4 नवंबर 2026
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भारत की नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता 2030 तक 530 गीगावाट: IEA रिपोर्ट, कोयला आयात में $100 अरब की बचत

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भारत की नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता 2030 तक 530 गीगावाट: IEA रिपोर्ट, कोयला आयात में $100 अरब की बचत

सारांश

IEA की ताज़ा रिपोर्ट भारत की ऊर्जा क्रांति का लेखाजोखा पेश करती है — एक दशक में चार गुना वृद्धि, 2025 में 50% गैर-जीवाश्म ऊर्जा का लक्ष्य पाँच साल पहले हासिल, और 2030 तक 530 गीगावाट का अनुमान। $100 अरब से अधिक की आयात बचत इस बदलाव को केवल पर्यावरणीय नहीं, बल्कि आर्थिक जीत भी बनाती है।

मुख्य बातें

IEA की 'इंडिया रिन्यूएबल एनर्जी मार्केट रिपोर्ट 2026' के अनुसार भारत की नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता 2030 तक 530 गीगावाट तक पहुँचने का अनुमान है।
पिछले एक दशक में क्षमता चार गुना बढ़कर 2026 में 300 गीगावाट पार कर गई।
भारत ने 2025 में ही गैर-जीवाश्म ऊर्जा से 50% बिजली क्षमता का लक्ष्य निर्धारित समय से पाँच साल पहले हासिल किया।
2011 से 2025 के बीच नवीकरणीय ऊर्जा से कोयला व गैस आयात में 100 अरब डॉलर से अधिक की बचत हुई।
नई स्थापित क्षमताओं में सौर PV की हिस्सेदारी 80% से अधिक रहने का अनुमान।
IEA के निदेशक फातिह बिरोल ने भारत के अनुभव को उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए अनुकरणीय बताया।

अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) की 'इंडिया रिन्यूएबल एनर्जी मार्केट रिपोर्ट 2026' के अनुसार, भारत की नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता 2030 तक लगभग 530 गीगावाट तक पहुँचने का अनुमान है, जो देश की स्वच्छ ऊर्जा क्रांति की रफ्तार को रेखांकित करता है। नई दिल्ली में आयोजित भारत रिन्यूएबल एनर्जी समिट में जारी इस रिपोर्ट में बताया गया कि पिछले एक दशक में देश की नवीकरणीय क्षमता लगभग चार गुना बढ़कर 2026 में 300 गीगावाट का आँकड़ा पार कर चुकी है।

मुख्य घटनाक्रम

IEA की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत अब दुनिया का दूसरा सबसे तेजी से बढ़ता नवीकरणीय ऊर्जा बाज़ार बन चुका है और सौर फोटोवोल्टिक (PV) मॉड्यूल उत्पादन में भी वैश्विक स्तर पर दूसरे स्थान पर पहुँच गया है। यह उपलब्धि ऐसे समय में आई है जब वैश्विक ऊर्जा बाज़ारों में अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि भारत ने 2025 में ही गैर-जीवाश्म ईंधन स्रोतों से अपनी 50 प्रतिशत स्थापित बिजली क्षमता हासिल करने का लक्ष्य पूरा कर लिया — और यह निर्धारित समय से पाँच साल पहले हुआ। यह उपलब्धि देश में ऊर्जा बदलाव की असाधारण गति को प्रमाणित करती है।

आर्थिक और ऊर्जा सुरक्षा पर असर

IEA के अनुसार, नवीकरणीय बिजली उत्पादन के कारण भारत को 2011 से 2025 के बीच कोयले और प्राकृतिक गैस के आयात पर 100 अरब डॉलर से अधिक की बचत हुई है। एजेंसी का अनुमान है कि दशक के अंत तक यह कुल बचत दोगुने से भी अधिक हो जाएगी।

गौरतलब है कि IEA ने यह भी आकलन किया कि यदि 2010 के बाद से जोड़ी गई सौर, पवन और जैव ऊर्जा क्षमता नहीं होती, तो 2025 में भारत का कोयला आयात लगभग 11 करोड़ टन अधिक होता। यह आँकड़ा स्वच्छ ऊर्जा के ठोस आर्थिक लाभ को रेखांकित करता है।

2030 तक का रोडमैप

रिपोर्ट के अनुसार 2030 तक नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता 530 गीगावाट तक पहुँचने का अनुमान है। इस विस्तार में सौर PV ऊर्जा की हिस्सेदारी नई स्थापित क्षमताओं में 80 प्रतिशत से अधिक रहने की उम्मीद है। यह रफ्तार भारत को गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता से जुड़े अपने व्यापक लक्ष्यों की ओर निरंतर आगे बढ़ाएगी।

