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क्या नैरोबी में ‘ब्रांड इंडिया' के तहत भारतीय कंपनियाँ रक्षा उत्पादों का प्रदर्शन कर रही हैं?

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क्या नैरोबी में ‘ब्रांड इंडिया' के तहत भारतीय कंपनियाँ रक्षा उत्पादों का प्रदर्शन कर रही हैं?

सारांश

भारतीय रक्षा कंपनियाँ नैरोबी में ‘ब्रांड इंडिया' योजना के तहत अपने उत्पादों का प्रदर्शन कर रही हैं। इस कार्यक्रम में 20 कंपनियाँ शामिल हैं और यह रक्षा सहयोग को बढ़ावा देने का एक महत्वपूर्ण अवसर है। जानें इस कार्यक्रम की खास बातें और भारतीय रक्षा उद्योग के विकास के बारे में।

मुख्य बातें

‘ब्रांड इंडिया' योजना के तहत भारतीय रक्षा कंपनियों का प्रदर्शन केन्या में 20 कंपनियों की भागीदारी रक्षा उत्पादन सचिव संजीव कुमार की अगुवाई स्वदेशी रक्षा क्षमताओं को बढ़ावा देने का प्रयास प्राइवेट सेक्टर की भूमिका में वृद्धि

नई दिल्ली, 19 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। ‘ब्रांड इंडिया' योजना के अंतर्गत भारतीय रक्षा कंपनियाँ केन्या में हथियार और रक्षा उपकरण प्रदर्शित कर रही हैं। इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की 20 भारतीय रक्षा कंपनियाँ भाग ले रही हैं।

रक्षा मंत्रालय के उत्पादन सचिव के नेतृत्व में ये कंपनियाँ केन्या पहुँची हैं। यहाँ भारतीय रक्षा उत्पादों और सेवाओं की एक व्यापक श्रृंखला का प्रदर्शन किया जा रहा है। ‘ब्रांड इंडिया' योजना के तहत रक्षा उत्पादन सचिव संजीव कुमार की अगुवाई में एक चार सदस्यीय भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार, 19 जनवरी से केन्या की आधिकारिक यात्रा प्रारंभ की है। यह प्रतिनिधिमंडल 21 जनवरी तक केन्या में रहेगा।

आज, सोमवार को ही केन्या की राजधानी नैरोबी में तीसरी भारत-केन्या रक्षा प्रदर्शनी और संगोष्ठी आयोजित की गई है। रक्षा उत्पादन सचिव संजीव कुमार यहाँ भारत के रक्षा विनिर्माण और निर्यात पारिस्थितिकी तंत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। रक्षा मंत्रालय का कहना है कि केन्या में प्रारंभ हुए इस कार्यक्रम का आयोजन रक्षा उत्पादन विभाग की ‘ब्रांड इंडिया' योजना के तहत किया जा रहा है। केन्या में भारत के उच्चायुक्त डॉ. आदर्श स्वैका भी इस कार्यक्रम में शामिल हुए हैं।

रक्षा मंत्रालय के अनुसार भारतीय दल की यह मौजूदगी भारत सरकार के रक्षा औद्योगिक सहयोग और निर्यात को मजबूत करने के विजन का प्रतीक है। भारतीय रक्षा उत्पादन सचिव इस यात्रा के दौरान केन्या सरकार और केन्या रक्षा बलों के अधिकारियों के साथ बैठकें भी कर रहे हैं। इन द्विपक्षीय बैठकों का मुख्य उद्देश्य भारत की स्वदेशी रक्षा विनिर्माण क्षमताओं को बढ़ावा देना और आपसी सहयोग के अवसरों का पता लगाना है। गौरतलब है कि कई देशों ने भारतीय रक्षा उपकरणों में रुचि दिखाई है। भारत पिनाका मिसाइलों का निर्यात कर रहा है।

रक्षा मंत्रालय के मुताबिक भारतीय घरेलू रक्षा उत्पाद, जो 2014 में मात्र 46,425 करोड़ रुपए था, वह आज बढ़कर रिकॉर्ड 1.5 लाख करोड़ रुपए से अधिक हो चुका है। बड़ी बात यह है कि इसमें से 33,000 करोड़ रुपए से अधिक का योगदान प्राइवेट सेक्टर से आया है। यह प्राइवेट सेक्टर की बढ़ती भागीदारी का परिणाम है कि भारत का रक्षा निर्यात, जो दस वर्ष पहले 1,000 करोड़ रुपए से भी कम था, आज वह बढ़कर रिकॉर्ड 24,000 करोड़ रुपए तक पहुँच गया है।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह कह चुके हैं कि सरकार का ध्यान सिर्फ इस बात पर नहीं है कि रक्षा के क्षेत्र में प्राइवेट सेक्टर का योगदान बढ़ना चाहिए, बल्कि इस बात पर भी है कि आने वाले समय में रक्षा निर्माण से जुड़े क्षेत्रों में प्राइवेट सेक्टर की भूमिका 50 प्रतिशत या उससे भी अधिक हो। उनका कहना है कि जो चीजें हम नहीं बना सकते, उनके लिए भी कम से कम, 50 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री का प्रावधान तो किया ही गया है। इन्हीं प्रयासों के फलस्वरूप, हम कई क्षेत्रों में अपना स्वदेशी सामग्री बढ़ाने में सफल हुए हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो न केवल घरेलू सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग को भी मजबूती प्रदान करता है।
RashtraPress
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

‘ब्रांड इंडिया' योजना का उद्देश्य क्या है?
‘ब्रांड इंडिया' योजना का उद्देश्य भारतीय उत्पादों और सेवाओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रमोट करना है।
केन्या में भारतीय रक्षा कंपनियाँ कौन सी हैं?
केन्या में 20 भारतीय रक्षा कंपनियाँ शामिल हैं, जो विभिन्न रक्षा उत्पादों का प्रदर्शन कर रही हैं।
राष्ट्र प्रेस
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