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ज्ञानेश कुमार पर कांग्रेस का हमला: हुसैन दलवई बोले — हटाए बिना नहीं मिलेगा जनता को अधिकार

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ज्ञानेश कुमार पर कांग्रेस का हमला: हुसैन दलवई बोले — हटाए बिना नहीं मिलेगा जनता को अधिकार

सारांश

कांग्रेस नेता हुसैन दलवई ने मुंबई में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर सीधा हमला बोला — कहा कि उन्हें हटाए बिना देश में लोकतांत्रिक अधिकार बहाल नहीं होंगे। आयोग के भीतर सदस्यों के बीच मतभेद की स्वीकृति को उन्होंने संस्थागत संकट का प्रमाण बताया।

मुख्य बातें

हुसैन दलवई ने 27 सितंबर 2026 को मुंबई में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की माँग की।
आयुक्त विवेक जोशी और सुखबीर सिंह संधू के मतभेद स्वीकार करने को दलवई ने 'संस्थागत संकट का सबूत' बताया।
दलवई ने आरोप लगाया कि ECI अमित शाह और पीएम मोदी के निर्देश पर काम कर रही है।
राम मंदिर चढ़ावा मामले में चंपत राय और अनिल मिश्रा को क्लीन चिट देने पर भी सरकार पर निशाना साधा।
दलवई ने दावा किया कि इस मुद्दे पर विपक्ष एकजुट है और BJP के कुछ नेता भी असंतुष्ट हैं।

कांग्रेस नेता हुसैन दलवई ने 27 सितंबर 2026 को मुंबई में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर तीखा हमला बोला और कहा कि जब तक उन्हें पद से नहीं हटाया जाता, तब तक इस देश के नागरिकों को उनके लोकतांत्रिक अधिकार नहीं मिल सकते। दलवई ने एक अंग्रेज़ी अखबार की रिपोर्ट का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि चुनाव आयोग (ECI) केंद्र सरकार के इशारे पर कार्य कर रहा है, जो लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों के विरुद्ध है।

मतभेद सिद्ध हो चुके हैं — दलवई

दलवई ने कहा कि आयुक्त विवेक जोशी और सुखबीर सिंह संधू का यह स्वीकार करना कि उनके बीच मतभेद थे, खुद ही साबित करता है कि आयोग के भीतर सब कुछ ठीक नहीं है। उन्होंने कहा, 'ज्ञानेश कुमार खुद को बहुत बड़ा समझते हैं। चुनाव आयोग तीन लोगों का आयोग है और तीनों को बराबर अधिकार हैं, लेकिन वह दोनों को साइडलाइन करके रखते हैं।'

उन्होंने आगे कहा, 'मतभेद क्या हैं? जिस तरह से काम करते हैं — अमित शाह बोलते हैं, पीएम मोदी बोलते हैं, वैसे ही काम करते हैं। यह बिल्कुल गलत है, इसे बदलना चाहिए।' दलवई का यह बयान उस समय आया है जब विपक्षी दल चुनाव आयोग की स्वायत्तता पर सवाल उठा रहे हैं।

विपक्ष की एकजुटता और भाजपा पर सवाल

कांग्रेस नेता ने कहा कि इस मुद्दे पर विपक्ष एकजुट हो रहा है और यह एक सकारात्मक संकेत है। उन्होंने यह भी दावा किया कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) के कुछ नेता भी इस स्थिति से असंतुष्ट हैं। दलवई ने भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा के बयानों को पार्टी की राजनीतिक लाइन करार दिया और पूछा कि क्या भाजपा की लाइन देश के लोकतंत्र को कमज़ोर करना है।

उन्होंने कहा, 'आप इस देश में संविधान की लाइन पर चलते हैं या आरएसएस की लाइन पर, यह जरा स्पष्ट कीजिए।' गौरतलब है कि चुनाव आयोग की निष्पक्षता को लेकर यह विवाद पिछले कुछ महीनों में तेज़ हुआ है।

