एनएचएआई की बड़ी जीत: बरेली-सीतापुर टोल परियोजना में ₹3,177 करोड़ के दावे के विरुद्ध मध्यस्थता में सफलता
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने बरेली-सीतापुर बीओटी (टोल) परियोजना से जुड़े एक अहम मध्यस्थता मामले में निर्णायक जीत दर्ज की है, जिसमें रियायतग्राही कंपनी ने कुल ₹3,177 करोड़ के दावे ठोके थे। तीन सदस्यीय मध्यस्थ न्यायाधिकरण ने इनमें से अधिकांश दावों को खारिज करते हुए केवल ₹46 करोड़ और लागू ब्याज के भुगतान का आदेश दिया — जो मूल दावे का महज डेढ़ प्रतिशत है। 27 जुलाई को जारी आधिकारिक बयान में एनएचएआई ने इसे सार्वजनिक धन की सुरक्षा और संविदात्मक अनुशासन की पुष्टि बताया।
मामले की पृष्ठभूमि
यह मध्यस्थता कार्यवाही बरेली हाइवेज प्रोजेक्ट लिमिटेड (बीएचपीएल) से संबंधित थी — जो मेसर्स एरा इंफ्रा इंजीनियरिंग लिमिटेड द्वारा प्रवर्तित एक रियायतकर्ता कंपनी थी। उत्तर प्रदेश में 151 किलोमीटर लंबी इस परियोजना का रियायत समझौता एनएचएआई ने मई 2019 में समाप्त कर दिया था। समझौते की समाप्ति के बाद रियायतग्राही ने न्यायाधिकरण के समक्ष कुल 30 दावे प्रस्तुत किए, जिनकी कुल राशि ₹3,177 करोड़ थी।
न्यायाधिकरण का फैसला
विस्तृत विचार-विमर्श के बाद तीन सदस्यीय न्यायाधिकरण ने 30 में से केवल तीन दावों को आंशिक रूप से स्वीकार किया और ₹46 करोड़ तथा लागू ब्याज के भुगतान का आदेश दिया। न्यायाधिकरण ने 30 मार्च 2015 के पूरक समझौते को बरकरार रखा और यह भी माना कि परियोजना में देरी समवर्ती थी — अर्थात इसके लिए एकमात्र रूप से एनएचएआई को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। एनएचएआई ने वित्तीय नुकसान और सार्वजनिक असुविधा से जुड़े प्रतिदावे भी दाखिल किए थे, जिन्हें न्यायाधिकरण ने स्वीकार नहीं किया।
हालिया मध्यस्थता जीतों की श्रृंखला
यह जीत एनएचएआई की हाल के महीनों में मिली कई महत्वपूर्ण कानूनी सफलताओं में नवीनतम है। जून 2026 में कर्नाटक की तुमकुर-चित्रदुर्ग 6-लेन परियोजना से जुड़े मामले में न्यायाधिकरण ने एनएचएआई के पक्ष में ₹1,202 करोड़ का फैसला सुनाया।
अप्रैल 2026 में पानीपत-जालंधर राजमार्ग परियोजना से संबंधित दो मध्यस्थता मामलों में ठेकेदार के ₹8,375 करोड़ के दावों और एनएचएआई के ₹2,888.64 करोड़ के प्रतिदावों को मिलाकर मामला एनएचएआई के पक्ष में ₹819.96 करोड़ में निपटाया गया। इसी प्रकार, मई 2026 में गुजरात के एनएच-48 के कामरेज-चलथान खंड से जुड़े मामले में ठेकेदार के ₹174.49 करोड़ के दावों को न्यायाधिकरण ने मात्र ₹54 लाख में निपटाया।
सार्वजनिक धन पर असर
गौरतलब है कि राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं में मध्यस्थता दावे अक्सर करदाताओं के धन पर भारी बोझ डालते हैं। इन मामलों में एनएचएआई की सफलता न केवल तत्काल वित्तीय राहत देती है, बल्कि यह संकेत भी देती है कि प्राधिकरण अपने संविदात्मक ढाँचे को और मज़बूती से लागू कर रहा है। बयान के अनुसार, यह राष्ट्रीय राजमार्ग अवसंरचना के विकास और प्रबंधन में पारदर्शिता और संविदात्मक अनुशासन बनाए रखने के एनएचएआई के संकल्प को रेखांकित करता है।
आगे की राह
इन फैसलों से एनएचएआई की कानूनी रणनीति और अनुबंध प्रबंधन की साख मज़बूत हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के स्पष्ट फैसले भविष्य में अनुचित दावों को हतोत्साहित कर सकते हैं और बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं में निजी भागीदारी के लिए अधिक जवाबदेह माहौल बना सकते हैं।