23 अक्टूबर 2026
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एसआईआर विवाद पर वीएचपी प्रवक्ता श्रीराज नायर का हमला: 'चुनी सरकार अस्थिर करने की साजिश'

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एसआईआर विवाद पर वीएचपी प्रवक्ता श्रीराज नायर का हमला: 'चुनी सरकार अस्थिर करने की साजिश'

सारांश

वीएचपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता श्रीराज नायर ने 'पीपल अगेंस्ट एसआईआर' अभियान को लोकतांत्रिक सरकार को अस्थिर करने की कोशिश करार दिया। उन्होंने 'रेड-ग्रीन नेक्सस' का आरोप लगाते हुए गृह मंत्रालय से प्रशांत भूषण और अभियान से जुड़े लोगों के विरुद्ध जाँच और कानूनी कार्रवाई की माँग की।

मुख्य बातें

वीएचपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता श्रीराज नायर ने 23 अक्टूबर 2026 को मुंबई में ' पीपल अगेंस्ट एसआईआर ' अभियान की कड़ी आलोचना की।
नायर ने प्रशांत भूषण पर आरोप लगाया कि वे देशव्यापी प्रदर्शनों के जरिए चुनी हुई सरकार को अस्थिर करने की कोशिश कर रहे हैं।
कथित ' रेड-ग्रीन नेक्सस ' — वामपंथी और कट्टरपंथी इस्लामी ताकतों के गठजोड़ — की जाँच की माँग गृह मंत्रालय से की गई।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की माँग को नायर ने 'अराजकता फैलाने की कोशिश' बताया।
वीएचपी ने कहा कि लोकतंत्र में असंतोष व्यक्त करने का सही मंच अगला चुनाव है, चुनावों के बीच अस्थिरता नहीं।

विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) के राष्ट्रीय प्रवक्ता श्रीराज नायर ने 23 अक्टूबर 2026 को मुंबई में वकील प्रशांत भूषण और 'पीपल अगेंस्ट एसआईआर' अभियान पर कड़ा प्रहार करते हुए आरोप लगाया कि देशव्यापी विरोध-प्रदर्शनों की आड़ में लोकतांत्रिक तरीके से निर्वाचित सरकार को अस्थिर करने का षड्यंत्र रचा जा रहा है। उन्होंने इस कथित गतिविधि के पीछे वामपंथी और कट्टरपंथी इस्लामी ताकतों के गठजोड़ — जिसे उन्होंने 'रेड-ग्रीन नेक्सस' की संज्ञा दी — की भूमिका होने की आशंका जताई।

प्रशांत भूषण और अभियान पर निशाना

नायर ने कहा कि प्रशांत भूषण कई वर्षों से लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत चुनी गई सरकारों का विरोध करते रहे हैं। उनके अनुसार, जेन-जी के नाम पर चल रहे आंदोलन के दौरान भूषण ने कथित तौर पर प्रदर्शनों को और तेज करने की कोशिश की और अब वे देशव्यापी धरना-प्रदर्शन का आह्वान कर रहे हैं। नायर ने इसे युवाओं को भड़काकर 'रेजीम चेंज' यानी सत्ता परिवर्तन को बढ़ावा देने का गंभीर प्रयास बताया।

'पीपल अगेंस्ट एसआईआर' अभियान पर निशाना साधते हुए नायर ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की माँग के बहाने देश में अराजकता फैलाने की कोशिश की जा रही है। उनके अनुसार, इस तरह की गतिविधियाँ न्याय व्यवस्था, लोकतंत्र और चुनी हुई सरकार को कमज़ोर करने की दिशा में हो सकती हैं।

रेड-ग्रीन नेक्सस का आरोप

नायर ने फॉक्स न्यूज़ की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए 'रेड-ग्रीन नेक्सस' की अवधारणा की व्याख्या की। उन्होंने स्पष्ट किया कि इसमें 'रेड' से वामपंथी व कम्युनिस्ट ताकतें और 'ग्रीन' से कट्टरपंथी इस्लामी ताकतें अभिप्रेत हैं। उनके आरोप के अनुसार, ऐसी ताकतें भारत में अराजकता फैलाने और लोकतांत्रिक सरकार को अस्थिर करने की कोशिश कर सकती हैं। गौरतलब है कि नायर ने इस आरोप को कथित तौर पर उठाया, और इसकी स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।

