लखनऊ हादसा: अजय राय का आरोप — प्रशासनिक लापरवाही और भ्रष्टाचार ने ली बच्चों की जान
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने 23 जून को लखनऊ में हुए कोचिंग संस्थान हादसे को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने आरोप लगाया कि जिस भवन में यह दुर्घटना हुई, वह अवैध निर्माण की श्रेणी में था और उसे ध्वस्त करने का आदेश पहले ही जारी हो चुका था। उनके अनुसार, इस हादसे की जड़ें प्रशासनिक लापरवाही और भ्रष्टाचार में हैं।
हादसे की असली वजह क्या थी
अजय राय ने दावा किया कि इस दुर्घटना में जान गंवाने वाले बच्चों की मौत केवल आग की वजह से नहीं हुई। उनके अनुसार, भवन में लगे बायोमेट्रिक प्रवेश द्वार हादसे के दौरान बंद हो गए, जिससे अंदर फंसे लोग बाहर नहीं निकल सके। उन्होंने कहा, "दरवाजा नहीं खुला और इसी वजह से कई लोगों की जान चली गई।"
राय ने सवाल उठाया कि यदि भवन को गिराने का आदेश पहले से मौजूद था, तो समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की गई। उन्होंने इसे सरकारी तंत्र की घोर विफलता बताया।
सरकार और अधिकारियों पर जवाबदेही की माँग
अजय राय ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इस हादसे की जिम्मेदारी सीधे सरकार पर है। उन्होंने माँग की कि संबंधित सरकारी अधिकारियों के विरुद्ध हत्या का मुकदमा दर्ज कर उन्हें जेल भेजा जाए। उन्होंने यह भी कहा कि प्रदेश की राजधानी में इस तरह की घटना का होना बेहद गंभीर है और इसमें कठोर कार्रवाई अनिवार्य है।
उन्होंने यह भी कहा कि हादसे के बाद पूरे प्रदेश में कोचिंग संस्थानों की जांच शुरू करना दिखावे से ज़्यादा कुछ नहीं — असली सवाल यह है कि यह जांच पहले क्यों नहीं हुई।
अयोध्या दान कोष विवाद पर एसआईटी पर सवाल
अयोध्या दान कोष विवाद की जांच के लिए गठित एसआईटी को लेकर भी राय ने गंभीर आपत्ति जताई। उनका कहना था कि जब एसआईटी में पहले से ही 'दागदार' अधिकारी शामिल हैं और अब तक किसी के विरुद्ध एफआईआर तक दर्ज नहीं हुई, तो ऐसी जांच का कोई औचित्य नहीं। उन्होंने माँग की कि यदि सरकार वास्तव में पारदर्शी है, तो उसे हाईकोर्ट के किसी सिटिंग जज से इस पूरे मामले की जांच करानी चाहिए।
अन्य राज्यों में भ्रष्टाचार के आरोप
राय ने मध्य प्रदेश में नए हाईवे निर्माण क्षेत्रों में मुख्यमंत्री मोहन यादव के परिजनों द्वारा कथित तौर पर जमीन खरीदे जाने के आरोपों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि जहाँ-जहाँ भाजपा की सरकार है, वहाँ भ्रष्टाचार चरम पर है — चाहे वह उत्तर प्रदेश हो, मध्य प्रदेश हो या अन्य कोई राज्य।
उन्होंने बिहार में एक कथित फर्जी पुलिस मुठभेड़ का भी जिक्र किया, जिसमें आरोप है कि एक बच्चे को गोली मार दी गई। राय ने इसे भाजपा शासित राज्यों में कानून-व्यवस्था की बदहाली का प्रतीक बताया।
आगे क्या होगा
कांग्रेस के इन आरोपों के बाद राजनीतिक दबाव बढ़ने की संभावना है। अजय राय ने स्पष्ट किया कि जब तक दोषी अधिकारियों पर कठोर कानूनी कार्रवाई नहीं होती और जांच किसी स्वतंत्र न्यायिक अधिकारी को नहीं सौंपी जाती, तब तक जनता का भरोसा सरकार पर बहाल नहीं होगा।