भारत-केन्या के बीच कस्टम सहयोग MoU: CBIC और KRA ने नैरोबी में साइन किया ऐतिहासिक समझौता
सारांश
Key Takeaways
- CBIC और KRA के बीच नैरोबी में प्री-अराइवल इंफॉर्मेशन के आदान-प्रदान पर MoU हस्ताक्षरित हुआ।
- समझौते पर CBIC सदस्य योगेंद्र गर्ग और KRA कमिश्नर जनरल डॉ. लिलियन न्यावांडा ने हस्ताक्षर किए।
- बैठक की सह-अध्यक्षता वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल और केन्या की प्रिंसिपल सेक्रेटरी रेजिना अकोथ ओम्बाम ने की।
- फार्मास्युटिकल्स, फिनटेक, नवीकरणीय ऊर्जा, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और मैन्युफैक्चरिंग में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी।
- टैरिफ व नॉन-टैरिफ बाधाओं को कम करने और बिजनेस-टू-बिजनेस सहयोग को प्रोत्साहित करने पर भी चर्चा हुई।
केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) और केन्या रेवेन्यू अथॉरिटी (KRA) के बीच 28 अप्रैल 2025 को नैरोबी में प्री-अराइवल इंफॉर्मेशन के आदान-प्रदान पर एक समझौता ज्ञापन (MoU) हस्ताक्षरित किया गया, जो दोनों देशों के बीच कस्टम सहयोग को नई गति देगा। यह समझौता 10वीं भारत-केन्या संयुक्त व्यापार समिति (Joint Trade Committee) की बैठक के दौरान संपन्न हुआ और द्विपक्षीय व्यापार को सुगम बनाने की दिशा में एक ठोस कदम माना जा रहा है।
समझौते की मुख्य बातें
इस MoU पर CBIC के सदस्य योगेंद्र गर्ग और KRA की कमिश्नर जनरल डॉ. लिलियन न्यावांडा ने हस्ताक्षर किए। नैरोबी में भारतीय उच्चायोग के आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट के अनुसार, यह समझौता सीमा शुल्क सहयोग को बढ़ावा देगा, निकासी प्रक्रिया को तेज करेगा, जोखिम प्रबंधन में सुधार करेगा और भारत तथा केन्या के बीच द्विपक्षीय व्यापार को सुगम बनाएगा। प्री-अराइवल सूचना के आदान-प्रदान से सीमा पर माल की क्लियरेंस तेज होगी और अनावश्यक देरी में कमी आएगी।
बैठक में कौन-कौन रहे मौजूद
इस बैठक की सह-अध्यक्षता भारत के वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल और केन्या की ट्रेड प्रिंसिपल सेक्रेटरी रेजिना अकोथ ओम्बाम ने की। दोनों वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति इस बात का संकेत है कि दोनों देश इस साझेदारी को उच्च प्राथमिकता दे रहे हैं। यह ऐसे समय में आया है जब भारत अफ्रीकी देशों के साथ अपने आर्थिक संबंधों को व्यापक रूप से मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रहा है।
किन क्षेत्रों में बढ़ेगा सहयोग
दोनों देशों ने फार्मास्युटिकल्स, कृषि, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, फिनटेक, नवीकरणीय ऊर्जा और मैन्युफैक्चरिंग जैसे प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग गहरा करने पर सहमति जताई। इसके अतिरिक्त लॉजिस्टिक्स, इंफ्रास्ट्रक्चर प्लानिंग और क्षमता निर्माण (Capacity Building) में भी साझेदारी को विस्तार देने पर सहमति बनी। गौरतलब है कि भारत पहले से ही केन्या का प्रमुख व्यापारिक भागीदार है और यह समझौता उस संबंध को और संस्थागत रूप देता है।
व्यापारिक बाधाओं पर हुई विस्तृत चर्चा
बैठक में दोनों पक्षों ने टैरिफ और नॉन-टैरिफ बाधाओं को कम करने, बाजार तक पहुँच आसान बनाने और बिजनेस-टू-बिजनेस सहयोग को प्रोत्साहित करने पर विस्तार से विचार-विमर्श किया। संस्थागत तंत्र को मजबूत करने और लंबित मुद्दों के समाधान पर भी सहमति बनी, जो दोनों देशों के व्यापारिक समुदायों के लिए राहत की बात है।
आगे क्या होगा
दोनों देशों ने एक संतुलित, विविध और भविष्य-केंद्रित आर्थिक साझेदारी की प्रतिबद्धता दोहराई है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह MoU केवल कस्टम प्रक्रियाओं तक सीमित नहीं है — यह भारत की व्यापक अफ्रीका-नीति का हिस्सा है, जिसमें डिजिटल और हरित अर्थव्यवस्था को केंद्र में रखा जा रहा है। अगला कदम इस MoU के अंतर्गत डेटा-साझाकरण प्रणाली को क्रियाशील बनाना होगा।