लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे उद्घाटन: 63 किमी का सफर अब सिर्फ 45 मिनट में, AI और MLFF टोलिंग से लैस NE-6
सारांश
मुख्य बातें
लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे (नेशनल एक्सप्रेसवे-6) को 13 जुलाई 2026 को जनता के लिए खोल दिया गया, जिससे उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ और औद्योगिक केंद्र कानपुर के बीच 63 किलोमीटर का सफर अब महज 35 से 45 मिनट में पूरा किया जा सकेगा। पहले यही दूरी तय करने में ढाई से तीन घंटे लगते थे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में विकसित यह परियोजना उत्तर प्रदेश के बुनियादी ढाँचे में एक निर्णायक मील का पत्थर मानी जा रही है।
परियोजना की पृष्ठभूमि और निर्माण यात्रा
इस एक्सप्रेसवे की नींव वर्ष 2018 में रखी गई थी। मार्च 2019 में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने इसकी आधारशिला रखी। दिसंबर 2020 में केंद्र सरकार ने इसे नेशनल एक्सप्रेसवे-6 (NE-6) का दर्जा प्रदान किया।
लगभग ₹4,500 करोड़ की लागत से तैयार इस परियोजना का निर्माण भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) की देखरेख में पीएनसी इंफ्राटेक ने किया। परियोजना को दो पैकेजों में विभाजित किया गया था — पहला 18 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड सेक्शन जो लखनऊ के अमौसी और शहीद पथ क्षेत्र से जुड़ा है, और दूसरा 45 किलोमीटर लंबा ग्रीनफील्ड सेक्शन जो लखनऊ के 11 और उन्नाव के 31 गाँवों से होकर गुजरता है।
अक्टूबर 2025 तक ग्रीनफील्ड हिस्सा पूरी तरह तैयार हो चुका था और जून 2026 में ट्रायल रन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। कुल 1,648 दिनों की निर्माण यात्रा के बाद यह एक्सप्रेसवे आम जनता को समर्पित हुआ।
अत्याधुनिक तकनीक और AI प्रबंधन
यह एक्सप्रेसवे देश का पहला पूरी तरह AI-आधारित ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम से सुसज्जित एक्सप्रेसवे बताया जा रहा है। निर्माण में ऑटोमेटेड मशीन गाइड कंस्ट्रक्शन सिस्टम का उपयोग किया गया, जिसमें कंप्यूटर और सैटेलाइट आधारित तकनीक से संचालित मशीनों ने सड़क को अधिक सटीक, मजबूत और टिकाऊ बनाया।
यहाँ पारंपरिक टोल प्लाजा की जगह मल्टी-लेन फ्री फ्लो (MLFF) टोलिंग प्रणाली लागू की गई है। वाहन बिना रुके 120 किलोमीटर प्रति घंटे की गति तक सफर कर सकेंगे और FASTag तथा ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) तकनीक से टोल स्वतः कट जाएगा।
सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण
सुरक्षा के लिहाज से पूरे 63 किलोमीटर मार्ग पर 80 से अधिक हाई डेफिनिशन कैमरे, 16 वीडियो इंसिडेंट डिटेक्शन सिस्टम और स्पीड रडार लगाए गए हैं। गति सीमा उल्लंघन पर कंट्रोल रूम से सीधे ऑटोमैटिक चालान काटा जाएगा।
पर्यावरण संरक्षण के लिए एक्सप्रेसवे के दोनों ओर वन विभाग के सहयोग से 46,000 से अधिक पौधे लगाए गए हैं, जो यात्रियों को एक हरे-भरे ग्रीन कॉरिडोर का अनुभव देंगे।
आम जनता और अर्थव्यवस्था पर असर
दोनों शहरों के बीच प्रतिदिन हजारों नौकरीपेशा लोग, छात्र, व्यापारी और उद्यमी आवाजाही करते हैं। 6-लेन (भविष्य में 8-लेन तक विस्तार योग्य) इस एक्सप्रेसवे से यात्रा समय में भारी कमी के साथ-साथ ईंधन की बचत और टोल प्लाजा के जाम से भी पूरी तरह राहत मिलेगी।
यह एक्सप्रेसवे प्रस्तावित स्टेट कैपिटल रीजन के विकास, औद्योगिक निवेश, तेज माल परिवहन और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को नई गति देगा। यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश वैश्विक निवेशकों को आकर्षित करने के लिए अपने बुनियादी ढाँचे को तेजी से उन्नत कर रहा है।
आगे की राह
गौरतलब है कि NE-6 उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (UPEIDA) के व्यापक एक्सप्रेसवे नेटवर्क का हिस्सा है। इस एक्सप्रेसवे के चालू होने से लखनऊ और कानपुर के बीच आर्थिक एकीकरण और तेज होगा, और आने वाले वर्षों में 8-लेन विस्तार की संभावना भी बनी हुई है।