प्रशांत भूषण के खिलाफ हिंदू सेना की शिकायत: एक्स स्पेस 'क्रांति' बयान पर एफआईआर और गिरफ्तारी की मांग
सारांश
मुख्य बातें
सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण के विरुद्ध हिंदू सेना ने 13 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली के मधु विहार पुलिस स्टेशन में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है। संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष विष्णु गुप्ता ने यह शिकायत दी और भूषण के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज कर गिरफ्तारी की माँग की है।
मामले की पृष्ठभूमि
यह विवाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर आयोजित एक सार्वजनिक एक्स स्पेस सेशन से जुड़ा एक वायरल ऑडियो-वीडियो सामने आने के बाद उठा है। हिंदू सेना का आरोप है कि इस सेशन के दौरान प्रशांत भूषण को भारत में सत्ता परिवर्तन के लिए 'क्रांति' की वकालत करते और 'खून-खराबे' का उल्लेख करते सुना गया। यह ऑडियो-वीडियो कथित तौर पर सार्वजनिक रूप से प्रसारित सेशन का है। राष्ट्र प्रेस इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता।
हिंदू सेना के आरोप
हिंदू सेना ने प्रशांत भूषण पर देशद्रोह, सरकार को हिंसक तरीके से उखाड़ फेंकने की साजिश रचने और भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के तहत गंभीर अपराध करने के आरोप लगाए हैं। शिकायत में भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता को खतरे में डालने, बड़े पैमाने पर हिंसा भड़काने तथा आपराधिक साजिश जैसे संगीन आरोप शामिल हैं।
राष्ट्रीय अध्यक्ष विष्णु गुप्ता ने कहा, 'एक्स स्पेस जैसे सार्वजनिक डिजिटल प्लेटफॉर्म पर वकील प्रशांत भूषण की भड़काऊ बातें केवल राजनीतिक राय नहीं हैं, वे भारत की लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई सरकार के खिलाफ हिंसक विद्रोह का सीधा आह्वान हैं। संवैधानिक शासन को उखाड़ फेंकने के लिए क्रांति और खून-खराबे का आह्वान करना भारत संघ के खिलाफ युद्ध छेड़ने के बराबर है।'
तीन सूत्री मांगें
हिंदू सेना ने दिल्ली पुलिस के समक्ष तीन प्रमुख माँगें रखी हैं। पहली, बीएनएस की संबंधित धाराओं के तहत तत्काल एफआईआर दर्ज कर प्रशांत भूषण को गिरफ्तार किया जाए। दूसरी, एक्स स्पेस की रिकॉर्डिंग का फोरेंसिक ऑडिट कराया जाए और लाइव प्रसारण से जुड़ी ऑडियो-वीडियो फाइलें जब्त कर साइबर फोरेंसिक जाँच की जाए। तीसरी, संगठन ने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताते हुए सोशल मीडिया के माध्यम से सार्वजनिक अशांति फैलाने के विरुद्ध त्वरित कार्रवाई की माँग की है।
व्यापक संदर्भ
गौरतलब है कि प्रशांत भूषण पूर्व में भी अपने बयानों को लेकर कानूनी विवादों में रहे हैं। सर्वोच्च न्यायालय ने 2020 में उनके ट्वीट के मामले में उन्हें न्यायालय की अवमानना का दोषी पाया था और प्रतीकात्मक रूप से ₹1 का जुर्माना लगाया था। यह ऐसे समय में आया है जब डिजिटल प्लेटफॉर्म पर की जाने वाली टिप्पणियों को लेकर कानूनी कार्रवाइयों की संख्या में वृद्धि देखी जा रही है।
आगे क्या होगा
दिल्ली पुलिस ने अभी तक इस शिकायत पर किसी एफआईआर के दर्ज होने की सार्वजनिक पुष्टि नहीं की है। प्रशांत भूषण की ओर से भी इस विषय पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यदि एफआईआर दर्ज होती है, तो मामला न्यायिक समीक्षा के दायरे में आ सकता है, जिसमें अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और राजद्रोह संबंधी प्रावधानों पर बहस की संभावना है।