6 जुलाई 2026
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एचएमटी पुनरुद्धार पैकेज में कर्नाटक सरकार डाल रही बाधा, कुमारस्वामी का गंभीर आरोप

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एचएमटी पुनरुद्धार पैकेज में कर्नाटक सरकार डाल रही बाधा, कुमारस्वामी का गंभीर आरोप

सारांश

एचएमटी के लिए विशेष पुनरुद्धार पैकेज की घोषणा होने ही वाली थी कि कर्नाटक के वन विभाग ने 430 एकड़ जमीन वापस माँगने का नोटिस थमा दिया। केंद्रीय मंत्री कुमारस्वामी ने इसे दुर्भावनापूर्ण साजिश बताते हुए ₹15,000 करोड़ मूल्य की संपत्ति पर नजर का आरोप लगाया — और अगले सप्ताह निर्णायक बैठक का ऐलान किया।

मुख्य बातें

केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी ने 6 जुलाई को बेंगलुरु में आपात प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कर्नाटक सरकार पर एचएमटी पुनरुद्धार में जानबूझकर बाधा डालने का आरोप लगाया।
बेंगलुरु शहरी क्षेत्र के उप वन संरक्षक एन.
रविंद्र कुमार ने एचएमटी को 430 एकड़ भूमि तत्काल वन विभाग को सौंपने का आदेश दिया है।
कुमारस्वामी के अनुसार, संबंधित अधिकारी ने स्वयं इस भूमि की कीमत लगभग ₹15,000 करोड़ आंकी है।
मंत्री ने दावा किया कि पहले ही एचएमटी की 175 एकड़ जमीन बेची जा चुकी है और उनके पास दस्तावेजी प्रमाण हैं।
एचएमटी के लिए प्रस्तावित विशेष पुनरुद्धार पैकेज पर अगले सप्ताह बैठक होने वाली है।
एचएमटी इस वन विभाग के आदेश को अदालत में चुनौती देगी, क्योंकि मामला पहले से न्यायालय में लंबित है।

केंद्रीय भारी उद्योग एवं इस्पात मंत्री एचडी कुमारस्वामी ने सोमवार, 6 जुलाई को बेंगलुरु में आयोजित एक आपात प्रेस कॉन्फ्रेंस में कर्नाटक की राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि जब हिंदुस्तान मशीन टूल्स (एचएमटी) के लिए एक विशेष पुनरुद्धार पैकेज अपने अंतिम चरण में था, ठीक उसी समय राज्य के वन विभाग ने एचएमटी को 430 एकड़ भूमि वापस करने का नोटिस जारी कर दिया। कुमारस्वामी ने इस कदम को 'दुर्भावनापूर्ण' और 'न्यायिक प्रक्रिया में सीधा हस्तक्षेप' करार दिया।

विवाद की जड़: वन विभाग का नोटिस

रिपोर्टों के अनुसार, बेंगलुरु शहरी क्षेत्र के उप वन संरक्षक एन. रविंद्र कुमार ने एचएमटी को आदेश दिया कि वह 430 एकड़ भूमि तत्काल वन विभाग को सौंपे, क्योंकि इसे वन भूमि के रूप में वर्गीकृत किया गया है। कुमारस्वामी ने इस आदेश की वैधता पर सवाल उठाते हुए कहा, "यह मामला अदालत में लंबित है। ऐसे संवेदनशील समय में राज्य सरकार ने वन विभाग के माध्यम से नोटिस जारी कर समय सीमा तय कर दी है। यह न्यायिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप है और कानून के खिलाफ है।" उन्होंने यह भी कहा कि संबंधित अधिकारी के पास इस प्रकार का आदेश जारी करने का अधिकार ही नहीं है और एचएमटी इस आदेश को अदालत में चुनौती देगी।

भूमि की कीमत और संपत्ति पर नजर का आरोप

कुमारस्वामी ने आरोप लगाया कि संबंधित अधिकारी ने स्वयं इस भूमि की कीमत लगभग ₹15,000 करोड़ आंकी है। उन्होंने कहा कि इससे संदेह उत्पन्न होता है कि किसी की नजर इस बहुमूल्य संपत्ति पर है। उन्होंने यह भी दावा किया कि इस सरकार के संरक्षण में पहले ही एचएमटी की 175 एकड़ जमीन बेची जा चुकी है और उनके पास उन सौदों के दस्तावेज मौजूद हैं। उनके अनुसार, जिस भूमि पर अतिक्रमण हुआ, वहाँ आज बहुमंजिला इमारतें और बड़े अपार्टमेंट परिसर खड़े हैं। उन्होंने यह भी जोड़ा कि एचएमटी की जमीन की यह लूट 2006 तक जारी रही, जब तक वे स्वयं मुख्यमंत्री नहीं बने और उन्होंने इस पर रोक लगाई।

पुनरुद्धार पैकेज की स्थिति

कुमारस्वामी ने बताया कि वे लंबे समय से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय वित्त मंत्री को एचएमटी के लिए एक विशेष पुनरुद्धार पैकेज मंजूर करने के लिए मनाने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा, "विशेष पैकेज की घोषणा होने ही वाली थी। बेंगलुरु की शान रही इस फैक्ट्री को नई जिंदगी देने का फैसला करीब था।" उन्होंने सूचित किया कि अगले सप्ताह इस प्रस्तावित पैकेज पर एक महत्वपूर्ण बैठक होने वाली है और कंपनी को पुनर्जीवित करने का निर्णय शीघ्र लिया जा सकता है।

