गंगा एक्सप्रेसवे का उद्घाटन: CM योगी बोले — '594 किमी का यह कॉरिडोर विकास की नई आधारशिला'

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गंगा एक्सप्रेसवे का उद्घाटन: CM योगी बोले — '594 किमी का यह कॉरिडोर विकास की नई आधारशिला'

सारांश

594 किलोमीटर लंबे गंगा एक्सप्रेसवे का उद्घाटन सिर्फ एक सड़क का खुलना नहीं — यह उत्तर प्रदेश की आर्थिक महत्वाकांक्षा का सार्वजनिक ऐलान है। मेरठ से प्रयागराज तक फैला यह ग्रीनफील्ड कॉरिडोर डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग, लॉजिस्टिक हब और इंडस्ट्रियल क्लस्टर का आधार बनेगा — और परखेगा कि इंफ्रास्ट्रक्चर वास्तव में रोज़गार में बदलता है या नहीं।

Key Takeaways

  • 594 किलोमीटर लंबे गंगा एक्सप्रेसवे का उद्घाटन 29 अप्रैल 2026 को हरदोई में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया।
  • एक्सप्रेसवे मेरठ से प्रयागराज तक छह लेन (भविष्य में आठ लेन) का एक्सेस-कंट्रोल्ड ग्रीनफील्ड हाई-स्पीड कॉरिडोर है।
  • निर्माण के लिए 12 जिलों के एक लाख से अधिक किसानों से लगभग 18,000 एकड़ भूमि ली गई; इंडस्ट्रियल हब के लिए 7,000 एकड़ अतिरिक्त अधिग्रहण जारी।
  • CM योगी ने बताया कि डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग कॉरिडोर, लॉजिस्टिक हब और इंडस्ट्रियल क्लस्टर एक्सप्रेसवे के साथ विकसित किए जा रहे हैं।
  • परियोजना की आधारशिला दिसंबर 2021 में रखी गई थी और कोविड-19 के बावजूद तय समयसीमा में पूरी की गई।
  • UP में अब 4 लाख किलोमीटर से अधिक सड़क नेटवर्क तैयार होने का दावा सरकार ने किया।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 29 अप्रैल 2026 को हरदोई में 594 किलोमीटर लंबे गंगा एक्सप्रेसवे के लोकार्पण समारोह में कहा कि यह परियोजना महज आवागमन का साधन नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के आर्थिक रूपांतरण का 'ग्रोथ कॉरिडोर' है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा उद्घाटन किए गए इस छह-लेन (भविष्य में आठ लेन तक विस्तारित) ग्रीनफील्ड हाई-स्पीड कॉरिडोर को मेरठ से प्रयागराज तक कनेक्टिविटी देने के लिए बनाया गया है।

विजन से हकीकत तक का सफर

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि दिसंबर 2021 में प्रधानमंत्री मोदी द्वारा रखी गई इस परियोजना की आधारशिला आज उन्हीं के हाथों लोकार्पित होकर 'विजन से हकीकत' में बदल गई है। उन्होंने कहा कि कोविड-19 जैसी वैश्विक चुनौती के बावजूद परियोजना को तय समयसीमा में पूरा करना केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों का प्रमाण है। यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश देश के सबसे बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश केंद्रों में से एक बनने की राह पर है।

किसानों का योगदान और भूमि अधिग्रहण

योगी आदित्यनाथ ने बताया कि गंगा एक्सप्रेसवे के निर्माण के लिए किसानों से लगभग 18,000 एकड़ भूमि ली गई है। इसके अतिरिक्त, इंडस्ट्रियल क्लस्टर और लॉजिस्टिक हब के लिए करीब 7,000 एकड़ अतिरिक्त भूमि अधिग्रहित की जा रही है। एक्सप्रेसवे से जुड़े 12 जिलों के एक लाख से अधिक किसानों के योगदान की सराहना करते हुए मुख्यमंत्री ने उनका आभार व्यक्त किया।

डिफेंस कॉरिडोर, लॉजिस्टिक हब और औद्योगिक विकास

मुख्यमंत्री ने कहा कि एक्सप्रेसवे के साथ-साथ डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग कॉरिडोर, लॉजिस्टिक हब और इंडस्ट्रियल क्लस्टर विकसित किए जा रहे हैं, जो किसानों, युवाओं और उद्योगों के लिए नए अवसर पैदा करेंगे। उन्होंने बताया कि 2017 से पहले प्रदेश में अराजकता और माफिया राज के कारण विकास की कल्पना भी मुश्किल थी, लेकिन 'डबल इंजन सरकार' के प्रयासों से अब 4 लाख किलोमीटर से अधिक सड़कों का नेटवर्क तैयार हो चुका है। हर जिला मुख्यालय को चार लेन और ब्लॉक-तहसील स्तर तक दो लेन सड़कों से जोड़ने का कार्य तेजी से पूरा किया गया है।

