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लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर दरारें: NHAI ने परियोजना निदेशक बर्खास्त किया, PNC इंफ्राटेक को कारण बताओ नोटिस

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लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर दरारें: NHAI ने परियोजना निदेशक बर्खास्त किया, PNC इंफ्राटेक को कारण बताओ नोटिस

सारांश

₹4,200 करोड़ की लागत से बना लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे उद्घाटन के कुछ हफ्तों में ही दरारों की चपेट में आ गया। NHAI ने परियोजना निदेशक बर्खास्त किया, टोल निलंबित किया और IIT खड़गपुर से स्वतंत्र जाँच कराने का फैसला किया — यह राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण गुणवत्ता पर बड़ा सवाल है।

मुख्य बातें

NHAI ने लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर दरारें पड़ने के बाद परियोजना निदेशक को बर्खास्त कर कंपनी संचालन से प्रतिबंधित किया।
निर्माण कंपनी PNC इंफ्राटेक लिमिटेड को कारण बताओ नोटिस जारी; स्वतंत्र इंजीनियरिंग टीम के प्रमुख भी निलंबित।
64 किलोमीटर में से केवल लगभग 1 किलोमीटर का हिस्सा जल रिसाव से प्रभावित; पूरे एक्सप्रेसवे पर टोल वसूली निलंबित ।
मरम्मत का पूरा खर्च PNC इंफ्राटेक वहन करेगी; अगले 15 वर्षों तक रखरखाव की जिम्मेदारी ठेकेदार की।
IIT खड़गपुर की विशेषज्ञ टीम मामले की स्वतंत्र तकनीकी जाँच करेगी।
एक्सप्रेसवे का उद्घाटन 13 जुलाई को राजनाथ सिंह , नितिन गडकरी और योगी आदित्यनाथ ने किया था; निर्माण लागत ₹4,200 करोड़ ।

राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर उद्घाटन के कुछ ही हफ्तों के भीतर सामने आई दरारों और कटाव की गंभीर खामियों को लेकर निर्माण कंपनी PNC इंफ्राटेक लिमिटेड के खिलाफ कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की है। परियोजना निदेशक को बर्खास्त कर कंपनी के संचालन से प्रतिबंधित कर दिया गया है और निर्माण एजेंसी को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।

मुख्य घटनाक्रम

NHAI अधिकारियों के अनुसार, परियोजना निदेशक को निलंबित कर कंपनी के संचालन से प्रतिबंधित किया गया है। इसके साथ ही स्वतंत्र इंजीनियरिंग टीम के प्रमुख को भी निलंबित कर दिया गया है। PNC इंफ्राटेक को जारी कारण बताओ नोटिस में राजमार्ग के उद्घाटन के कुछ सप्ताह के भीतर ही दरारें पड़ने के कारणों पर स्पष्टीकरण माँगा गया है।

यह कार्रवाई तब की गई जब 63 किलोमीटर लंबे एक्सप्रेसवे के एक हिस्से में जल रिसाव, कटाव और किनारों पर कई स्थानों पर दरारें पड़ने की शिकायतें यात्रियों ने उठाईं। NHAI ने स्पष्ट किया कि 64 किलोमीटर के कुल खंड में से केवल लगभग 1 किलोमीटर का हिस्सा जल रिसाव से प्रभावित हुआ है — पूरा एक्सप्रेसवे क्षतिग्रस्त नहीं है।

टोल निलंबन और मरम्मत

NHAI ने क्षतिग्रस्त हिस्सों की मरम्मत पूरी होने तक पूरे एक्सप्रेसवे पर टोल वसूली निलंबित कर दी है। रिपोर्ट सामने आते ही मरम्मत कार्य शुरू कर दिया गया था और यातायात की सुगमता बनाए रखने के लिए वैकल्पिक मार्ग बनाए गए। NHAI के अनुसार, मरम्मत का पूरा खर्च निर्माण एजेंसी स्वयं वहन कर रही है — इस पर कोई सरकारी निधि नहीं लगाई जाएगी।

समझौते की शर्तों के अनुसार, अगले 15 वर्षों तक एक्सप्रेसवे के रखरखाव की पूरी जिम्मेदारी ठेकेदार की होगी।

