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चुनाव आयोग विवाद पर सीएम धामी का बचाव: 'असहमति सामान्य प्रक्रिया, इसे गलत न बताएं'

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चुनाव आयोग विवाद पर सीएम धामी का बचाव: 'असहमति सामान्य प्रक्रिया, इसे गलत न बताएं'

सारांश

उत्तराखंड के सीएम धामी ने ECI के भीतर मतभेद को सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया बताया, जबकि राहुल गांधी ने CEC ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा माँगते हुए 'देशद्रोह' तक का आरोप लगाया। भाजपा और कांग्रेस के बीच चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर तीखी जंग जारी है।

मुख्य बातें

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 25 सितंबर 2026 को हल्द्वानी में ECI के भीतर मतभेद विवाद का बचाव किया।
धामी ने कहा कि असहमति हर संस्था में सामान्य प्रक्रिया है और इसे 'गंभीर रूप से गलत' बताना उचित नहीं।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार दो चुनाव आयुक्तों ने कथित तौर पर कुछ फैसलों पर बिना जानकारी के आपत्ति दर्ज कराई थी।
विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की माँग करते हुए 'देशद्रोह' का आरोप लगाया।
BJP ने पलटवार करते हुए कहा कि कांग्रेस 'चुनाव हारने के डर' से ECI पर हमला कर रही है।

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 25 सितंबर 2026 को हल्द्वानी में पत्रकारों से बात करते हुए चुनाव आयोग (ECI) के भीतर मतभेदों की खबरों को सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा बताया और कहा कि इसे अनावश्यक रूप से 'गंभीर रूप से गलत' नहीं ठहराया जाना चाहिए। धामी की यह प्रतिक्रिया उन मीडिया रिपोर्टों के कुछ दिनों बाद आई, जिनमें दावा किया गया था कि दो चुनाव आयुक्तों ने कथित तौर पर अपनी जानकारी के बिना लिए गए कई फैसलों पर 'आपत्ति दर्ज कराई' थी।

धामी का तर्क: हर संस्था में होती है राय की विविधता

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि हर कार्यालय में एक तय प्रक्रिया होती है और सभी के अपने विचार होते हैं, लेकिन अंततः निर्णय सामूहिक होता है। उन्होंने सरकारी तंत्र का उदाहरण देते हुए कहा कि एक अनुभाग अधिकारी से लेकर अवर सचिव, अतिरिक्त सचिव और सचिव तक — हर स्तर पर टिप्पणियाँ दर्ज होती हैं और जब तक फ़ाइल मुख्य सचिव तक पहुँचती है, कई मत सामने आ चुके होते हैं।

धामी ने स्पष्ट किया: 'इसलिए मुझे नहीं लगता कि यहाँ कोई ऐसा बड़ा मुद्दा है जिसे अनावश्यक रूप से गंभीर बताया जाए। सभी के विचारों पर विचार किया जाता है और हर कोई अपनी राय व्यक्त करने के लिए स्वतंत्र है।'

विवाद की पृष्ठभूमि: क्या थे आरोप

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, ECI के भीतर दो चुनाव आयुक्तों ने कथित तौर पर कुछ फैसलों पर अपनी असहमति दर्ज कराई थी, जो उनके बगैर लिए गए बताए जा रहे थे। इस विवाद ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी, विशेष रूप से विपक्षी दलों ने इसे चुनाव आयोग की स्वायत्तता और निष्पक्षता पर सवाल उठाने के अवसर के रूप में देखा।

गौरतलब है कि यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब देश में कई राज्यों में चुनावी गतिविधियाँ जोर पकड़ रही हैं और संस्थागत विश्वसनीयता पर बहस तेज़ है।

राहुल गांधी का तीखा हमला

एक दिन पूर्व, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और केंद्र की भारतीय जनता पार्टी (BJP) नेतृत्व वाली सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि कुमार को इस्तीफा दे देना चाहिए। राहुल गांधी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा: 'आपने जो किया है वह देशद्रोह के बराबर है। यह संविधान और देश की कानूनी संरचना पर हमला है... हम भारत में लोकतंत्र को नष्ट होते हुए चुपचाप नहीं बैठेंगे। इसके लिए जिम्मेदार लोगों को एक दिन सजा जरूर मिलेगी।'