हरदोई की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

मुख्यमंत्री ने हरदोई की ऐतिहासिक और धार्मिक महत्ता का उल्लेख करते हुए कहा कि यह भूमि भक्त प्रह्लाद और भगवान नरसिंह की आस्था से जुड़ी रही है। उन्होंने कहा कि ऐसे पावन अवसर पर प्रधानमंत्री का स्वागत पूरे प्रदेश के लिए गौरव का विषय है। गौरतलब है कि यह उत्तर प्रदेश का अब तक का सबसे लंबा एक्सेस-कंट्रोल्ड एक्सप्रेसवे है।

आगे क्या होगा

गंगा एक्सप्रेसवे के पूर्ण संचालन से मेरठ से प्रयागराज के बीच यात्रा का समय उल्लेखनीय रूप से घटेगा और उत्तर प्रदेश को देश के प्रमुख आर्थिक केंद्रों में स्थापित करने में अहम भूमिका निभाने की उम्मीद है। भविष्य में इसे आठ लेन तक विस्तारित करने की योजना पहले से तय है, जो दीर्घकालिक यातायात माँग को ध्यान में रखते हुए बनाई गई है।

Point of View

लेकिन असली कसौटी यह है कि क्या यह 'ग्रोथ कॉरिडोर' का दर्जा हासिल कर पाता है या महज एक तेज़ सड़क बनकर रह जाता है। डिफेंस कॉरिडोर और लॉजिस्टिक हब के वादे पहले भी किए गए हैं, लेकिन निवेश-से-रोज़गार का रूपांतरण अब तक अपेक्षाओं से पीछे रहा है। 18,000 एकड़ किसान भूमि की कीमत पर बने इस एक्सप्रेसवे की सफलता तब मानी जाएगी जब इन्हीं किसानों के बच्चों को स्थानीय स्तर पर रोज़गार मिले — न कि केवल उद्घाटन की सुर्खियाँ।
NationPress
29/04/2026

Frequently Asked Questions

गंगा एक्सप्रेसवे क्या है और यह कहाँ से कहाँ तक जाता है?
गंगा एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश में मेरठ से प्रयागराज तक फैला 594 किलोमीटर लंबा छह-लेन एक्सेस-कंट्रोल्ड ग्रीनफील्ड हाई-स्पीड कॉरिडोर है, जिसे भविष्य में आठ लेन तक विस्तारित किया जा सकता है। इसका उद्घाटन 29 अप्रैल 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हरदोई में किया।
गंगा एक्सप्रेसवे की आधारशिला कब रखी गई थी?
गंगा एक्सप्रेसवे की आधारशिला दिसंबर 2021 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रखी थी। कोविड-19 की वैश्विक चुनौती के बावजूद परियोजना तय समयसीमा में पूरी की गई।
गंगा एक्सप्रेसवे से कितने किसान प्रभावित हुए और कितनी भूमि ली गई?
एक्सप्रेसवे के निर्माण के लिए 12 जिलों के एक लाख से अधिक किसानों से लगभग 18,000 एकड़ भूमि ली गई है। इसके अतिरिक्त, इंडस्ट्रियल क्लस्टर और लॉजिस्टिक हब के लिए करीब 7,000 एकड़ और भूमि अधिग्रहित की जा रही है।
गंगा एक्सप्रेसवे के साथ कौन-कौन से औद्योगिक प्रकल्प विकसित किए जा रहे हैं?
CM योगी आदित्यनाथ के अनुसार, एक्सप्रेसवे के साथ डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग कॉरिडोर, लॉजिस्टिक हब और इंडस्ट्रियल क्लस्टर विकसित किए जा रहे हैं। इनका उद्देश्य किसानों, युवाओं और उद्योगों के लिए नए रोज़गार के अवसर पैदा करना है।
CM योगी ने एक्सप्रेसवे को 'ग्रोथ कॉरिडोर' क्यों कहा?
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का कहना है कि एक्सप्रेसवे केवल दूरी कम करने का साधन नहीं, बल्कि निवेश, रोज़गार और औद्योगिक विकास को गति देने वाला 'ग्रोथ कॉरिडोर' है। इसके साथ जुड़े डिफेंस कॉरिडोर, लॉजिस्टिक हब और इंडस्ट्रियल क्लस्टर इसे आर्थिक विकास का केंद्र बनाने की योजना का हिस्सा हैं।
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