6 नवंबर 2026
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बीएचईएल का मुनाफा ₹3,000 करोड़ तक ले जाने का लक्ष्य, एचएमटी फैक्टरी पुनर्जीवन पर भी जल्द फैसला: कुमारस्वामी

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बीएचईएल का मुनाफा ₹3,000 करोड़ तक ले जाने का लक्ष्य, एचएमटी फैक्टरी पुनर्जीवन पर भी जल्द फैसला: कुमारस्वामी

सारांश

बीएचईएल का मुनाफा ₹200 करोड़ से ₹1,500 करोड़ तक पहुँचा — और अब लक्ष्य है ₹3,000 करोड़। केंद्रीय मंत्री कुमारस्वामी ने कर्नाटक राज्योत्सव पर एचएमटी फैक्टरी पुनर्जीवन का भी भरोसा दिलाया। PSU टर्नअराउंड की यह कहानी नीतिगत दिशा की झलक देती है।

मुख्य बातें

केंद्रीय मंत्री एच.डी.
कुमारस्वामी ने 6 नवंबर 2026 को बेंगलुरु में कहा कि बीएचईएल का मुनाफा चालू वित्त वर्ष में ₹1,500 करोड़ से अधिक हो गया है।
बीएचईएल ने ₹3,000 करोड़ का मुनाफा हासिल करने का लक्ष्य निर्धारित किया है; वर्तमान में 24,000 कर्मचारी कार्यरत, आने वाले वर्षों में संख्या दोगुनी करने की योजना।
एचएमटी कन्नड़ सीरीज की चार घड़ियाँ 1 नवंबर 2026 को बेंगलुरु में लॉन्च की गईं; बाज़ार में उत्साहजनक प्रतिक्रिया।
नीति आयोग सदस्य वी.के.
सारस्वत की अध्यक्षता वाली समिति की एचएमटी पुनर्जीवन सिफारिशें सरकार को मिल चुकी हैं।
PM मोदी ने एचएमटी फैक्टरी पुनर्जीवन के संबंध में महत्वपूर्ण सुझाव एवं निर्देश दिए हैं; जल्द अंतिम निर्णय की उम्मीद।

केंद्रीय भारी उद्योग एवं इस्पात मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी ने 6 नवंबर 2026 को बेंगलुरु में घोषणा की कि भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (बीएचईएल) ने चालू वित्त वर्ष में ₹1,500 करोड़ से अधिक का मुनाफा दर्ज किया है और अब ₹3,000 करोड़ के मुनाफे का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। साथ ही उन्होंने कर्नाटक में बंद पड़ी हिंदुस्तान मशीन टूल्स (एचएमटी) फैक्टरी को शीघ्र पुनर्जीवित करने का आश्वासन दिया।

मुख्य घटनाक्रम

कुमारस्वामी बेंगलुरु के विजयनगर स्थित बीएचईएल परिसर में बीएचईएल कन्नड़ संरक्षण समिति द्वारा आयोजित 71वें कर्नाटक राज्योत्सव समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि जब उन्होंने भारी उद्योग मंत्रालय का कार्यभार संभाला था, उस समय बीएचईएल का मुनाफा मात्र ₹200 करोड़ था, जो अब ₹1,500 करोड़ से ऊपर पहुँच चुका है।

उन्होंने कहा, "200 करोड़ रुपये के मुनाफे से बीएचईएल अब 1,500 करोड़ रुपये से अधिक के मुनाफे तक पहुंच गई है। हम 3,000 करोड़ रुपये का मुनाफा हासिल करने की दिशा में काम कर रहे हैं। मैं इस उपलब्धि का श्रेय खुद को नहीं, बल्कि कड़ी मेहनत करने वाले कर्मचारियों को देना चाहता हूं।"

बीएचईएल की स्थिति और कर्मचारी विस्तार

वर्तमान में बीएचईएल में लगभग 24,000 कर्मचारी कार्यरत हैं। कुमारस्वामी ने कहा कि आने वाले वर्षों में कर्मचारियों की संख्या दोगुनी होनी चाहिए। उन्होंने यह भी बताया कि बीएचईएल में कन्नड़ भाषी कर्मचारियों को महत्वपूर्ण पदों पर अवसर मिले हैं और वे नीति निर्माण तथा प्रशासन में अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं।

यह ऐसे समय में आया है जब सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों (PSUs) पर निजीकरण के दबाव को लेकर बहस जारी है। बीएचईएल की वित्तीय सुधार की यह कहानी उन PSUs के लिए एक संदर्भ बिंदु बन सकती है जो अभी भी घाटे में हैं।

एचएमटी पुनर्जीवन की योजना

एचएमटी के पुनर्जीवन पर मंत्री ने बताया कि 1 नवंबर 2026 को कर्नाटक राज्योत्सव के अवसर पर बेंगलुरु में एचएमटी कन्नड़ सीरीज की चार घड़ियाँ लॉन्च की गईं। इससे पहले कर्नाटक के प्रतीक गंडभेरुंड को दर्शाने वाली एचएमटी घड़ियाँ भी बाज़ार में उतारी जा चुकी हैं। कुमारस्वामी के अनुसार, इन घड़ियों को कन्नड़ समुदाय से उत्साहजनक प्रतिक्रिया मिली है और युवा इन्हें खरीदने के लिए कई किलोमीटर लंबी कतारों में खड़े हो रहे हैं।

