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आरबीआई ने रेपो रेट स्थिर रखा, अर्थशास्त्रियों ने कहा — कारोबारी भरोसा और निवेश को मिलेगी रफ्तार

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आरबीआई ने रेपो रेट स्थिर रखा, अर्थशास्त्रियों ने कहा — कारोबारी भरोसा और निवेश को मिलेगी रफ्तार

सारांश

RBI ने रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया और GDP अनुमान बढ़ाकर 6.7% किया — एसोचैम से लेकर एमके ग्लोबल तक, विशेषज्ञों ने इसे 'सतर्क लेकिन सकारात्मक' बताया। लेकिन बैंक ऑफ बड़ौदा के अर्थशास्त्री ने चेताया — 2026 के अंत तक दरें बढ़ सकती हैं।

मुख्य बातें

RBI ने 5 अगस्त को रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया, नीतिगत दरें यथावत बनाए रखीं।
एसोचैम अध्यक्ष निर्मल के.
मिंडा ने फैसले को कारोबारी विश्वास और निवेश के लिए सकारात्मक बताया।
RBI ने GDP वृद्धि अनुमान बढ़ाकर 6.7 प्रतिशत किया; एसोचैम का अपना अनुमान लगभग 7 प्रतिशत है।
माधवी अरोड़ा (एमके ग्लोबल) ने नीति को 'सतर्क लेकिन सकारात्मक' करार दिया; अल नीनो और वैश्विक तनाव को प्रमुख जोखिम बताया।
मदन सबनवीस (बैंक ऑफ बड़ौदा) ने चेताया — दूसरी छमाही में महंगाई दबाव बढ़ सकता है और 2026 के अंत तक दर वृद्धि से इनकार नहीं।

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने बुधवार, 5 अगस्त को रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया, जिसके बाद उद्योग जगत और आर्थिक विशेषज्ञों ने इस निर्णय का व्यापक स्वागत किया है। विशेषज्ञों के अनुसार, नीतिगत दरों में यह स्थिरता कारोबारी विश्वास को मज़बूत करेगी और निवेश गतिविधियों को नई गति देगी।

उद्योग जगत की प्रतिक्रिया

एसोसिएटेड चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ऑफ इंडिया (एसोचैम) ने इस फैसले को व्यापार जगत के लिए सकारात्मक संकेत बताया। संगठन का कहना है कि ब्याज दरों में स्थिरता से कारोबारी विश्वास बढ़ेगा, निवेश को समर्थन मिलेगा और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारत की आर्थिक वृद्धि की रफ्तार बनी रहेगी।

एसोचैम के अध्यक्ष निर्मल के. मिंडा ने कहा कि RBI का यह निर्णय भारतीय अर्थव्यवस्था की मज़बूत समष्टि-आर्थिक (मैक्रोइकोनॉमिक) बुनियादों में विश्वास को दर्शाता है। उनके अनुसार, नीतिगत दरों में स्थिरता निवेश को प्रोत्साहित करेगी, आर्थिक विकास को बनाए रखने में मदद करेगी और वैश्विक परिस्थितियों में बदलाव के अनुरूप प्रतिक्रिया देने का लचीलापन भी प्रदान करेगी।

मिंडा ने कहा, "नीतिगत दरों को यथावत रखना इस बात का संकेत है कि RBI विकास को बढ़ावा देने, महंगाई को नियंत्रित रखने और वित्तीय स्थिरता बनाए रखने के बीच संतुलित दृष्टिकोण अपना रहा है।"

एसोचैम ने RBI द्वारा सकल घरेलू उत्पाद (GDP) वृद्धि दर के अनुमान को बढ़ाकर 6.7 प्रतिशत किए जाने का भी स्वागत किया। संगठन ने कहा कि यह उसके अपने लगभग 7 प्रतिशत वृद्धि दर के अनुमान के काफी करीब है।

विशेषज्ञ क्या कहते हैं

एमके ग्लोबल फाइनेंशियल सर्विसेज की मुख्य अर्थशास्त्री माधवी अरोड़ा ने RBI की मौद्रिक नीति को "सतर्क लेकिन सकारात्मक" करार दिया। उन्होंने कहा कि केंद्रीय बैंक ने मध्य पूर्व में जारी तनाव, वैश्विक वित्तीय परिस्थितियों के कड़े होने और अल नीनो से जुड़े जोखिमों को ध्यान में रखते हुए भी घरेलू अर्थव्यवस्था की मज़बूती और विदेशी मुद्रा प्रवाह के सकारात्मक संकेतों के बीच संतुलन बनाने का प्रयास किया है।

