17 अगस्त 2026
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भारत-थाईलैंड संयुक्त सैन्य अभ्यास 'मैत्री' का 15वाँ संस्करण, 85-85 जवान सूरतथानी में करेंगे जंगल युद्धाभ्यास

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भारत-थाईलैंड संयुक्त सैन्य अभ्यास 'मैत्री' का 15वाँ संस्करण, 85-85 जवान सूरतथानी में करेंगे जंगल युद्धाभ्यास

सारांश

भारत-थाईलैंड के बीच 2006 से चला आ रहा 'मैत्री' अभ्यास अपने 15वें संस्करण में पहुँच गया है। 85-85 जवानों के साथ सूरतथानी में होने वाला यह युद्धाभ्यास 'एक्ट ईस्ट' नीति की ज़मीनी अभिव्यक्ति है — जंगल और शहरी आतंकवाद-रोधी प्रशिक्षण के ज़रिए दोनों देशों की सेनाएँ अपनी संयुक्त क्षमता को नई धार दे रही हैं।

मुख्य बातें

भारतीय सेना की टुकड़ी 17 अगस्त 2026 को थाईलैंड रवाना हुई; अभ्यास 18-31 अगस्त तक चलेगा।
अभ्यास स्थल: सूरतथानी का विभावादी रंगसिट कैंप ; यह 'मैत्री' का 15वाँ संस्करण है।
दोनों देशों के 85-85 जवान शामिल; भारत से 9 गोरखा राइफल्स , थाईलैंड से 25वीं इन्फैंट्री ब्रिगेड की तीसरी बटालियन ।
अभ्यास का फोकस जंगल व अर्ध-शहरी क्षेत्रों में उग्रवाद और आतंकवाद-रोधी संयुक्त अभियान।
पिछला संस्करण सितंबर 2025 में मेघालय के उमरोई में हुआ था; 'मैत्री' की शुरुआत 2006 में हुई थी।

भारतीय सेना की एक टुकड़ी सोमवार, 17 अगस्त 2026 को थाईलैंड के लिए रवाना हुई, जहाँ 18 से 31 अगस्त तक सूरतथानी स्थित विभावादी रंगसिट कैंप में भारत-थाईलैंड संयुक्त सैन्य अभ्यास 'मैत्री' का 15वाँ संस्करण आयोजित किया जाएगा। इस अभ्यास में दोनों देशों के 85-85 जवान जंगल और अर्ध-शहरी इलाकों में संयुक्त अभियानों का प्रशिक्षण लेंगे।

किन टुकड़ियों की होगी भागीदारी

भारतीय सेना की टुकड़ी में मुख्य रूप से 9 गोरखा राइफल्स के सैनिक शामिल हैं। थाई पक्ष से 5वीं डिवीजन की 25वीं इन्फैंट्री ब्रिगेड की तीसरी बटालियन के जवान इस अभ्यास में हिस्सा लेंगे। दोनों देशों की सेनाएँ कंपनी स्तर पर संयुक्त प्रशिक्षण करेंगी।

गौरतलब है कि इस अभ्यास का पिछला — यानी 14वाँ — संस्करण सितंबर 2025 में मेघालय के उमरोई में आयोजित हुआ था। दोनों देश बारी-बारी से इस अभ्यास की मेज़बानी करते हैं।

अभ्यास में क्या-क्या होगा

भारतीय सेना के अनुसार, इस प्रशिक्षण में क्षेत्र अभ्यास, युद्ध-संबंधी चर्चाएँ, व्याख्यान, प्रदर्शन और समापन सत्यापन अभ्यास शामिल होंगे। इसके अलावा दोनों देशों की टुकड़ियाँ अपने-अपने ऑपरेशनल अनुभव साझा करेंगी और संयुक्त अभियानों में उपयोग होने वाले आधुनिक उपकरणों एवं प्रौद्योगिकियों का प्रदर्शन भी किया जाएगा।

अभ्यास का केंद्रीय उद्देश्य संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अध्याय सात के अंतर्गत जंगल और शहरी वातावरण में उग्रवाद तथा आतंकवाद से निपटने की संयुक्त क्षमता को मज़बूत करना है।

मैत्री अभ्यास का इतिहास और महत्त्व

मैत्री अभ्यास की शुरुआत वर्ष 2006 में हुई थी और तब से यह भारत-थाईलैंड द्विपक्षीय रक्षा सहयोग का एक स्थायी स्तंभ बन चुका है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत अपनी 'एक्ट ईस्ट' नीति के तहत दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के साथ सैन्य और कूटनीतिक संबंधों को लगातार गहरा कर रहा है।

सेना के मुताबिक, यह अभ्यास दोनों सेनाओं के बीच अंतर-संचालन क्षमता, आपसी समझ और सद्भावना को बढ़ाता है — जो दीर्घकालिक द्विपक्षीय संबंधों की नींव को और सुदृढ़ करता है।

आगे क्या

अभ्यास 31 अगस्त 2026 को समापन सत्यापन अभ्यास के साथ संपन्न होगा। इस संस्करण के अनुभव और सीख अगले संस्करण की रूपरेखा तय करने में काम आएँगे, जो भारत में आयोजित होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जंगल और अर्ध-शहरी युद्धाभ्यास की यह साझेदारी तब और अधिक प्रासंगिक हो जाती है जब म्यांमार की अस्थिरता दोनों देशों की सीमाओं पर दबाव बना रही है — एक संदर्भ जो आधिकारिक बयानों में अनुपस्थित रहता है, लेकिन रणनीतिक हलकों में चर्चा का विषय है।
RashtraPress
17 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत-थाईलैंड 'मैत्री' सैन्य अभ्यास 2026 कब और कहाँ होगा?
यह अभ्यास 18 से 31 अगस्त 2026 तक थाईलैंड के सूरतथानी स्थित विभावादी रंगसिट कैंप में आयोजित किया जाएगा। भारतीय सेना की टुकड़ी 17 अगस्त को रवाना हुई।
'मैत्री' अभ्यास का यह कौन-सा संस्करण है और इसकी शुरुआत कब हुई थी?
यह 'मैत्री' अभ्यास का 15वाँ संस्करण है। इस द्विपक्षीय सैन्य अभ्यास की शुरुआत वर्ष 2006 में हुई थी और तब से यह नियमित रूप से आयोजित होता आ रहा है।
इस अभ्यास में किन सैन्य टुकड़ियों की भागीदारी है?
भारत की ओर से मुख्य रूप से 9 गोरखा राइफल्स के 85 जवान शामिल हैं, जबकि थाईलैंड की ओर से 5वीं डिवीजन की 25वीं इन्फैंट्री ब्रिगेड की तीसरी बटालियन के 85 जवान भाग लेंगे।
'मैत्री' अभ्यास का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इस अभ्यास का उद्देश्य जंगल और अर्ध-शहरी वातावरण में उग्रवाद तथा आतंकवाद से निपटने की संयुक्त क्षमता को मज़बूत करना है। यह संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अध्याय सात के तहत संयुक्त अभियानों की तैयारी पर केंद्रित है।
पिछला 'मैत्री' अभ्यास कहाँ हुआ था?
14वाँ संस्करण सितंबर 2025 में मेघालय के उमरोई में आयोजित किया गया था। दोनों देश बारी-बारी से इस अभ्यास की मेज़बानी करते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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