11 अगस्त 2026
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लखनऊ-कानपुर हाईवे उद्घाटन के दिनों में धंसा, अजय राय ने राज्यपाल से ₹4,200 करोड़ की जांच माँगी

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लखनऊ-कानपुर हाईवे उद्घाटन के दिनों में धंसा, अजय राय ने राज्यपाल से ₹4,200 करोड़ की जांच माँगी

सारांश

उद्घाटन के महज दो दिन बाद दुर्घटना और फिर धंसाव — ₹4,200 करोड़ की लखनऊ-कानपुर हाईवे परियोजना अब राजनीतिक जवाबदेही के केंद्र में है। कांग्रेस ने राज्यपाल से स्वतंत्र जांच और BJP सांसद परिवार से जुड़ी निर्माण एजेंसी की पड़ताल की माँग की है।

मुख्य बातें

अजय राय ने 11 अगस्त को राज्यपाल को पत्र लिखकर लखनऊ-कानपुर राष्ट्रीय राजमार्ग की स्वतंत्र तकनीकी जांच की माँग की।
₹4,200 करोड़ की लागत से बना यह राजमार्ग 13 जुलाई के उद्घाटन के कुछ दिनों बाद ही धंसने और गड्ढों की चपेट में आ गया।
उद्घाटन के दो दिन बाद एक गंभीर दुर्घटना में बाइक सवार की मौत हुई।
कथित तौर पर टोल वसूली रोकनी पड़ी, जिससे करीब ₹575 करोड़ के राजस्व नुकसान का दावा किया गया है।
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि निर्माण एजेंसी के संबंध BJP के एक राज्यसभा सांसद के परिवार से हैं — इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
अजय राय ने राज्यपाल से मामला प्रधानमंत्री और गृह मंत्री तक पहुँचाने का अनुरोध किया है।

उत्तर प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष अजय राय ने मंगलवार, 11 अगस्त को राज्यपाल को पत्र लिखकर लखनऊ-कानपुर राष्ट्रीय राजमार्ग की निर्माण गुणवत्ता की स्वतंत्र तकनीकी जांच कराने की माँग की। कांग्रेस के अनुसार, करीब ₹4,200 करोड़ की लागत से तैयार यह राजमार्ग उद्घाटन के कुछ ही दिनों बाद जगह-जगह से धंसने लगा और उस पर बड़े गड्ढे बन गए।

मुख्य घटनाक्रम

13 जुलाई को बड़े स्तर पर उद्घाटन किए गए इस राजमार्ग पर महज दो दिन बाद एक गंभीर दुर्घटना में एक बाइक सवार की मौत हो गई। अजय राय के अनुसार, सड़क के कई हिस्सों में धंसाव, बड़े गड्ढे, जल निकासी की विफलता तथा पुलों और क्रैश बैरियर में दरार जैसी शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि मरम्मत के बाद सड़क दोबारा क्षतिग्रस्त हो गई।

राजस्व नुकसान और टोल विवाद

कांग्रेस अध्यक्ष के अनुसार, सड़क की बदहाल स्थिति के चलते भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) को मरम्मत पूरी होने तक टोल वसूली रोकनी पड़ी, जिससे कथित तौर पर करीब ₹575 करोड़ के राजस्व का नुकसान हुआ। अजय राय ने सवाल उठाया कि हजारों करोड़ रुपये खर्च होने के बावजूद इतने कम समय में सड़क की यह हालत क्यों हुई — और यह केवल निर्माण की गुणवत्ता का नहीं, बल्कि सार्वजनिक धन की निगरानी का गंभीर प्रश्न है।

राजनीतिक आरोप और निर्माण एजेंसी पर सवाल

अजय राय ने यह भी आरोप लगाया कि निर्माण करने वाली कंपनी के संबंध भारतीय जनता पार्टी (BJP) के एक राज्यसभा सांसद के परिवार से जुड़े हैं और इसी कारण उसे बचाने की कोशिश की जा रही है। हालाँकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और कांग्रेस ने इन्हें जांच की माँग के आधार के रूप में प्रस्तुत किया है। यह ऐसे समय में आया है जब राज्यपाल ने हाल ही में गोरखपुर में जनसुविधाओं और प्रशासन से जुड़े मुद्दों पर सार्वजनिक रूप से चिंता व्यक्त की थी।

