पीवी सिंधु BWF वर्ल्ड टूर फाइनल्स 2026 के लिए क्वालीफाई, हांगझोऊ में 9 दिसंबर से होगा मुकाबला
सारांश
मुख्य बातें
भारत की स्टार शटलर पीवी सिंधु ने BWF वर्ल्ड टूर फाइनल्स 2026 के लिए क्वालीफाई कर लिया है। बैडमिंटन वर्ल्ड फेडरेशन (BWF) ने बुधवार, 4 नवंबर 2026 को इसकी आधिकारिक पुष्टि की। यह प्रतिष्ठित टूर्नामेंट 9 से 13 दिसंबर तक चीन के हांगझोऊ में आयोजित होगा।
क्वालीफिकेशन की राह
हाइलो ओपन में खिताबी जीत सिंधु के क्वालीफिकेशन में निर्णायक साबित हुई। इस सुपर 500 खिताब ने उनकी BWF रैंकिंग पॉइंट टैली में 9,200 अंक जोड़े, जिससे वह BWF वर्ल्ड रैंकिंग के ताज़ा अपडेट में दो पायदान ऊपर छठे स्थान पर पहुँच गईं। गौरतलब है कि यह हाइलो ओपन खिताब इस सीज़न उनका दूसरा BWF वर्ल्ड टूर टाइटल था।
इससे पहले सिंधु फ्रेंच ओपन के फाइनल में पहुँची थीं, लेकिन विश्व की नंबर 1 खिलाड़ी, मौजूदा ओलंपिक और वर्ल्ड चैंपियन कोरिया की एन से-यंग से हार का सामना करना पड़ा था।
2021 के बाद पहली भागीदारी
2019 की वर्ल्ड चैंपियन सिंधु 2021 के बाद पहली बार इस टूर्नामेंट में खेलेंगी। 2022 में उन्होंने क्वालीफाई किया था, लेकिन चोट के कारण हिस्सा लेने में असमर्थ रहीं। सिंधु BWF वर्ल्ड टूर फाइनल्स महिला एकल खिताब जीतने वाली एकमात्र भारतीय हैं — उन्होंने 2018 में जापान की नोज़ोमी ओकुहारा को हराकर यह उपलब्धि हासिल की थी। कुल मिलाकर सिंधु के नाम 7 BWF वर्ल्ड टूर टाइटल दर्ज हैं।
टूर्नामेंट के अन्य क्वालीफायर
इस गैर-थॉमस कप वर्ष में BWF वर्ल्ड टूर फाइनल्स में साल की अंतिम वर्ल्ड रैंकिंग के शीर्ष आठ खिलाड़ियों और जोड़ियों को आमंत्रित किया जाता है। महिला एकल में एन से-यंग (कोरिया), अकाने यामागुची (जापान), वांग झी यी और चेन यू फेई (चीन) पहले ही जगह पक्की कर चुकी हैं। बची हुई तीन सीटों के लिए तोमोका मियाज़ाकी, नोज़ोमी ओकुहारा (जापान), रत्चानोक इंतानोन (थाईलैंड), पुत्री कुसुमा वर्दानी (इंडोनेशिया), पोर्नपावी चोचुवोंग (थाईलैंड) और लाइन क्रिस्टोफरसेन (डेनमार्क) की दावेदारी बरकरार है।
फिटनेस पर ध्यान, दो टूर्नामेंट से किनारा
हाइलो ओपन खिताब के बाद सिंधु ने कोरिया ओपन और जापान मास्टर्स से हटने का फैसला किया, ताकि वह पूरी तरह फिट होकर हांगझोऊ की चुनौती के लिए तैयारी कर सकें। यह 2022 के बाद पहला सीज़न है जिसमें सिंधु ने एक से अधिक BWF वर्ल्ड टूर खिताब जीते हैं — एक संकेत जो उनके पुनरुत्थान की कहानी को और मज़बूत करता है।
हांगझोऊ में सिंधु का प्रदर्शन यह तय करेगा कि क्या वे एक बार फिर बैडमिंटन के सर्वोच्च मंच पर भारत का परचम लहरा सकती हैं।