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हुसैन दलवाई का चुनाव आयोग पर बड़ा आरोप, कहा- ईसीआई केंद्र की कठपुतली बन गया है

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हुसैन दलवाई का चुनाव आयोग पर बड़ा आरोप, कहा- ईसीआई केंद्र की कठपुतली बन गया है

सारांश

कांग्रेस नेता हुसैन दलवाई ने चुनाव आयोग की स्वायत्तता पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग अब केंद्र सरकार के प्रभाव में काम कर रहा है और असम में होने वाले चुनाव निष्पक्ष नहीं होंगे।

मुख्य बातें

हुसैन दलवाई ने चुनाव आयोग की स्वायत्तता पर सवाल उठाए हैं।
केंद्र सरकार की प्रभाव के कारण आयोग की महत्ता खत्म हो गई है।
आसाम में चुनावों में धांधली की संभावना जताई गई है।
पड़ोसी देशों से संवाद बनाए रखने की आवश्यकता पर बल दिया गया है।
सनातन धर्म में जातिगत भेदभाव के मुद्दे पर भी चर्चा की गई है।

मुंबई, 15 मार्च (राष्ट्र प्रेस) - देश में आगामी चुनावों को लेकर सियासी चर्चाएँ गर्म हो गई हैं। इस बीच, कांग्रेस नेता और पूर्व राज्यसभा सदस्य हुसैन दलवाई ने चुनाव आयोग की स्वतंत्रता पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग अब केंद्र सरकार के प्रभाव में कार्य कर रहा है और इसकी स्वायत्तता समाप्त हो चुकी है।

राष्ट्र प्रेस से बातचीत के दौरान, हुसैन दलवाई ने कहा कि जिन राज्यों में चुनाव होने वाले हैं, वहां जल्द ही चुनाव कार्यक्रम की घोषणा की जाएगी। लेकिन उन्होंने यह भी दावा किया कि विशेषकर असम में होने वाले चुनाव निष्पक्ष नहीं होंगे।

कांग्रेस नेता ने कहा, "चुनाव आयोग अब केंद्र सरकार की कठपुतली बन चुका है। इसकी महत्ता समाप्त हो गई है। असम में चुनाव किस तरह होंगे, यह देखिए। वहां चुनाव नहीं होंगे, बल्कि चुनाव की धांधली होगी।"

हुसैन दलवाई ने कहा, "एसआईआर के माध्यम से वोटरों को वोटर लिस्ट से हटाया गया है। यह पूरी तरह से संविधान के खिलाफ है। लोगों के दिमाग में यह बात बैठ गई है कि चुनाव आयोग एक कठपुतली बन गया है।"

उन्होंने आगे आरोप लगाया कि सिर्फ असम ही नहीं, बल्कि अन्य राज्यों में भी चुनावों को प्रभावित करने की कोशिश की जाएगी। हर जगह चुनावों में गड़बड़ी करने की कोशिश की जाएगी। यह बिल्कुल स्पष्ट है। पश्चिम बंगाल में तो उन्होंने इस दिशा में काम करना भी शुरू कर दिया है।

चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए, कांग्रेस नेता ने कहा, "जब सरकार कहती है 'खड़े हो जाओ,' तो आयोग खड़ा हो जाता है और जब कहती है 'बैठ जाओ,' तो बैठ जाता है। इस तरह चुनाव आयोग की महत्ता समाप्त हो चुकी है।"

इस दौरान, दलवाई ने कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर के हालिया बयान पर भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि पड़ोसी देशों के साथ संवाद बनाए रखना बहुत आवश्यक है।

हुसैन दलवाई ने कहा, "वे हमारे पड़ोसी देश हैं और हमें उनसे बात करनी चाहिए। हमें बांग्लादेश, नेपाल और श्रीलंका से भी संवाद करना चाहिए। कहीं न कहीं एक प्रकार का सहयोगी ढांचा या संघ बनाना भी आवश्यक है। बातचीत के माध्यम से ही समस्याओं का समाधान निकल सकता है।"

कांग्रेस नेता ने यह भी कहा कि किसी देश के खिलाफ सिर्फ इसलिए लगातार बोलना ठीक नहीं है क्योंकि वह एक मुस्लिम देश है।

इसके अलावा, उन्होंने 'हिंदू' और 'सनातन धर्म' के मुद्दे पर भी टिप्पणी की। दलवाई ने कहा, "हर व्यक्ति 'हिंदू' शब्द से खुद को जोड़ने के लिए बाध्य नहीं है। जो लोग 'हिंदू-हिंदू' की बात करते हैं, वे अक्सर सनातन धर्म की बात करते हैं। सनातन धर्म में जातिगत भेदभाव की मान्यता रही है, इसलिए स्वाभाविक है कि कुछ लोग इसका विरोध करेंगे।"

संपादकीय दृष्टिकोण

तो यह लोकतंत्र के लिए चिंताजनक है। ऐसे आरोपों से सरकार की विश्वसनीयता भी प्रभावित होती है।
RashtraPress
6 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हुसैन दलवाई ने चुनाव आयोग पर क्या आरोप लगाए हैं?
हुसैन दलवाई ने कहा है कि चुनाव आयोग अब केंद्र सरकार के प्रभाव में काम कर रहा है और उसकी स्वायत्तता समाप्त हो चुकी है।
क्या असम में होने वाले चुनाव निष्पक्ष होंगे?
दलवाई का मानना है कि असम में होने वाले चुनाव निष्पक्ष नहीं होंगे और वहां चुनावों में धांधली की संभावना है।
हुसैन दलवाई ने पड़ोसी देशों के साथ संवाद पर क्या कहा?
उन्होंने कहा कि पड़ोसी देशों के साथ संवाद बनाए रखना बहुत आवश्यक है और हमें बांग्लादेश, नेपाल और श्रीलंका से बातचीत करनी चाहिए।
हुसैन दलवाई ने 'हिंदू' और 'सनातन धर्म' पर क्या टिप्पणी की?
दलवाई ने कहा कि हर व्यक्ति 'हिंदू' शब्द से खुद को जोड़ने के लिए बाध्य नहीं है और सनातन धर्म में जातिगत भेदभाव की मान्यता रही है।
राष्ट्र प्रेस
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