कांग्रेस की माँगें

अजय राय ने राज्यपाल से अनुरोध किया है कि वह इस मामले को प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के समक्ष उठाएं। कांग्रेस ने चार प्रमुख माँगें रखी हैं — स्वतंत्र तकनीकी जांच, निर्माण गुणवत्ता की पड़ताल, सार्वजनिक धन के उपयोग की समीक्षा, और संबंधित अधिकारियों, मंत्रालय तथा निर्माण एजेंसी की जवाबदेही तय करना। गौरतलब है कि यह परियोजना केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय और NHAI के दायरे में आती है।

आगे क्या होगा

अजय राय ने स्पष्ट किया कि यह मामला किसी एक सड़क की खराब स्थिति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सार्वजनिक धन, निर्माण गुणवत्ता और सरकारी जवाबदेही से जुड़ा व्यापक जनहित का मुद्दा है। राज्यपाल की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यदि स्वतंत्र जांच के आदेश दिए जाते हैं तो NHAI और निर्माण एजेंसी को अपनी कार्यप्रणाली का हिसाब देना होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

200 करोड़ की यह परियोजना उस बड़े पैटर्न की एक और कड़ी है जिसमें उद्घाटन की चमक और ज़मीनी हकीकत के बीच की खाई जल्दी उजागर हो जाती है। NHAI की परियोजनाओं में गुणवत्ता नियंत्रण और तीसरे पक्ष की ऑडिटिंग की कमज़ोरी कोई नई बात नहीं — लेकिन जब उद्घाटन के 48 घंटे के भीतर मौत हो और टोल बंद करना पड़े, तो यह प्रशासनिक विफलता की नहीं, संस्थागत जवाबदेही के संकट की निशानी है। BJP सांसद परिवार से जुड़े आरोप अभी कांग्रेस के दावे हैं — लेकिन स्वतंत्र जांच के बिना इन्हें खारिज करना भी उतना ही राजनीतिक होगा जितना इन्हें स्वीकार करना।
RashtraPress
11 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

लखनऊ-कानपुर राष्ट्रीय राजमार्ग में क्या खामियाँ सामने आई हैं?
कांग्रेस के अनुसार, 13 जुलाई के उद्घाटन के कुछ दिनों बाद ही सड़क के कई हिस्सों में धंसाव, बड़े गड्ढे, जल निकासी की विफलता और पुलों व क्रैश बैरियर में दरारें सामने आईं। मरम्मत के बाद भी सड़क दोबारा क्षतिग्रस्त होने की शिकायतें हैं।
अजय राय ने राज्यपाल को पत्र क्यों लिखा?
उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने 11 अगस्त को राज्यपाल को पत्र लिखकर ₹4,200 करोड़ की इस परियोजना की स्वतंत्र तकनीकी जांच और जवाबदेही तय करने की माँग की। उन्होंने राज्यपाल से यह मामला प्रधानमंत्री और गृह मंत्री तक पहुँचाने का भी अनुरोध किया।
NHAI को टोल वसूली क्यों रोकनी पड़ी?
कांग्रेस के दावे के अनुसार, सड़क की बदहाल स्थिति के कारण NHAI को मरम्मत पूरी होने तक टोल वसूली रोकनी पड़ी, जिससे कथित तौर पर करीब ₹575 करोड़ के राजस्व का नुकसान हुआ। NHAI की ओर से इस पर कोई आधिकारिक बयान अभी तक सामने नहीं आया है।
निर्माण एजेंसी पर क्या आरोप लगाए गए हैं?
अजय राय ने आरोप लगाया है कि निर्माण करने वाली कंपनी के संबंध BJP के एक राज्यसभा सांसद के परिवार से हैं और इसी कारण उसे बचाने की कोशिश की जा रही है। ये आरोप अभी कांग्रेस के दावे हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
इस मामले में आगे क्या हो सकता है?
राज्यपाल की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। यदि स्वतंत्र तकनीकी जांच के आदेश दिए जाते हैं तो NHAI , केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय और निर्माण एजेंसी को अपनी कार्यप्रणाली का हिसाब देना होगा।
राष्ट्र प्रेस
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