चुनाव आयोग के अंदरूनी विवाद पर विपक्ष का हमला: कांग्रेस बोली 'लोकतंत्र लूट', झामुमो ने CEC पर साधा निशाना
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली, 24 सितंबर 2026 — भारत निर्वाचन आयोग के दो चुनाव आयुक्तों — सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी — द्वारा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की कार्यप्रणाली पर लिखित आपत्ति दर्ज कराए जाने के बाद राजनीतिक विवाद तेज़ हो गया है। कांग्रेस, झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) और नेशनल कॉन्फ्रेंस सहित कई विपक्षी दलों ने आयोग पर पक्षपात के गंभीर आरोप लगाए हैं।
मुख्य घटनाक्रम
कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य प्रमोद तिवारी ने बुधवार को भारतीय जनता पार्टी (BJP) और चुनाव आयोग दोनों पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, 'आरोप लगे हैं चुनाव आयोग पर और प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहे हैं भाजपा के प्रवक्ता। यह लोकतंत्र लूट है। खुद चुनाव आयोग के सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी कह रहे हैं कि 10 महीने में 17 बार गड़बड़ी की गई है।'
आयुक्तों की लिखित आपत्ति के अनुसार, आयोग के भीतर कुछ फैसले एकतरफा तरीके से लिए गए, जो सामूहिक सहमति की परंपरा के विरुद्ध बताए जा रहे हैं। यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब देश में कई राज्यों में चुनावी सरगर्मियाँ तेज़ हैं।
झामुमो का आरोप: 'CEC पूरी तरह एक्सपोज़'
झामुमो प्रवक्ता मनोज पांडेय ने मुख्य चुनाव आयुक्त पर एकतरफा निर्णय लेने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, 'तीन आयुक्तों द्वारा गठित कमेटी के बीच मुख्य चुनाव आयुक्त ने एकतरफा फैसला लिया, जो अनुचित है। अब मुख्य चुनाव आयुक्त पूरी तरह से एक्सपोज हो गए हैं।' पांडेय ने यह भी आरोप लगाया कि आयोग के निर्णय एक विशेष राजनीतिक दल को लाभ पहुँचाने की मंशा से लिए गए हैं — हालाँकि उन्होंने इसके लिए कोई विशिष्ट साक्ष्य नहीं दिया।
एसआईआर विवाद: वोटर लिस्ट से नाम हटाने पर घमासान
श्रीनगर से नेशनल कॉन्फ्रेंस के विधायक अब्दुल मजीद लारमी ने चुनाव आयोग और विशेष सारांश पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को लेकर चल रहे विवाद को 'साजिश' करार दिया। उन्होंने दावा किया, 'जिस तरह से एसआईआर के नाम पर लोगों को वोटर लिस्ट से हटाया जा रहा है — दिल्ली में अरविंद केजरीवाल, एलके आडवाणी और कई अन्य के नाम भी हटाए गए थे — वही खेल यहाँ भी हो रहा है।'
लारमी ने पश्चिम बंगाल और बिहार के संदर्भ का भी हवाला दिया और आरोप लगाया कि यह एक व्यापक पैटर्न है। गौरतलब है कि एसआईआर प्रक्रिया के तहत मतदाता सूची की सफाई एक नियमित प्रशासनिक कार्य है, लेकिन विपक्ष का कहना है कि इस बार इसमें राजनीतिक पक्षपात हो रहा है।
विपक्ष का व्यापक आरोप
विपक्षी दलों का सामूहिक आरोप है कि एसआईआर के नाम पर वोटर लिस्ट से नाम हटाने की प्रक्रिया में व्यवस्थित गड़बड़ी हो रही है, जिसका उद्देश्य एक खास पार्टी को चुनावी लाभ दिलाना है। हालाँकि चुनाव आयोग की ओर से अभी तक इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
यह ऐसे समय में आया है जब आयोग के भीतर आयुक्तों के बीच सार्वजनिक मतभेद खुद एक संस्थागत संकट के संकेत दे रहे हैं — जो लोकतांत्रिक व्यवस्था में निर्वाचन आयोग की निष्पक्षता को लेकर बड़े सवाल खड़े करता है।
आगे क्या होगा
इस विवाद के राजनीतिक और संस्थागत — दोनों स्तरों पर आगे बढ़ने की संभावना है। विपक्षी दल इस मुद्दे को संसद और सार्वजनिक मंचों पर उठाने की तैयारी में बताए जा रहे हैं। नज़रें इस बात पर भी होंगी कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार इन आरोपों का औपचारिक जवाब देते हैं या नहीं।