लखनऊ-कानपुर हाईवे उद्घाटन के दिनों में धंसा, अजय राय ने राज्यपाल से ₹4,200 करोड़ की जांच माँगी
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष अजय राय ने मंगलवार, 11 अगस्त को राज्यपाल को पत्र लिखकर लखनऊ-कानपुर राष्ट्रीय राजमार्ग की निर्माण गुणवत्ता की स्वतंत्र तकनीकी जांच कराने की माँग की। कांग्रेस के अनुसार, करीब ₹4,200 करोड़ की लागत से तैयार यह राजमार्ग उद्घाटन के कुछ ही दिनों बाद जगह-जगह से धंसने लगा और उस पर बड़े गड्ढे बन गए।
मुख्य घटनाक्रम
13 जुलाई को बड़े स्तर पर उद्घाटन किए गए इस राजमार्ग पर महज दो दिन बाद एक गंभीर दुर्घटना में एक बाइक सवार की मौत हो गई। अजय राय के अनुसार, सड़क के कई हिस्सों में धंसाव, बड़े गड्ढे, जल निकासी की विफलता तथा पुलों और क्रैश बैरियर में दरार जैसी शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि मरम्मत के बाद सड़क दोबारा क्षतिग्रस्त हो गई।
राजस्व नुकसान और टोल विवाद
कांग्रेस अध्यक्ष के अनुसार, सड़क की बदहाल स्थिति के चलते भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) को मरम्मत पूरी होने तक टोल वसूली रोकनी पड़ी, जिससे कथित तौर पर करीब ₹575 करोड़ के राजस्व का नुकसान हुआ। अजय राय ने सवाल उठाया कि हजारों करोड़ रुपये खर्च होने के बावजूद इतने कम समय में सड़क की यह हालत क्यों हुई — और यह केवल निर्माण की गुणवत्ता का नहीं, बल्कि सार्वजनिक धन की निगरानी का गंभीर प्रश्न है।
राजनीतिक आरोप और निर्माण एजेंसी पर सवाल
अजय राय ने यह भी आरोप लगाया कि निर्माण करने वाली कंपनी के संबंध भारतीय जनता पार्टी (BJP) के एक राज्यसभा सांसद के परिवार से जुड़े हैं और इसी कारण उसे बचाने की कोशिश की जा रही है। हालाँकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और कांग्रेस ने इन्हें जांच की माँग के आधार के रूप में प्रस्तुत किया है। यह ऐसे समय में आया है जब राज्यपाल ने हाल ही में गोरखपुर में जनसुविधाओं और प्रशासन से जुड़े मुद्दों पर सार्वजनिक रूप से चिंता व्यक्त की थी।
कांग्रेस की माँगें
अजय राय ने राज्यपाल से अनुरोध किया है कि वह इस मामले को प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के समक्ष उठाएं। कांग्रेस ने चार प्रमुख माँगें रखी हैं — स्वतंत्र तकनीकी जांच, निर्माण गुणवत्ता की पड़ताल, सार्वजनिक धन के उपयोग की समीक्षा, और संबंधित अधिकारियों, मंत्रालय तथा निर्माण एजेंसी की जवाबदेही तय करना। गौरतलब है कि यह परियोजना केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय और NHAI के दायरे में आती है।
आगे क्या होगा
अजय राय ने स्पष्ट किया कि यह मामला किसी एक सड़क की खराब स्थिति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सार्वजनिक धन, निर्माण गुणवत्ता और सरकारी जवाबदेही से जुड़ा व्यापक जनहित का मुद्दा है। राज्यपाल की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यदि स्वतंत्र जांच के आदेश दिए जाते हैं तो NHAI और निर्माण एजेंसी को अपनी कार्यप्रणाली का हिसाब देना होगा।