राम मंदिर चढ़ावा मामले पर भी निशाना

दलवई ने राम मंदिर चढ़ावा मामले में भी सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पुलिस ने इस मामले में आठ लोगों को आरोपी बनाया है, जबकि चंपत राय और अनिल मिश्रा को क्लीन चिट देकर सरकारी गवाह बना दिया गया है। उनके अनुसार, इस कदम से मुख्य आरोपियों को बचाया जा रहा है और छोटे लोगों को फँसाया जा रहा है।

उन्होंने कहा, 'ये धर्म की बड़ी-बड़ी बातें करते हैं और धर्म में भी चोरी करने लगे हैं। इनका चरित्र अब सबके सामने आ गया है।' यह मामला राजनीतिक रूप से संवेदनशील है और विपक्ष ने इसे बड़े पैमाने पर उठाने की रणनीति बनाई है।

संविधान और लोकतंत्र पर ज़ोर

कांग्रेस नेता ने अपने भाषण में महात्मा गांधी, पंडित जवाहरलाल नेहरू, सरदार पटेल और डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर का उल्लेख करते हुए कहा कि यह देश संविधान के मुताबिक चलता है और इसे बदला नहीं जाना चाहिए। उन्होंने संकेत दिया कि सत्तारूढ़ दल पर संविधान के स्थान पर वैकल्पिक विचारधारा थोपने की मंशा के आरोप लगे हैं।

विपक्ष की यह मुहिम आगामी चुनावी मौसम में चुनाव आयोग की संस्थागत विश्वसनीयता को केंद्रीय राजनीतिक मुद्दा बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

दो अलग दावे हैं। आयोग के भीतर असहमति लोकतांत्रिक विमर्श का हिस्सा हो सकती है; वह खुद भ्रष्टाचार का प्रमाण नहीं बनती। जो बात असली परीक्षा है, वह यह है कि विपक्ष इन आरोपों को संसदीय या न्यायिक मंच पर कितने ठोस साक्ष्यों के साथ ले जा पाता है।
RashtraPress
28 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हुसैन दलवई ने ज्ञानेश कुमार को हटाने की माँग क्यों की?
कांग्रेस नेता हुसैन दलवई ने आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार केंद्र सरकार के इशारे पर काम कर रहे हैं और आयोग के अन्य दो सदस्यों को हाशिये पर रख रहे हैं। उनका कहना है कि जब तक ज्ञानेश कुमार पद पर हैं, देश में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव संभव नहीं।
विवेक जोशी और सुखबीर सिंह संधू के मतभेद का मामला क्या है?
एक अंग्रेज़ी अखबार की रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयुक्त विवेक जोशी और सुखबीर सिंह संधू ने स्वीकार किया कि आयोग के भीतर उनके बीच मतभेद थे, जो बाद में दूर हो गए। दलवई ने इस स्वीकृति को आयोग में आंतरिक असंतुलन का प्रमाण बताया।
राम मंदिर चढ़ावा मामले में दलवई ने क्या आरोप लगाए?
दलवई ने कहा कि पुलिस ने इस मामले में आठ लोगों को आरोपी बनाया है, जबकि चंपत राय और अनिल मिश्रा को क्लीन चिट देकर सरकारी गवाह बना दिया गया है। उनके अनुसार मुख्य आरोपियों को बचाकर छोटे लोगों को फँसाया जा रहा है।
क्या अन्य विपक्षी दल भी चुनाव आयोग की आलोचना में साथ हैं?
दलवई के अनुसार, इस मुद्दे पर विपक्ष एकजुट हो रहा है। उन्होंने यह भी दावा किया कि भाजपा के कुछ नेता भी आयोग की मौजूदा कार्यशैली से असंतुष्ट हैं, हालाँकि उन्होंने किसी नाम का उल्लेख नहीं किया।
कांग्रेस का यह बयान किस संदर्भ में आया है?
यह बयान 27 सितंबर 2026 को मुंबई में आया, जब चुनाव आयोग की स्वायत्तता और निष्पक्षता को लेकर विपक्षी दलों की आलोचना तेज़ हो रही है। दलवई ने यह भी कहा कि आयोग ने अपनी साख खुद खराब की है और लोगों को उसे बदनाम करने की ज़रूरत नहीं।
राष्ट्र प्रेस
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