एचएमटी की विरासत और वर्तमान स्थिति

गौरतलब है कि एचएमटी कभी भारत की सबसे प्रतिष्ठित और लाभदायक सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों में शुमार थी। आज भी यह अंतरिक्ष, रक्षा और अनुसंधान जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों के लिए मशीनें बनाती है और विदेशों में इसकी मशीनों की मांग बनी हुई है। एचएमटी घड़ियों की लोकप्रियता भी अभी तक बरकरार है। कुमारस्वामी ने एचएमटी कर्मचारियों को आश्वस्त किया कि उन्हें राज्य सरकार की इस कार्रवाई से घबराने की आवश्यकता नहीं है।

राज्य सरकार पर व्यापक आरोप

केंद्रीय मंत्री ने कर्नाटक सरकार पर शासन चलाने के बजाय रियल एस्टेट कारोबार में लगे होने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, "जहां भी जमीन दिखती है, सरकार उसे घेरने में लग जाती है।" उन्होंने यह भी कहा कि राज्य में एनजीएफ, मैसूर पेपर मिल्स सहित कई अन्य उद्योग पहले ही बंद हो चुके हैं और ऐसा प्रतीत होता है कि राज्य सरकार नहीं चाहती कि कर्नाटक में कोई सरकारी उद्योग या फैक्ट्री बची रहे। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि राज्य सरकार ऐसा माहौल बनाएगी तो कर्नाटक में नए उद्योग आना बंद हो जाएंगे। आने वाले दिनों में कुमारस्वामी ने संबंधित वन अधिकारी की पृष्ठभूमि और इस कदम के पीछे के लोगों की जानकारी सार्वजनिक करने का भी संकल्प जताया।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इनकी जाँच ज़रूरी है — वन विभाग के नोटिस की कानूनी वैधता और न्यायालय में लंबित मामले की वास्तविक स्थिति दोनों पक्षों से स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं हुई है। यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र-राज्य संबंध पहले से ही तनावपूर्ण हैं और एचएमटी जैसे सार्वजनिक उद्यमों का भविष्य राजनीतिक खींचतान का शिकार बन रहा है। ₹15,000 करोड़ की भूमि पर दावे और पुनरुद्धार पैकेज की 'अंतिम चरण' वाली कहानी दोनों ही अभी सरकारी पुष्टि की प्रतीक्षा में हैं। असली सवाल यह है कि क्या एचएमटी का पुनरुद्धार वास्तव में व्यावसायिक व्यवहार्यता पर टिका है, या यह केंद्र-राज्य की राजनीतिक लड़ाई का नया मोर्चा बन गया है।
RashtraPress
6 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एचएमटी पुनरुद्धार विवाद क्या है?
केंद्रीय मंत्री कुमारस्वामी एचएमटी के लिए एक विशेष पुनरुद्धार पैकेज की तैयारी कर रहे थे, लेकिन ठीक उसी समय कर्नाटक के वन विभाग ने एचएमटी को 430 एकड़ भूमि वापस करने का नोटिस जारी कर दिया। कुमारस्वामी ने इसे दुर्भावनापूर्ण कार्रवाई बताते हुए न्यायिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप का आरोप लगाया है।
एचएमटी की विवादित भूमि कितनी है और उसकी कीमत क्या है?
वन विभाग ने एचएमटी को 430 एकड़ भूमि वापस करने का आदेश दिया है। कुमारस्वामी के अनुसार, संबंधित अधिकारी ने स्वयं इस भूमि की कीमत लगभग ₹15,000 करोड़ आंकी है, जिससे संपत्ति पर किसी की नजर होने का संदेह उत्पन्न होता है।
एचएमटी के लिए प्रस्तावित पुनरुद्धार पैकेज कब आएगा?
कुमारस्वामी के अनुसार, इस प्रस्तावित विशेष पैकेज पर अगले सप्ताह एक महत्वपूर्ण बैठक होने वाली है और कंपनी को पुनर्जीवित करने का निर्णय शीघ्र लिया जा सकता है। हालांकि पैकेज की राशि और विस्तृत विवरण अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है।
एचएमटी आज क्या काम करती है?
घाटे और अनिश्चितता के बावजूद एचएमटी आज भी अंतरिक्ष, रक्षा और अनुसंधान क्षेत्रों के लिए मशीनें बनाती है। विदेशों में इसकी मशीनों की माँग बनी हुई है और एचएमटी घड़ियों की लोकप्रियता भी बरकरार है।
कर्नाटक सरकार पर क्या आरोप लगाए गए हैं?
कुमारस्वामी ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार के संरक्षण में पहले ही एचएमटी की 175 एकड़ जमीन बेची जा चुकी है और अब ₹15,000 करोड़ मूल्य की 430 एकड़ भूमि पर नजर है। उन्होंने यह भी कहा कि एनजीएफ और मैसूर पेपर मिल्स जैसे कई उद्योग पहले ही बंद हो चुके हैं और राज्य सरकार औद्योगिक विकास के बजाय रियल एस्टेट कारोबार में अधिक रुचि रखती है।
राष्ट्र प्रेस
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