विशेषज्ञ क्या कहते हैं

IEA के कार्यकारी निदेशक फातिह बिरोल ने कहा कि वैश्विक ऊर्जा बाज़ारों में बढ़ती अनिश्चितता के बीच भारत में नवीकरणीय ऊर्जा का विस्तार ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज़ से बड़े लाभ दे रहा है। उन्होंने कहा, 'भारत का अनुभव दर्शाता है कि स्थिर और निरंतर नीतिगत उपाय नवीकरणीय ऊर्जा की लागत कम करने, निवेश आकर्षित करने और अन्य उभरती अर्थव्यवस्थाओं को महत्वपूर्ण सबक देने में मदद कर सकते हैं।'

केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रल्हाद जोशी ने कहा कि एक प्रमुख नवीकरणीय ऊर्जा शक्ति के रूप में भारत का उभरना हाल के वर्षों में हुई प्रगति को दर्शाता है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत वैश्विक जलवायु वार्ताओं में अपनी स्थिति को और सशक्त बनाने की कोशिश में है।

आगे की राह

विशेषज्ञों के अनुसार, 530 गीगावाट के लक्ष्य को हासिल करने के लिए ग्रिड अवसंरचना, भंडारण तकनीक और वित्त पोषण के मोर्चे पर तेज़ कदम उठाने की ज़रूरत होगी। भारत की यह ऊर्जा यात्रा न केवल घरेलू आर्थिक हितों को साधती है, बल्कि वैश्विक ऊर्जा परिवर्तन में एक अग्रणी उभरती अर्थव्यवस्था के रूप में देश की साख को भी मज़बूत करती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा ग्रिड एकीकरण और भंडारण अवसंरचना की है — जहाँ भारत अभी पीछे है। सौर PV का 80% से अधिक का वर्चस्व ऊर्जा मिश्रण में एकाग्रता का जोखिम भी पैदा करता है। $100 अरब की बचत प्रभावशाली है, परंतु यह बचत समान रूप से वितरित हुई या बड़े औद्योगिक उपभोक्ताओं तक ही सीमित रही — यह प्रश्न रिपोर्ट अनुत्तरित छोड़ती है। वैश्विक ऊर्जा निवेश में अनिश्चितता के इस दौर में, भारत को नीतिगत निरंतरता के साथ-साथ वितरण नेटवर्क आधुनिकीकरण पर भी उतना ही ध्यान देना होगा।
RashtraPress
4 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

2030 तक भारत की नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता कितनी होगी?
IEA की 'इंडिया रिन्यूएबल एनर्जी मार्केट रिपोर्ट 2026' के अनुसार, 2030 तक भारत की नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता लगभग 530 गीगावाट तक पहुँचने का अनुमान है। इसमें सौर PV की हिस्सेदारी नई स्थापित क्षमताओं में 80 प्रतिशत से अधिक रहने की उम्मीद है।
भारत ने 50% गैर-जीवाश्म ऊर्जा का लक्ष्य कब पूरा किया?
IEA रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने यह लक्ष्य 2025 में ही हासिल कर लिया, जो निर्धारित समय से पाँच साल पहले है। यह देश में स्वच्छ ऊर्जा बदलाव की असाधारण रफ्तार को दर्शाता है।
नवीकरणीय ऊर्जा से भारत को आयात पर कितनी बचत हुई?
IEA के अनुसार, 2011 से 2025 के बीच नवीकरणीय बिजली उत्पादन के कारण भारत को कोयले और प्राकृतिक गैस के आयात पर 100 अरब डॉलर से अधिक की बचत हुई। एजेंसी का अनुमान है कि दशक के अंत तक यह बचत दोगुने से भी अधिक हो जाएगी।
IEA के निदेशक फातिह बिरोल ने भारत के बारे में क्या कहा?
IEA के कार्यकारी निदेशक फातिह बिरोल ने कहा कि भारत में नवीकरणीय ऊर्जा का विस्तार वैश्विक अनिश्चितता के बीच ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज़ से बड़े लाभ दे रहा है। उन्होंने भारत के अनुभव को अन्य उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए अनुकरणीय बताया।
भारत वैश्विक नवीकरणीय ऊर्जा बाज़ार में किस स्थान पर है?
IEA रिपोर्ट के अनुसार, भारत अब दुनिया का दूसरा सबसे तेजी से बढ़ता नवीकरणीय ऊर्जा बाज़ार है और सौर PV मॉड्यूल उत्पादन में भी वैश्विक स्तर पर दूसरे स्थान पर है। यह स्थिति देश की विनिर्माण और नीतिगत क्षमता दोनों को प्रमाणित करती है।
राष्ट्र प्रेस
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