाँ संस्करण अप्रैल 2026 में हो चुका है — और अब दोनों देश रक्षा निर्माण साझेदारी को अगले स्तर पर ले जाने की तैयारी में हैं।

मुख्य बातें

भारत-उज्बेकिस्तान छठी जॉइंट वर्किंग ग्रुप (JWG) बैठक 5 अगस्त 2026 को ताशकंद में आयोजित हुई।
सह-अध्यक्षता दिनेश कुमार (संयुक्त सचिव, भारतीय रक्षा मंत्रालय) और लेफ्टिनेंट कर्नल सुखरोबजोन सिरोजोव (उज्बेकिस्तान) ने की।
बैठक में आतंकवाद-रोधी अभियान , संयुक्त प्रशिक्षण, रक्षा शिक्षा और रक्षा उद्योग स्थापना पर चर्चा हुई।
'डस्टलिक' सैन्य अभ्यास का सातवाँ संस्करण 12–25 अप्रैल 2026 को उज्बेकिस्तान के नमनगन में हुआ था।
भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने यूनिवर्सिटी ऑफ मिलिट्री सिक्योरिटी एंड डिफेंस, ताशकंद का दौरा किया।
यह बैठक विदेश मंत्री एस.
जयशंकर और उज्बेकिस्तान के विदेश मंत्री बख्तियार सैदोव की नई दिल्ली वार्ता के बाद हुई।

भारत और उज्बेकिस्तान के बीच रक्षा सहयोग को नई गति देने के लिए छठी जॉइंट वर्किंग ग्रुप (JWG) बैठक बुधवार, 5 अगस्त 2026 को ताशकंद में आयोजित की गई। बैठक की सह-अध्यक्षता भारतीय रक्षा मंत्रालय के संयुक्त सचिव दिनेश कुमार और उज्बेकिस्तान के रक्षा मंत्रालय के अंतरराष्ट्रीय सैन्य सहयोग केंद्रीय विभाग के प्रमुख लेफ्टिनेंट कर्नल सुखरोबजोन सोदिकजोनोविच सिरोजोव ने की। यह बैठक दोनों देशों के विदेश मंत्रियों के बीच हाल ही में नई दिल्ली में हुई उच्चस्तरीय वार्ता की अगली कड़ी है।

बैठक में क्या हुई चर्चा

रक्षा मंत्रालय के अनुसार, बैठक में संयुक्त प्रशिक्षण और सैन्य अभ्यास, क्षमता निर्माण, रक्षा शिक्षा और रक्षा उद्योगों की स्थापना जैसे अहम विषयों पर विस्तृत विचार-विमर्श हुआ। संयुक्त सैन्य अभ्यासों में विशेष प्रशिक्षण मॉड्यूल शामिल किए जाने का निर्णय लिया गया, जिनका केंद्रबिंदु आतंकवाद-रोधी अभियान और दोनों देशों की सेनाओं के बीच परिचालन समन्वय होगा। ये अभ्यास भारत और उज्बेकिस्तान — दोनों देशों की धरती पर आयोजित किए जाएंगे।

क्षमता निर्माण और शैक्षणिक सहयोग

क्षमता निर्माण के अंतर्गत चल रहे शैक्षणिक कार्यक्रमों और तकनीकी सहायता की समीक्षा की जाएगी तथा आवश्यकतानुसार उन्हें और सुदृढ़ किया जाएगा। इसी क्रम में भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने ताशकंद स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ मिलिट्री सिक्योरिटी एंड डिफेंस का दौरा किया, जो दोनों देशों के बीच सैन्य शिक्षा के क्षेत्र में गहरे जुड़ाव का संकेत है।

रक्षा उद्योग और निर्यात पर फोकस

बैठक में रक्षा निर्माण सहयोग को विशेष महत्व दिया गया। भारत के रक्षा निर्यातक के रूप में उभरने की पृष्ठभूमि में, तकनीक के आदान-प्रदान, रक्षा उपकरणों के रखरखाव और नए रक्षा उद्योगों की स्थापना पर विचार-विमर्श हुआ। गौरतलब है कि नई दिल्ली हाल के वर्षों में रक्षा निर्यात को रणनीतिक प्राथमिकता के रूप में आगे बढ़ा रहा है।

