चुनाव आयोग के अंदरूनी विवाद पर विपक्ष का हमला: कांग्रेस बोली 'लोकतंत्र लूट', झामुमो ने मुख्य चुनाव आयुक्त को घेरा
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय चुनाव आयोग में अभूतपूर्व आंतरिक विवाद सामने आने के बाद 24 सितंबर 2026 को देश की सियासत तेज हो गई। चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की कार्यप्रणाली पर लिखित आपत्ति दर्ज कराई है, जिसके बाद भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) और झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) समेत कई विपक्षी दलों ने संस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
मुख्य घटनाक्रम
रिपोर्टों के अनुसार, आयोग के दोनों सदस्यों — संधू और जोशी — ने लिखित रूप में दर्ज कराया है कि पिछले 10 महीनों में 17 बार कार्यप्रणाली में अनियमितता बरती गई। यह चुनाव आयोग के इतिहास में दुर्लभ स्थिति है जब संस्था के भीतर ही इस तरह के विरोध का रिकॉर्ड सार्वजनिक हो।
यह ऐसे समय में आया है जब चुनाव आयोग पहले से ही विशेष सघन पुनरीक्षण (SIR) के तहत मतदाता सूची अद्यतन प्रक्रिया को लेकर विवादों में है। विपक्ष का आरोप है कि इस प्रक्रिया के नाम पर बड़ी संख्या में वैध मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जा रहे हैं।
कांग्रेस की प्रतिक्रिया
कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य प्रमोद तिवारी ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) और चुनाव आयोग दोनों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा, 'आरोप लगे हैं चुनाव आयोग पर और प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहे हैं भाजपा के प्रवक्ता। यह लोकतंत्र लूट है।' तिवारी ने आगे कहा कि 'खुद चुनाव आयोग के सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी कह रहे हैं कि 10 महीने में 17 बार गड़बड़ी की गई है।'
गौरतलब है कि कांग्रेस इस मुद्दे को संस्थागत स्वायत्तता के व्यापक प्रश्न से जोड़ रही है और BJP पर आयोग के बचाव में उतरने का आरोप लगा रही है।
झामुमो और अन्य दलों के आरोप
झामुमो प्रवक्ता मनोज पांडेय ने मुख्य चुनाव आयुक्त पर एकतरफा निर्णय लेने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, 'तीन आयुक्तों द्वारा गठित कमेटी के बीच मुख्य चुनाव आयुक्त ने एकतरफा फैसला लिया, जो अनुचित है।' पांडेय ने आगे आरोप लगाया कि 'चुनाव आयोग ने जो कुछ भी किया है, वह किसी एक विशेष पार्टी को लाभ पहुंचाने के लिए किया है।'
श्रीनगर से नेशनल कॉन्फ्रेंस के विधायक अब्दुल मजीद लारमी ने SIR विवाद को 'साजिश' करार दिया। उन्होंने कहा, 'जिस तरह से एसआईआर के नाम पर लोगों को वोटर लिस्ट से हटाया जा रहा है… दिल्ली में अरविंद केजरीवाल, एलके आडवाणी और कई अन्य लोगों के नाम भी वोटर लिस्ट से हटा दिए गए थे।' लारमी ने यह भी कहा कि बंगाल और बिहार में भी इसी तरह की शिकायतें सामने आई थीं।
SIR और मतदाता सूची विवाद
विपक्षी दलों का कहना है कि विशेष सघन पुनरीक्षण (SIR) के तहत मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया में व्यापक अनियमितता हो रही है। आलोचकों का कहना है कि यह प्रक्रिया चुनावी लाभ के लिए संचालित की जा रही है, हालांकि चुनाव आयोग ने इन आरोपों को अभी तक सार्वजनिक रूप से खारिज नहीं किया है।
यह पहली बार नहीं है जब मतदाता सूची की सफाई को लेकर विवाद उठा हो। पिछले कई वर्षों में विभिन्न राज्यों में SIR और संक्षिप्त पुनरीक्षण अभियानों के दौरान इसी तरह की शिकायतें दर्ज हुई हैं।
आगे क्या होगा
चुनाव आयोग की संस्थागत साख इस विवाद के केंद्र में है। अब सवाल यह है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार दोनों सदस्यों की लिखित आपत्तियों पर क्या कार्रवाई करते हैं और क्या आयोग इस आंतरिक मतभेद को सार्वजनिक रूप से संबोधित करेगा। विपक्ष का दबाव बढ़ने के साथ यह मामला संसद तक पहुँचने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।