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चुनाव आयोग के अंदरूनी विवाद पर विपक्ष का हमला: कांग्रेस बोली 'लोकतंत्र लूट', झामुमो ने CEC पर साधा निशाना

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चुनाव आयोग के अंदरूनी विवाद पर विपक्ष का हमला: कांग्रेस बोली 'लोकतंत्र लूट', झामुमो ने CEC पर साधा निशाना

सारांश

चुनाव आयोग के दो आयुक्तों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की कार्यप्रणाली पर लिखित आपत्ति दर्ज की — और अब कांग्रेस से झामुमो तक विपक्ष ने इसे 'लोकतंत्र लूट' बताते हुए एसआईआर प्रक्रिया में पक्षपात का आरोप लगाया है। संस्था के भीतर यह सार्वजनिक दरार खुद एक बड़ा संकेत है।

मुख्य बातें

चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की कार्यप्रणाली पर लिखित आपत्ति दर्ज कराई।
कांग्रेस के प्रमोद तिवारी ने दावा किया कि 10 महीने में 17 बार गड़बड़ी की गई है।
झामुमो प्रवक्ता मनोज पांडेय ने CEC पर एकतरफा फैसला लेने और एक पार्टी को लाभ पहुँचाने का आरोप लगाया।
नेशनल कॉन्फ्रेंस विधायक अब्दुल मजीद लारमी ने एसआईआर प्रक्रिया के तहत वोटर लिस्ट से नाम हटाने को 'साजिश' बताया।
विपक्ष का आरोप है कि दिल्ली , बंगाल और बिहार में भी इसी तरह के खेल खेले गए।

नई दिल्ली, 24 सितंबर 2026भारत निर्वाचन आयोग के दो चुनाव आयुक्तों — सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी — द्वारा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की कार्यप्रणाली पर लिखित आपत्ति दर्ज कराए जाने के बाद राजनीतिक विवाद तेज़ हो गया है। कांग्रेस, झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) और नेशनल कॉन्फ्रेंस सहित कई विपक्षी दलों ने आयोग पर पक्षपात के गंभीर आरोप लगाए हैं।

मुख्य घटनाक्रम

कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य प्रमोद तिवारी ने बुधवार को भारतीय जनता पार्टी (BJP) और चुनाव आयोग दोनों पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, 'आरोप लगे हैं चुनाव आयोग पर और प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहे हैं भाजपा के प्रवक्ता। यह लोकतंत्र लूट है। खुद चुनाव आयोग के सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी कह रहे हैं कि 10 महीने में 17 बार गड़बड़ी की गई है।'

आयुक्तों की लिखित आपत्ति के अनुसार, आयोग के भीतर कुछ फैसले एकतरफा तरीके से लिए गए, जो सामूहिक सहमति की परंपरा के विरुद्ध बताए जा रहे हैं। यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब देश में कई राज्यों में चुनावी सरगर्मियाँ तेज़ हैं।

झामुमो का आरोप: 'CEC पूरी तरह एक्सपोज़'

झामुमो प्रवक्ता मनोज पांडेय ने मुख्य चुनाव आयुक्त पर एकतरफा निर्णय लेने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, 'तीन आयुक्तों द्वारा गठित कमेटी के बीच मुख्य चुनाव आयुक्त ने एकतरफा फैसला लिया, जो अनुचित है। अब मुख्य चुनाव आयुक्त पूरी तरह से एक्सपोज हो गए हैं।' पांडेय ने यह भी आरोप लगाया कि आयोग के निर्णय एक विशेष राजनीतिक दल को लाभ पहुँचाने की मंशा से लिए गए हैं — हालाँकि उन्होंने इसके लिए कोई विशिष्ट साक्ष्य नहीं दिया।

एसआईआर विवाद: वोटर लिस्ट से नाम हटाने पर घमासान

श्रीनगर से नेशनल कॉन्फ्रेंस के विधायक अब्दुल मजीद लारमी ने चुनाव आयोग और विशेष सारांश पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को लेकर चल रहे विवाद को 'साजिश' करार दिया। उन्होंने दावा किया, 'जिस तरह से एसआईआर के नाम पर लोगों को वोटर लिस्ट से हटाया जा रहा है — दिल्ली में अरविंद केजरीवाल, एलके आडवाणी और कई अन्य के नाम भी हटाए गए थे — वही खेल यहाँ भी हो रहा है।'