राहुल गांधी ने BJP के खिलाफ 'सत्ता विरोधी लहर' के अभाव पर भी सवाल उठाया और वोटों की कथित 'चोरी' का आरोप लगाया। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त से इस 'चोरी' के 'गवाह' बनने की माँग की।

BJP का पलटवार

भाजपा ने राहुल गांधी के आरोपों पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए दावा किया कि कांग्रेस 'चुनाव हारने के डर' से ECI पर हमला कर रही है। पार्टी ने विपक्ष के आरोपों को निराधार और लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमज़ोर करने की कोशिश बताया।

आगे क्या

यह विवाद आगामी चुनावों के संदर्भ में ECI की संस्थागत स्वायत्तता और आंतरिक निर्णय-प्रक्रिया पर बहस को और तेज़ कर सकता है। सभी पक्षों की नज़रें अब ECI की आधिकारिक प्रतिक्रिया और संभावित स्पष्टीकरण पर टिकी हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह उस बड़े सवाल को दरकिनार करता है कि क्या ECI के भीतर निर्णय प्रक्रिया पारदर्शी और समावेशी है। राहुल गांधी की 'देशद्रोह' जैसी भाषा राजनीतिक रूप से प्रभावी हो सकती है, लेकिन यह ठोस संस्थागत सुधार की माँग को भावनात्मक टकराव में बदल देती है। असली चुनौती यह है कि बिना ECI का राजनीतिकरण किए इसकी आंतरिक जवाबदेही सुनिश्चित की जाए — जो फिलहाल किसी भी पक्ष के एजेंडे में दिखती नहीं।
RashtraPress
25 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चुनाव आयोग के भीतर मतभेद विवाद क्या है?
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार ECI के दो चुनाव आयुक्तों ने कथित तौर पर उनकी जानकारी के बिना लिए गए कुछ फैसलों पर आपत्ति दर्ज कराई थी। इस खबर ने राजनीतिक विवाद को जन्म दिया और ECI की आंतरिक निर्णय-प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए।
सीएम धामी ने ECI विवाद पर क्या कहा?
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 25 सितंबर 2026 को हल्द्वानी में कहा कि हर संस्था में असहमति और राय की विविधता सामान्य है और इसे अनावश्यक रूप से 'गंभीर रूप से गलत' नहीं बताया जाना चाहिए। उन्होंने सरकारी फ़ाइल नोटिंग प्रक्रिया का उदाहरण देते हुए कहा कि अंतिम निर्णय हमेशा सामूहिक होता है।
राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त से इस्तीफा क्यों माँगा?
विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर वोटों की कथित 'चोरी' में भूमिका का आरोप लगाते हुए उनके इस्तीफे की माँग की। उन्होंने इसे 'देशद्रोह के बराबर' और संविधान पर हमला बताया, हालाँकि BJP ने इन आरोपों को निराधार और चुनाव हारने के डर की उपज बताया।
BJP ने कांग्रेस के ECI पर हमले पर क्या जवाब दिया?
BJP ने दावा किया कि कांग्रेस 'चुनाव हारने के डर' से ECI पर हमला कर रही है और विपक्ष के आरोपों को लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमज़ोर करने की कोशिश बताया। पार्टी ने ECI की निष्पक्षता का समर्थन किया।
इस विवाद का आगामी चुनावों पर क्या असर हो सकता है?
यह विवाद ECI की संस्थागत विश्वसनीयता और आंतरिक निर्णय-प्रक्रिया पर बहस को तेज़ कर सकता है, जो आगामी चुनावों में मतदाताओं के भरोसे को प्रभावित कर सकती है। सभी पक्षों की नज़रें अब ECI की आधिकारिक प्रतिक्रिया पर टिकी हैं।
राष्ट्र प्रेस
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