BHEL Q4FY26 नतीजे: शुद्ध मुनाफा 156% उछलकर ₹1,290 करोड़, राजस्व 37% बढ़ा
सारांश
मुख्य बातें
महारत्न सरकारी इंजीनियरिंग कंपनी भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (BHEL) ने सोमवार, 4 मई 2026 को वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही (जनवरी–मार्च) के नतीजे जारी किए, जिनमें कर के बाद शुद्ध मुनाफा (PAT) साल-दर-साल आधार पर 156 प्रतिशत उछलकर ₹1,290 करोड़ पर पहुँच गया। पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में यह आँकड़ा ₹504.45 करोड़ था। पावर सेक्टर की जोरदार ग्रोथ इस शानदार प्रदर्शन की मुख्य चालक रही।
तिमाही राजस्व और संचालन आय
एक्सचेंज फाइलिंग के अनुसार, Q4FY26 में कंपनी की परिचालन से होने वाली आय (रेवेन्यू) 37 प्रतिशत बढ़कर ₹12,310 करोड़ हो गई, जो पिछले वर्ष की समान तिमाही में ₹8,993 करोड़ थी। यह वृद्धि दर्शाती है कि कंपनी की ऑर्डर बुक का क्रियान्वयन तेज़ी से हो रहा है।
पावर सेगमेंट का दबदबा
सेगमेंट-वार प्रदर्शन में पावर बिजनेस कंपनी का मुख्य आधार बना रहा। इस सेगमेंट से आय 53.6 प्रतिशत उछलकर ₹9,509.85 करोड़ हो गई, जो पिछले साल इसी तिमाही में ₹6,192.41 करोड़ थी। यह ऐसे समय में आया है जब भारत सरकार थर्मल और नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता विस्तार पर भारी निवेश कर रही है, जिससे BHEL जैसी कंपनियों को सीधा लाभ मिल रहा है।
पूरे वित्त वर्ष 2025-26 का प्रदर्शन
वार्षिक आधार पर देखें तो वित्त वर्ष 2025-26 में BHEL का समेकित शुद्ध मुनाफा ₹1,600.26 करोड़ रहा, जो पिछले वित्त वर्ष के ₹533.90 करोड़ के मुकाबले लगभग 200 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्शाता है। कंपनी की कुल वार्षिक आय ₹34,589.83 करोड़ रही, जो वित्त वर्ष 2025 के ₹28,804.79 करोड़ की तुलना में करीब 20 प्रतिशत अधिक है। गौरतलब है कि पावर सेगमेंट ने सालाना आधार पर भी 21 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की, जिसकी आय ₹20,937.25 करोड़ से बढ़कर ₹25,406.71 करोड़ हो गई।
डिविडेंड और शेयर बाज़ार प्रतिक्रिया
नतीजों के साथ ही कंपनी के बोर्ड ने 31 मार्च 2026 को समाप्त वित्त वर्ष के लिए ₹2 के फेस वैल्यू वाले प्रत्येक इक्विटी शेयर पर ₹1.40 का अंतिम डिविडेंड देने की मंजूरी दी है। बाज़ार में इन नतीजों का उत्साहजनक स्वागत हुआ — सोमवार को नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर BHEL का शेयर करीब 7 प्रतिशत की तेजी के साथ ₹377.05 पर बंद हुआ। कंपनी का 52-हफ्ते का उच्चतम स्तर ₹399 और निम्नतम स्तर ₹205.12 है, जबकि मौजूदा मार्केट कैप ₹1.32 लाख करोड़ है। आने वाली तिमाहियों में ऊर्जा क्षेत्र में सरकारी खर्च की रफ्तार और BHEL की ऑर्डर बुक की स्थिति यह तय करेगी कि यह उछाल टिकाऊ है या नहीं।