रुपए और विदेशी निवेश पर RBI-सरकार के कदमों को एसोचैम का समर्थन, 7.1% GDP वृद्धि का अनुमान
सारांश
मुख्य बातें
उद्योग संगठन एसोचैम (ASSOCHAM) ने 19 अक्टूबर 2026 को रुपए को स्थिरता देने और निवेशकों का भरोसा बनाए रखने के लिए भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) तथा वित्त मंत्रालय द्वारा हाल में उठाए गए कदमों का समर्थन किया। संगठन ने कहा कि नीति-निर्माता दीर्घकालिक और स्थायी विदेशी पूंजी प्रवाह आकर्षित करने की सही दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
मिंडा की प्रतिक्रिया और सुब्बाराव के बयान का संदर्भ
रुपए में हालिया उतार-चढ़ाव और विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) के रुझानों पर प्रतिक्रिया देते हुए एसोचैम के अध्यक्ष निर्मल के. मिंडा ने कहा कि वैश्विक अनिश्चितताओं के दौर में व्यापक आर्थिक स्थिरता बनाए रखने के लिए सरकार और RBI के समन्वित प्रयास सराहनीय हैं। उनकी यह टिप्पणी पूर्व RBI गवर्नर डी. सुब्बाराव के उस हालिया बयान के संदर्भ में आई, जिसमें उन्होंने कहा था कि रुपए की दीर्घकालिक मजबूती अंततः भारत की ठोस आर्थिक बुनियाद और निरंतर पूंजी प्रवाह आकर्षित करने की क्षमता पर निर्भर करेगी।
मिंडा ने कहा, 'हम मजबूत आर्थिक आधार पर टिके दीर्घकालिक पूंजी प्रवाह के संबंध में डॉ. सुब्बाराव के विचारों से पूरी तरह सहमत हैं और सरकार व RBI द्वारा पहले से उठाए गए कदमों की सराहना करते हैं।'
FCNR(B) विंडो और रुपए की रिकवरी
एसोचैम ने कहा कि इन उपायों की बदौलत रुपया हाल के निचले स्तरों से उबरने में सफल रहा है। संगठन ने 31 अगस्त को समाप्त हुई 133 अरब डॉलर की FCNR(B) मोबिलाइज़ेशन विंडो की सफलता का विशेष उल्लेख किया। यह विंडो भारत में विदेशी मुद्रा जमा को प्रोत्साहित करने का एक अहम तंत्र मानी जाती है, और इसकी सफलता को आर्थिक भरोसे का संकेत बताया जा रहा है।
व्यापक आर्थिक स्थिति मजबूत: मुख्य अर्थशास्त्री
एसोचैम के मुख्य अर्थशास्त्री एस.पी. शर्मा ने कहा कि भारत की व्यापक आर्थिक स्थिति मजबूत बनी हुई है। उन्होंने पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार, वित्त वर्ष 2026-27 के लिए RBI द्वारा अनुमानित 7.1 प्रतिशत जीडीपी वृद्धि दर और महंगाई नियंत्रण के लिए अपनाई गई संतुलित मौद्रिक नीति को इसके प्रमुख आधार बताया। गौरतलब है कि यह वृद्धि दर वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत को प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शीर्ष पर बनाए रखती है।
आयकर अध्यादेश और LTCG समीक्षा का स्वागत
एसोचैम ने दीर्घकालिक विदेशी निवेश आकर्षित करने के लिए वित्त मंत्रालय द्वारा हाल में घोषित कदमों का भी स्वागत किया। इनमें आयकर संशोधन अध्यादेश, 2026 शामिल है, जिसके तहत 1 अप्रैल 2026 से सरकारी प्रतिभूतियों में FPI निवेश पर ब्याज आय और पूंजीगत लाभ पर कर छूट प्रदान की गई है।
इसके अलावा संगठन ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के उस बयान का भी स्वागत किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि वित्त वर्ष 2027-28 के बजट की तैयारियों के दौरान लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) टैक्स और सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) पर निवेशकों की राय पर विचार किया जाएगा। यह ऐसे समय में आया है जब बाज़ार में दीर्घकालिक निवेश को बढ़ावा देने की माँग लगातार उठ रही है।
आगे की राह: कर ढाँचे में सुधार की माँग
हालाँकि एसोचैम ने कर ढाँचे को और तर्कसंगत बनाने, कर प्रावधानों की व्याख्या को सरल करने तथा अल्पकालिक पूंजी प्रवाह की तुलना में दीर्घकालिक इक्विटी निवेश को प्रोत्साहित करने वाले उपायों पर विचार करने की आवश्यकता भी जताई। संगठन ने कहा कि वह भारत को दीर्घकालिक वैश्विक पूंजी के लिए और अधिक आकर्षक गंतव्य बनाने के उद्देश्य से सरकार, RBI और बाज़ार नियामक सेबी (SEBI) के साथ मिलकर काम करना जारी रखेगा।