द्विपक्षीय रक्षा संबंधों की पृष्ठभूमि

भारत-उज्बेकिस्तान रक्षा सहयोग जॉइंट वर्किंग ग्रुप की स्थापना वर्ष 2019 में हुई थी। दोनों देश नियमित रूप से 'डस्टलिक' संयुक्त सैन्य अभ्यास में भाग लेते हैं। इसका सातवाँ संस्करण 12 से 25 अप्रैल 2026 के बीच उज्बेकिस्तान के नमनगन स्थित गुरुमसराय फील्ड ट्रेनिंग एरिया में आयोजित हुआ था, जिसमें महार रेजिमेंट और भारतीय वायु सेना के जवानों ने हिस्सा लिया। इस अभ्यास का उद्देश्य अर्ध-पहाड़ी और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में संयुक्त अभियान क्षमता और सामरिक समन्वय को बेहतर बनाना था।

आगे की राह

यह बैठक विदेश मंत्री एस. जयशंकर और उज्बेकिस्तान के विदेश मंत्री बख्तियार सैदोव के बीच नई दिल्ली में हुई वार्ता के बाद आई है, जिससे स्पष्ट है कि दोनों देश सुरक्षा और महत्वपूर्ण संसाधन सहयोग को कूटनीतिक प्राथमिकता दे रहे हैं। आने वाले महीनों में संयुक्त अभ्यास के नए कार्यक्रमों और रक्षा उद्योग साझेदारी के ठोस प्रस्तावों की घोषणा अपेक्षित है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो SCO और 'कनेक्ट सेंट्रल एशिया' नीति के तहत आकार ले रही है। आतंकवाद-रोधी अभ्यास पर जोर इस क्षेत्र में अफगानिस्तान से उपजे सुरक्षा दबावों के संदर्भ में खासा अहम है। हालाँकि, रक्षा उद्योग सहयोग के दावे अब तक ठोस अनुबंधों में नहीं बदले हैं — असली कसौटी यही होगी कि तकनीक हस्तांतरण और संयुक्त उत्पादन की बात कागज़ से ज़मीन पर कब उतरती है।
RashtraPress
6 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत-उज्बेकिस्तान छठी JWG रक्षा बैठक कब और कहाँ हुई?
यह बैठक 5 अगस्त 2026 को ताशकंद में आयोजित हुई। इसकी सह-अध्यक्षता भारतीय रक्षा मंत्रालय के संयुक्त सचिव दिनेश कुमार और उज्बेकिस्तान के लेफ्टिनेंट कर्नल सुखरोबजोन सिरोजोव ने की।
बैठक में किन विषयों पर चर्चा हुई?
बैठक में संयुक्त प्रशिक्षण और सैन्य अभ्यास, आतंकवाद-रोधी अभियान, क्षमता निर्माण, रक्षा शिक्षा और रक्षा उद्योगों की स्थापना पर विचार-विमर्श हुआ। तकनीक के आदान-प्रदान और रक्षा उपकरणों के रखरखाव पर भी बातचीत हुई।
भारत-उज्बेकिस्तान JWG की स्थापना कब हुई थी?
रक्षा सहयोग जॉइंट वर्किंग ग्रुप की स्थापना वर्ष 2019 में हुई थी। तब से यह ढाँचा दोनों देशों के बीच सैन्य सहयोग को संस्थागत रूप से आगे बढ़ाता आ रहा है।
'डस्टलिक' सैन्य अभ्यास क्या है और इसका नवीनतम संस्करण कब हुआ?
'डस्टलिक' भारत और उज्बेकिस्तान का संयुक्त सैन्य अभ्यास है, जो अर्ध-पहाड़ी और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में संयुक्त अभियान क्षमता पर केंद्रित है। इसका सातवाँ संस्करण 12 से 25 अप्रैल 2026 के बीच उज्बेकिस्तान के नमनगन स्थित गुरुमसराय फील्ड ट्रेनिंग एरिया में हुआ, जिसमें महार रेजिमेंट और भारतीय वायु सेना के जवानों ने भाग लिया।
यह बैठक किस व्यापक कूटनीतिक संदर्भ में हुई?
यह बैठक नई दिल्ली में विदेश मंत्री एस. जयशंकर और उज्बेकिस्तान के विदेश मंत्री बख्तियार सैदोव के बीच हुई उच्चस्तरीय वार्ता के बाद आयोजित की गई। इसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच सुरक्षा और महत्वपूर्ण संसाधन सहयोग को और मजबूत करना है।
राष्ट्र प्रेस
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