RBI ने रेपो रेट स्थिर रखा: अर्थशास्त्रियों ने कहा — कारोबारी भरोसा और निवेश को मिलेगी रफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने बुधवार, 5 अगस्त को रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया, जिसे उद्योग जगत और आर्थिक विशेषज्ञों ने एकमत से सकारात्मक कदम बताया है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस नीतिगत स्थिरता से कारोबारी भरोसा मज़बूत होगा, निवेश गतिविधियों को गति मिलेगी और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारत की आर्थिक वृद्धि की रफ्तार बनी रहेगी।
उद्योग जगत की प्रतिक्रिया
एसोसिएटेड चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ऑफ इंडिया (एसोचैम) ने कहा कि ब्याज दरों में स्थिरता बनाए रखने का यह फैसला व्यापार जगत के लिए एक मज़बूत सकारात्मक संकेत है। एसोचैम के अध्यक्ष निर्मल के. मिंडा ने कहा कि यह निर्णय भारतीय अर्थव्यवस्था की सुदृढ़ व्यापक आर्थिक बुनियादों में केंद्रीय बैंक के विश्वास को दर्शाता है।
मिंडा ने कहा, 'नीतिगत दरों को यथावत रखना इस बात का संकेत है कि RBI विकास को बढ़ावा देने, महंगाई को नियंत्रित रखने और वित्तीय स्थिरता बनाए रखने के बीच संतुलित दृष्टिकोण अपना रहा है।' एसोचैम ने RBI द्वारा सकल घरेलू उत्पाद (GDP) वृद्धि दर के अनुमान को बढ़ाकर 6.7 प्रतिशत किए जाने का भी स्वागत किया — जो उद्योग संगठन के स्वयं के लगभग 7 प्रतिशत के अनुमान के करीब है।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
एमके ग्लोबल फाइनेंशियल सर्विसेज की मुख्य अर्थशास्त्री माधवी अरोड़ा ने RBI की मौद्रिक नीति को 'सतर्क लेकिन सकारात्मक' करार दिया। उनके अनुसार, केंद्रीय बैंक ने मध्य पूर्व में जारी तनाव, वैश्विक वित्तीय परिस्थितियों के कड़े होने और अल नीनो से जुड़े जोखिमों को ध्यान में रखते हुए भी घरेलू अर्थव्यवस्था की मजबूती और विदेशी मुद्रा प्रवाह के सकारात्मक संकेतों के बीच संतुलन बनाने का प्रयास किया है।
अरोड़ा ने यह भी बताया कि पहली तिमाही में महंगाई दर RBI के अनुमान से कम रहने के बावजूद मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने अल नीनो से जुड़े जोखिमों पर अपना फोकस बरकरार रखा। उनके अनुसार, RBI का मानना है कि निकट भविष्य में यदि कीमतों पर दबाव बढ़ता है तो वह मुख्य रूप से आपूर्ति पक्ष से जुड़ा होगा, जब तक कि उसका असर व्यापक स्तर पर महंगाई में न दिखाई दे।
GDP और महंगाई के आँकड़े
बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री डॉ. मदन सबनवीस ने कहा कि RBI के फैसले को GDP वृद्धि अनुमान में 10 आधार अंकों की बढ़ोतरी और महंगाई दर के अनुमान में 10 आधार अंकों की कमी का समर्थन मिला है। उनके अनुसार, उच्च विकास दर और कम महंगाई का यह संयोजन यथास्थिति बनाए रखने के पक्ष में मज़बूत तर्क था।
सबनवीस ने कहा, 'RBI के बयान से स्पष्ट है कि अर्थव्यवस्था के विभिन्न संकेतक मजबूत बने हुए हैं और इससे यह भरोसा मिलता है कि आने वाले समय में आर्थिक वृद्धि की रफ्तार स्थिर बनी रहेगी।'
आगे क्या: संभावित जोखिम
हालाँकि डॉ. सबनवीस ने आगाह किया कि चालू वित्त वर्ष की दूसरी छमाही और वित्त वर्ष 2027-28 की पहली तिमाही में महंगाई का दबाव बढ़ सकता है। ऐसे में 2026 के अंत तक ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना से पूरी तरह इनकार नहीं किया जा सकता। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक केंद्रीय बैंक अपनी-अपनी मौद्रिक नीतियों को लेकर अलग-अलग रास्ते अपना रहे हैं।