अरोड़ा ने यह भी बताया कि पहली तिमाही में महंगाई दर RBI के अनुमान से कम रहने के बावजूद मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने अल नीनो से जुड़े जोखिमों पर अपना फोकस बरकरार रखा है। RBI का मानना है कि निकट भविष्य में यदि कीमतों पर दबाव बढ़ता है तो वह मुख्य रूप से आपूर्ति पक्ष से जुड़ा होगा, जब तक कि उसका असर व्यापक स्तर पर महंगाई में न दिखाई दे।

GDP और महंगाई के आंकड़ों का समर्थन

बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री डॉ. मदन सबनवीस ने कहा कि RBI के इस फैसले को GDP वृद्धि अनुमान में 10 आधार अंकों (बेसिस पॉइंट) की बढ़ोतरी और महंगाई दर के अनुमान में 10 आधार अंकों की कमी का समर्थन मिला है। उनके अनुसार, उच्च विकास दर और कम महंगाई का संयोजन यथास्थिति बनाए रखने के पक्ष में था।

डॉ. सबनवीस ने कहा, "RBI के बयान से स्पष्ट है कि अर्थव्यवस्था के विभिन्न संकेतक मज़बूत बने हुए हैं और इससे यह भरोसा मिलता है कि आने वाले समय में आर्थिक वृद्धि की रफ्तार स्थिर बनी रहेगी।"

आगे क्या — संभावित जोखिम

हालाँकि डॉ. सबनवीस ने सतर्क रहने की भी सलाह दी। उनके अनुसार, चालू वित्त वर्ष की दूसरी छमाही और वित्त वर्ष 2027-28 की पहली तिमाही में महंगाई का दबाव बढ़ सकता है। ऐसे में वर्ष 2026 के अंत तक ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना से पूरी तरह इनकार नहीं किया जा सकता। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक केंद्रीय बैंक भी अपनी-अपनी दर नीतियों पर पुनर्विचार कर रहे हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन दूसरी छमाही में आपूर्ति-पक्ष के दबावों की चेतावनी इस आशावाद पर प्रश्नचिह्न लगाती है। असली परीक्षा यह है कि क्या यह स्थिरता वास्तविक निवेश निर्णयों में तब्दील होती है — या महज़ उद्योग संगठनों के स्वागत-बयानों तक सीमित रहती है।
RashtraPress
6 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

RBI ने इस बार रेपो रेट क्यों नहीं बदला?
RBI की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने उच्च GDP वृद्धि अनुमान (6.7%) और नियंत्रित महंगाई के मद्देनज़र दरें यथावत रखीं। साथ ही अल नीनो जोखिम और वैश्विक वित्तीय अनिश्चितताओं के बीच लचीलापन बनाए रखना भी एक कारण रहा।
RBI के इस फैसले का कारोबार और निवेश पर क्या असर होगा?
एसोचैम के अनुसार, नीतिगत दरों में स्थिरता से कारोबारी विश्वास बढ़ेगा और निवेश गतिविधियों को गति मिलेगी। एमके ग्लोबल की माधवी अरोड़ा ने इसे 'सतर्क लेकिन सकारात्मक' नीति बताया जो घरेलू मज़बूती और वैश्विक जोखिमों के बीच संतुलन साधती है।
क्या आगे चलकर रेपो रेट बढ़ सकता है?
बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री डॉ. मदन सबनवीस के अनुसार, वित्त वर्ष की दूसरी छमाही और वित्त वर्ष 2027-28 की पहली तिमाही में महंगाई का दबाव बढ़ सकता है। इसलिए 2026 के अंत तक दरों में बढ़ोतरी की संभावना से पूरी तरह इनकार नहीं किया जा सकता।
RBI ने GDP वृद्धि अनुमान कितना रखा है?
RBI ने GDP वृद्धि दर का अनुमान बढ़ाकर 6.7 प्रतिशत कर दिया है, जो पिछले अनुमान से 10 आधार अंक अधिक है। एसोचैम का अपना अनुमान लगभग 7 प्रतिशत है, जो RBI के नए अनुमान के काफी करीब है।
अल नीनो का महंगाई पर क्या असर पड़ सकता है?
माधवी अरोड़ा के अनुसार, MPC ने अल नीनो से जुड़े जोखिमों को प्रमुख चिंता के रूप में बनाए रखा है। RBI का मानना है कि निकट भविष्य में यदि कीमतों पर दबाव बढ़ा तो वह मुख्यतः आपूर्ति पक्ष से जुड़ा होगा, जब तक कि उसका असर व्यापक महंगाई में न दिखे।
राष्ट्र प्रेस
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