उन्होंने यह भी कहा कि कुछ आंदोलनों के कारण परीक्षाएँ बाधित होने और एंबुलेंस की आवाजाही प्रभावित होने जैसी स्थितियाँ पैदा हुई हैं, जो आम नागरिकों पर सीधा असर डालती हैं।

गृह मंत्रालय से जाँच की माँग

नायर ने केंद्र सरकार और गृह मंत्रालय से अपील की कि अभियान से जुड़े लोगों की गतिविधियों की गंभीरता से जाँच की जाए। उन्होंने कहा कि यदि कानून का उल्लंघन सामने आता है, तो ज़िम्मेदार लोगों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। साथ ही उन्होंने कथित 'रेड-ग्रीन नेक्सस' की व्यापक जाँच की माँग भी की।

चुनावी प्रक्रिया और लोकतंत्र पर वीएचपी का पक्ष

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हालिया बयान का समर्थन करते हुए नायर ने कहा कि भारत एक मज़बूत लोकतंत्र है, जहाँ नियमित रूप से चुनाव होते हैं और उनके परिणामों का सम्मान किया जाना चाहिए। केरल के चुनाव का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि कांग्रेस की जीत इस बात का प्रमाण है कि मतदाता सूची में कथित खामियों के बावजूद चुनाव निष्पक्ष रहे — और इसलिए चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाने से पहले तथ्यों को परखना ज़रूरी है।

उन्होंने यह भी कहा कि लोकतंत्र में असंतुष्ट मतदाताओं के पास अगले चुनाव में सरकार बदलने का संवैधानिक विकल्प मौजूद है। चुनावों के बीच अराजकता फैलाकर सत्ता परिवर्तन की कोशिश करना देश की जड़ों को कमज़ोर कर सकता है — यह वीएचपी प्रवक्ता की स्पष्ट चेतावनी थी। आने वाले दिनों में सरकार और चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया इस विवाद की दिशा तय करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो एक विदेशी मीडिया रिपोर्ट पर आधारित हैं, भारतीय राजनीतिक विमर्श में घुसाई जा रही हैं — बिना स्वतंत्र सत्यापन के। आलोचकों का कहना है कि चुनावी प्रक्रिया पर नागरिक सवाल उठाना लोकतांत्रिक अधिकार है, न कि सत्ता-विरोधी षड्यंत्र; इस विमर्श में दोनों पक्षों के दावों को तथ्यों की कसौटी पर परखना ज़रूरी है।
RashtraPress
23 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'पीपल अगेंस्ट एसआईआर' अभियान क्या है?
'पीपल अगेंस्ट एसआईआर' एक नागरिक अभियान है जो विशेष सघन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision — SIR) प्रक्रिया पर सवाल उठाता है और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की माँग करता है। वीएचपी ने इस अभियान को लोकतांत्रिक सरकार को अस्थिर करने की कोशिश बताया है।
वीएचपी ने प्रशांत भूषण पर क्या आरोप लगाए?
वीएचपी के प्रवक्ता श्रीराज नायर ने आरोप लगाया कि प्रशांत भूषण कथित तौर पर जेन-जी आंदोलन को भड़काने और देशव्यापी धरना-प्रदर्शन के जरिए चुनी हुई सरकार को हटाने की कोशिश में शामिल हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
'रेड-ग्रीन नेक्सस' का क्या मतलब है?
नायर के अनुसार 'रेड' से वामपंथी व कम्युनिस्ट ताकतें और 'ग्रीन' से कट्टरपंथी इस्लामी ताकतें अभिप्रेत हैं। उन्होंने फॉक्स न्यूज़ की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि यह गठजोड़ कथित तौर पर भारत में अराजकता फैलाने की कोशिश कर सकता है।
वीएचपी ने सरकार से क्या माँग की है?
वीएचपी ने केंद्र सरकार और गृह मंत्रालय से माँग की है कि 'पीपल अगेंस्ट एसआईआर' अभियान से जुड़े लोगों की गतिविधियों की जाँच हो और कानून का उल्लंघन सामने आने पर सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही कथित 'रेड-ग्रीन नेक्सस' की भी व्यापक जाँच की अपील की गई है।
वीएचपी ने मुख्य चुनाव आयुक्त हटाने की माँग पर क्या कहा?
वीएचपी प्रवक्ता नायर ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की माँग को देश में अराजकता फैलाने का बहाना करार दिया। उन्होंने कहा कि केरल में कांग्रेस की जीत यह साबित करती है कि मतदाता सूची संबंधी आरोप निराधार हो सकते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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