BWF वर्ल्ड टूर फाइनल के लिए क्वालीफाई हुईं पीवी सिंधु, बोलीं — '31 अब नया 21 है'
सारांश
मुख्य बातें
ओलंपिक पदक विजेता पीवी सिंधु ने बीडब्ल्यूएफ वर्ल्ड टूर फाइनल के लिए क्वालीफाई कर लिया है, और यह खुलासा किया कि उन्होंने कोरिया ओपन व जापान मास्टर्स से जानबूझकर ब्रेक लिया था ताकि वे दिसंबर के इस बड़े टूर्नामेंट के लिए पूरी तरह फिट होकर उतर सकें। बैडमिंटन फेडरेशन ऑफ इंडिया (BFI) द्वारा आयोजित मीडिया बातचीत में 4 नवंबर को सिंधु ने अपनी रणनीति, शारीरिक प्राथमिकताओं और नए स्कोरिंग सिस्टम पर विस्तार से बात की।
सीजन का प्रदर्शन और आत्मविश्वास
जापान ओपन सुपर 750 और जर्मनी में हाइलो ओपन में खिताब जीतने के बाद सिंधु का आत्मविश्वास चरम पर है। 2022 के बाद यह पहला सीजन है जिसमें उन्होंने एक से अधिक बीडब्ल्यूएफ वर्ल्ड टूर टाइटल अपने नाम किए हैं — जो उनकी वापसी की मज़बूती को रेखांकित करता है। पूर्व वर्ल्ड चैंपियन ने सारब्रुकेन में हाइलो ओपन से पहले फ्रेंच ओपन का फाइनल भी खेला था, लेकिन वहाँ वे दुनिया की नंबर 1 और पेरिस 2024 ओलंपिक चैंपियन कोरिया की एन से-यंग से पराजित हुई थीं।
ब्रेक का फैसला और शरीर को प्राथमिकता
हाइलो ओपन खिताब जीतने के कुछ ही दिनों बाद सिंधु ने कोरिया और जापान के टूर्नामेंट छोड़ने का निर्णय लिया। उन्होंने बताया, 'लंबा टूर खेलने के बाद, मैंने सोचा था कि मैं कोरिया ओपन और उसके बाद के टूर्नामेंट नहीं खेल पाऊंगी, लेकिन मेरे लिए वापस आकर आराम करना भी जरूरी था। मेरे लिए अपने शरीर का ध्यान रखना और अगले टूर्नामेंट के लिए फिट होना जरूरी था।'
सिंधु ने आगे कहा कि यह फैसला आसान नहीं था, लेकिन ज़रूरी था। उन्होंने स्पष्ट किया, 'मुझे अपने शरीर का ध्यान रखना है और कोर्ट पर फिर से मजबूती से वापस आना है।'
उम्र पर बेबाक बयान
31 वर्षीया सिंधु ने अपनी उम्र को लेकर खुलकर बात की और मीडिया को चौंकाते हुए कहा, 'मैं अब जवान नहीं रही, लेकिन मैंने यह भी कहा कि 31 अब नया 21 है, इसलिए मुझे अपने शरीर का ध्यान रखना है।' यह बयान उनकी परिपक्व मानसिकता और दीर्घकालिक करियर योजना दोनों को दर्शाता है। गौरतलब है कि सिंधु दो ओलंपिक पदक जीत चुकी हैं और करीब एक दशक से शीर्ष स्तर पर खेल रही हैं।
नया 3×15 स्कोरिंग सिस्टम और तैयारी
बैडमिंटन में बड़ा बदलाव आने वाला है — 4 जनवरी 2027 से नया 3×15 स्कोरिंग सिस्टम लागू होगा, जो मौजूदा 3×21 सिस्टम की जगह लेगा। सिंधु ने इस बदलाव पर भी अपनी राय साझा की। उन्होंने कहा, '15 पॉइंट्स ऐसी चीज है जिस पर हर किसी को जरूर काम करना चाहिए, और हम इतने सालों से 21 पॉइंट्स पर खेल रहे हैं। इसलिए, हमने यह पक्का किया कि हम उस स्कोरिंग के लिए भी ट्रेनिंग और अभ्यास करें।'
सिंधु ने खिलाड़ियों को सावधान करते हुए जोड़ा, 'यह जरूरी है कि आप शुरू से ही अलर्ट रहें। जब तक आपको पता चले कि आधा गेम खत्म हो गया है, तब तक आप कोई आसान पॉइंट न गंवाएं।' नए फॉर्मेट में छोटी गलतियों का खामियाजा बड़ा होगा, यही बात सिंधु अपने अभ्यास में अभी से ध्यान में रख रही हैं।
आगे का रास्ता
बीडब्ल्यूएफ वर्ल्ड टूर फाइनल दिसंबर में होना तय है, और सिंधु की नज़र इसी खिताब पर टिकी है। यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय बैडमिंटन में नई पीढ़ी दस्तक दे रही है, और सिंधु की यह वापसी न केवल उनके व्यक्तिगत करियर बल्कि भारतीय महिला बैडमिंटन के लिए भी उत्साहजनक संकेत है।