लारमी ने पश्चिम बंगाल और बिहार के संदर्भ का भी हवाला दिया और आरोप लगाया कि यह एक व्यापक पैटर्न है। गौरतलब है कि एसआईआर प्रक्रिया के तहत मतदाता सूची की सफाई एक नियमित प्रशासनिक कार्य है, लेकिन विपक्ष का कहना है कि इस बार इसमें राजनीतिक पक्षपात हो रहा है।

विपक्ष का व्यापक आरोप

विपक्षी दलों का सामूहिक आरोप है कि एसआईआर के नाम पर वोटर लिस्ट से नाम हटाने की प्रक्रिया में व्यवस्थित गड़बड़ी हो रही है, जिसका उद्देश्य एक खास पार्टी को चुनावी लाभ दिलाना है। हालाँकि चुनाव आयोग की ओर से अभी तक इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

यह ऐसे समय में आया है जब आयोग के भीतर आयुक्तों के बीच सार्वजनिक मतभेद खुद एक संस्थागत संकट के संकेत दे रहे हैं — जो लोकतांत्रिक व्यवस्था में निर्वाचन आयोग की निष्पक्षता को लेकर बड़े सवाल खड़े करता है।

आगे क्या होगा

इस विवाद के राजनीतिक और संस्थागत — दोनों स्तरों पर आगे बढ़ने की संभावना है। विपक्षी दल इस मुद्दे को संसद और सार्वजनिक मंचों पर उठाने की तैयारी में बताए जा रहे हैं। नज़रें इस बात पर भी होंगी कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार इन आरोपों का औपचारिक जवाब देते हैं या नहीं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक संस्थागत संकट का संकेत है — जब आयुक्त ही मुख्य आयुक्त पर लिखित आरोप लगाएँ, तो संस्था की विश्वसनीयता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। दस महीनों में सत्रह बार 'गड़बड़ी' का दावा, यदि प्रमाणित हो, तो यह किसी एक नेता की विफलता नहीं — यह उस नियुक्ति प्रक्रिया की भी विफलता है जिसे सर्वोच्च न्यायालय भी लंबे समय से जाँचता रहा है। विपक्ष के आरोप राजनीतिक हो सकते हैं, लेकिन एसआईआर के नाम पर वोटर लिस्ट से著名 नामों के हटने की पुष्टि आयोग को स्वयं करनी होगी — चुप्पी इस संकट को और गहरा ही करेगी।
RashtraPress
24 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चुनाव आयोग का अंदरूनी विवाद क्या है?
चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की कार्यप्रणाली और कुछ फैसलों पर लिखित रूप में कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है। कांग्रेस नेता प्रमोद तिवारी के अनुसार, 10 महीनों में 17 बार गड़बड़ी का आरोप लगाया गया है।
कांग्रेस ने चुनाव आयोग पर क्या आरोप लगाए?
कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य प्रमोद तिवारी ने इसे 'लोकतंत्र लूट' बताया और कहा कि भाजपा के प्रवक्ता आयोग की तरफ से प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहे हैं, जो स्वयं में संदिग्ध है। उन्होंने आयोग की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठाए।
एसआईआर प्रक्रिया और वोटर लिस्ट विवाद क्या है?
विशेष सारांश पुनरीक्षण (SIR) के तहत मतदाता सूची की समीक्षा की जाती है। विपक्ष का आरोप है कि इस प्रक्रिया में राजनीतिक रूप से पक्षपात किया जा रहा है और दिल्ली में अरविंद केजरीवाल व एलके आडवाणी जैसे著名 नामों को भी सूची से हटाया गया।
झामुमो ने मुख्य चुनाव आयुक्त पर क्या आरोप लगाए?
झामुमो प्रवक्ता मनोज पांडेय ने आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने तीन आयुक्तों की कमेटी की सहमति के बगैर एकतरफा फैसला लिया। उन्होंने यह भी कहा कि आयोग के निर्णय एक विशेष पार्टी को लाभ पहुँचाने के लिए लिए गए।
इस विवाद का आगे क्या असर हो सकता है?
विपक्षी दल इस मुद्दे को संसद और सार्वजनिक मंचों पर उठाने की तैयारी में हैं। आयोग की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया अभी नहीं आई है, और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के जवाब पर सबकी निगाहें टिकी हैं।
राष्ट्र प्रेस
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