एचएमटी फैक्टरी को पुनः चालू करने के लिए नीति आयोग के सदस्य वी.के. सारस्वत की अध्यक्षता में एक समिति गठित की गई थी, जिसकी सिफारिशें सरकार को प्राप्त हो चुकी हैं। कुमारस्वामी ने कहा कि फैक्टरी को पुनर्जीवित करने पर जल्द से जल्द निर्णय लिया जाएगा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस संबंध में कई महत्वपूर्ण सुझाव एवं निर्देश दिए हैं।

सरकार की प्राथमिकता और PSU दृष्टिकोण

कुमारस्वामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार के सार्वजनिक क्षेत्र के उद्योगों की प्रगति उत्साहजनक रही है। बीएचईएल उन रणनीतिक विनिर्माण प्रतिष्ठानों में शामिल है जिन्होंने उल्लेखनीय प्रगति की है। गौरतलब है कि बीएचईएल एक समय गिरावट की ओर बढ़ रही थी, लेकिन सुधारात्मक कदमों ने स्थिति को संभाला।

कार्यक्रम में पद्मश्री सम्मानित विजयलक्ष्मी देशमाने, लेखक एवं प्रस्तोता एन.ए. सोमेश्वर, राहुल देवराज और बीएचईएल कन्नड़ संरक्षण समिति के मानद अध्यक्ष सा. रा. गोविंदु सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

आगे क्या

बीएचईएल के ₹3,000 करोड़ के मुनाफे के लक्ष्य और एचएमटी फैक्टरी पुनर्जीवन पर आने वाले महीनों में ठोस निर्णयों की प्रतीक्षा है। नीति आयोग समिति की सिफारिशें मिल चुकी हैं, अब केंद्र सरकार के अंतिम निर्णय पर सभी की नज़रें टिकी हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

500 करोड़ तक का सफर वाकई उल्लेखनीय है, लेकिन ₹3,000 करोड़ का अगला पड़ाव उतना सरल नहीं होगा — इसके लिए ऑर्डर बुक की गुणवत्ता, नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में प्रतिस्पर्धात्मकता और मैनपावर दक्षता सभी को एक साथ साधना होगा। एचएमटी के मामले में 'जल्द फैसला' वाला वादा नया नहीं है — यह फैक्टरी वर्षों से पुनर्जीवन की प्रतीक्षा में है और नीति आयोग समिति की सिफारिशें मिलने के बाद भी निर्णय की समयसीमा स्पष्ट नहीं की गई। घड़ियों की माँग एक सकारात्मक संकेत है, परंतु उत्पाद विविधता और विनिर्माण क्षमता के बिना यह भावनात्मक लहर दीर्घकालिक पुनरुद्धार में नहीं बदलेगी।
RashtraPress
6 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बीएचईएल का ₹3,000 करोड़ मुनाफे का लक्ष्य क्या है?
केंद्रीय भारी उद्योग मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी ने 6 नवंबर 2026 को बताया कि बीएचईएल का मुनाफा चालू वित्त वर्ष में ₹1,500 करोड़ से अधिक हो गया है और कंपनी ने अगले चरण में ₹3,000 करोड़ का लक्ष्य निर्धारित किया है। यह उस स्तर से सात गुना अधिक है जब कुमारस्वामी ने मंत्रालय का कार्यभार संभाला था।
एचएमटी फैक्टरी को कब तक पुनर्जीवित किया जाएगा?
कुमारस्वामी ने कहा कि नीति आयोग सदस्य वी.के. सारस्वत की अध्यक्षता में गठित समिति की सिफारिशें मिल चुकी हैं और जल्द से जल्द फैसला लिया जाएगा। हालांकि उन्होंने कोई निश्चित तिथि नहीं बताई।
एचएमटी कन्नड़ सीरीज की घड़ियाँ क्या हैं?
1 नवंबर 2026 को कर्नाटक राज्योत्सव के अवसर पर बेंगलुरु में एचएमटी की कन्नड़ सीरीज की चार घड़ियाँ लॉन्च की गईं। इससे पहले कर्नाटक के प्रतीक गंडभेरुंड को दर्शाने वाली घड़ियाँ भी जारी की जा चुकी हैं, जिन्हें लोगों से उत्साहजनक प्रतिक्रिया मिली है।
बीएचईएल में अभी कितने कर्मचारी हैं और भविष्य में क्या योजना है?
वर्तमान में बीएचईएल के बेंगलुरु परिसर में लगभग 24,000 कर्मचारी कार्यरत हैं। कुमारस्वामी के अनुसार आने वाले वर्षों में कर्मचारियों की संख्या दोगुनी होनी चाहिए।
71वां कर्नाटक राज्योत्सव समारोह बीएचईएल में क्यों मनाया गया?
बीएचईएल कन्नड़ संरक्षण समिति ने बेंगलुरु के विजयनगर स्थित बीएचईएल परिसर में 71वां कर्नाटक राज्योत्सव समारोह आयोजित किया। कुमारस्वामी ने इसे केंद्रीय सार्वजनिक प्रतिष्ठानों और कर्नाटक की सांस्कृतिक विरासत के बीच गहरे जुड़ाव का प्रतीक बताया।
राष्ट्र प्रेस
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