अमेरिकी मिडटर्म में डेमोक्रेट्स की 'ब्लू सुनामी': बेंगलुरु में रह रहे US नागरिकों ने मनाया जश्न
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी मध्यावधि चुनाव (मिडटर्म इलेक्शन) में डेमोक्रेटिक पार्टी ने ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए सीनेट में बहुमत हासिल किया और हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में 218 सीटें जीतकर बहुमत का आँकड़ा पार कर लिया। बेंगलुरु, कर्नाटक में रह रहे अमेरिकी नागरिकों ने एकत्र होकर परिणाम देखे और इस बदलाव को 'अत्यंत आवश्यक' करार दिया।
बेंगलुरु में अमेरिकियों का जमावड़ा
बेंगलुरु में कार्यरत अमेरिकी मूल की महिला जेनेट ने कहा, 'हम साथ मिलकर परिणाम देख रहे थे। मैं बहुत ज्यादा खुश और आह्लादित हूँ। डेमोक्रेट्स ने कमाल कर दिया — सीनेट और हाउस दोनों में जबरदस्त प्रदर्शन किया। इस ब्लू सुनामी की जरूरत थी। मुझे लगता है कि अमेरिका नींद से जगा।'
जेनेट ने कहा कि मुद्दे कई थे — ईरान से लेकर भ्रष्टाचार तक। उनके अनुसार सबसे ज्यादा परेशान करने वाली चीज टैरिफ थी, जिसे जानबूझकर थोपा गया और जो 'पूरी तरह अस्वीकार्य' थी।
ट्रंप की नीतियों पर नागरिकों की प्रतिक्रिया
भारत में रह रही एक अन्य अमेरिकी नागरिक ने इस जीत को 'अप्रत्याशित लेकिन खुशी देने वाला' बताया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की आव्रजन, टैरिफ और विदेश नीति से जुड़ी नीतियाँ 'आम नागरिकों के हित में नहीं थीं।' उन्होंने उल्लेख किया कि डेमोक्रेट्स ने बॉर्डर स्टेट में भी जीत दर्ज की और कंसास में 1932 के बाद पहली बार जीत हासिल की।
कांग्रेसमैन हकीम जेफ्रीज का हवाला देते हुए उन्होंने कहा, 'अमेरिका ने आज एक बड़ा कमबैक किया है। पिछले दो साल में राष्ट्रपति ट्रंप की टैरिफ, विदेश नीति और इमिग्रेशन से जुड़ी नीतियाँ पूरी तरह बैकफायर हुईं।'
अर्थव्यवस्था और महँगाई बने सबसे बड़े मुद्दे
उन्होंने बताया कि इस बार चुनाव में सबसे बड़ा मुद्दा अर्थव्यवस्था और सामर्थ्य (अफोर्डेबिलिटी) रहा। कुछ राज्यों में गैस की कीमत 8 डॉलर प्रति गैलन तक पहुँच गई, जिसने रोजमर्रा की जिंदगी को सीधे प्रभावित किया। टैरिफ और व्यापार नीतियों ने अर्थव्यवस्था को और कमजोर किया।
उन्होंने यह भी बताया कि बड़ी संख्या में इंडियन-अमेरिकन वोटर्स ने इस बार मतदान में भाग लिया। विदेश में रह रहे नागरिकों के लिए 'votefromabroad.org' जैसी वेबसाइट्स ने 24x7 सहायता उपलब्ध कराकर वोटिंग को आसान बनाया।
चेक एंड बैलेंस और सुप्रीम कोर्ट का भविष्य
बेंगलुरु में रह रहे अमेरिकी नागरिक राज पेल्लई ने कहा, 'देश को बदलाव की जरूरत थी और अब लोगों को सेमी मैंडेट मिला है। चाहे रेड स्टेट हो या ब्लू स्टेट, आम लोगों की आर्थिक परेशानियों को नजरअंदाज किया गया।'
पेल्लई ने यह भी कहा कि इस चुनाव परिणाम का सबसे बड़ा निहितार्थ यह है कि अब राष्ट्रपति ट्रंप हार्ड-राइट सुप्रीम कोर्ट जस्टिस नियुक्त नहीं कर पाएँगे — दो जज रिटायर होना चाहते थे, लेकिन अब ऐसा नहीं हो पाएगा। उनके मुताबिक, 'डेमोक्रेट्स को आज जश्न मनाना चाहिए, लेकिन कल से फिर काम पर लौटना होगा।' अब डेमोक्रेट्स से हेल्थकेयर सुधार, अर्थव्यवस्था में बेहतरी और रोजगार बढ़ाने की उम्मीद जताई जा रही है।