स्वतंत्र जाँच

NHAI ने घोषणा की है कि इस मामले की स्वतंत्र तकनीकी जाँच IIT खड़गपुर की एक विशेषज्ञ टीम द्वारा की जाएगी। यह कदम प्राधिकरण की जवाबदेही सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। नाम न छापने की शर्त पर NHAI के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि प्राधिकरण न तो अपनी जिम्मेदारी से पीछे हट रहा है और न ही जवाबदेही से बचने की कोशिश कर रहा है।

परियोजना की पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि ₹4,200 करोड़ की लागत से निर्मित इस एक्सप्रेसवे का उद्घाटन 13 जुलाई को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया था। निर्माण आगरा स्थित PNC इंफ्राटेक लिमिटेड ने किया था। उद्घाटन के महज कुछ हफ्तों के भीतर खामियाँ उजागर होना निर्माण गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

आगे क्या होगा

IIT खड़गपुर की जाँच रिपोर्ट के बाद NHAI आगे की कार्रवाई तय करेगा। अधिकारियों के अनुसार, सरकारी दिशानिर्देशों के तहत सभी कमियों को दूर करने के लिए समयबद्ध कदम उठाए जा रहे हैं। यह मामला राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं में गुणवत्ता नियंत्रण और ठेकेदार जवाबदेही की व्यापक बहस को नया आयाम देता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

200 करोड़ की लागत और तीन केंद्रीय-राज्य नेताओं के उद्घाटन के बावजूद एक्सप्रेसवे का कुछ हफ्तों में ही दरकना यह दर्शाता है कि राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं में तीसरे पक्ष की गुणवत्ता जाँच महज औपचारिकता बनकर रह गई है। NHAI का टोल निलंबन और IIT खड़गपुर जाँच सराहनीय कदम हैं, लेकिन असली सवाल यह है कि स्वतंत्र इंजीनियरिंग टीम उद्घाटन से पहले क्या कर रही थी — और उसके प्रमुख का निलंबन इस सवाल का जवाब नहीं देता। जब तक जाँच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं होती और दोषी तय नहीं होते, यह कार्रवाई प्रशासनिक दबाव में उठाया गया प्रतीकात्मक कदम ही दिखती है।
RashtraPress
6 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर दरारें क्यों पड़ीं?
NHAI के अनुसार, एक्सप्रेसवे के लगभग 1 किलोमीटर के हिस्से में जल रिसाव के कारण कटाव और दरारें पड़ीं। इसके सटीक तकनीकी कारणों की जाँच IIT खड़गपुर की विशेषज्ञ टीम करेगी।
NHAI ने PNC इंफ्राटेक के खिलाफ क्या कार्रवाई की है?
NHAI ने परियोजना निदेशक को बर्खास्त कर कंपनी संचालन से प्रतिबंधित किया है, स्वतंत्र इंजीनियरिंग टीम के प्रमुख को निलंबित किया है और PNC इंफ्राटेक को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। साथ ही मरम्मत पूरी होने तक पूरे एक्सप्रेसवे पर टोल वसूली निलंबित कर दी गई है।
क्या लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पूरी तरह बंद है?
नहीं, एक्सप्रेसवे पूरी तरह बंद नहीं है। केवल लगभग 1 किलोमीटर का हिस्सा प्रभावित है और यातायात की सुगमता के लिए वैकल्पिक मार्ग बनाए गए हैं। टोल वसूली अवश्य निलंबित है।
मरम्मत का खर्च कौन उठाएगा और रखरखाव की जिम्मेदारी किसकी है?
NHAI के अनुसार, मरम्मत का पूरा खर्च PNC इंफ्राटेक स्वयं वहन करेगी — कोई सरकारी निधि नहीं लगेगी। समझौते की शर्तों के तहत अगले 15 वर्षों तक एक्सप्रेसवे के रखरखाव की पूरी जिम्मेदारी ठेकेदार की है।
लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे का उद्घाटन कब और किसने किया था?
इस एक्सप्रेसवे का उद्घाटन 13 जुलाई को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया था। इसे ₹4,200 करोड़ की लागत से आगरा स्थित PNC इंफ्राटेक लिमिटेड ने बनाया था।
राष्ट्र प्रेस
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