8 अक्टूबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

विपक्ष का विरोध लोकतंत्र नहीं, परिवार बचाने के लिए है: शिवसेना प्रवक्ता संजय निरुपम

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
विपक्ष का विरोध लोकतंत्र नहीं, परिवार बचाने के लिए है: शिवसेना प्रवक्ता संजय निरुपम

सारांश

शिवसेना प्रवक्ता संजय निरुपम ने विपक्ष के चुनाव आयोग विरोधी मार्च को 'परिवार बचाने की राजनीति' करार दिया। उनका तर्क है कि एसआईआर और मुख्य चुनाव आयुक्त का मामला सर्वोच्च न्यायालय में है, इसलिए जंतर-मंतर पर 'सीजन-2' आंदोलन महज़ राजनीतिक चमक है।

मुख्य बातें

शिवसेना प्रवक्ता संजय निरुपम ने 7 अक्टूबर 2026 को विपक्ष के प्रोटेस्ट मार्च को 'लोकतंत्र बचाने' नहीं बल्कि 'परिवार बचाने' का प्रयास बताया।
निरुपम ने आरोप लगाया कि विपक्षी नेता अपनी पार्टियाँ प्राइवेट लिमिटेड कंपनियों की तरह चलाते हैं।
उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है और एसआईआर प्रक्रिया सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी में चल रही है।
निरुपम ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि उनके शासनकाल में केवल प्रधानमंत्री ही चुनाव आयुक्त तय करते थे, जबकि मोदी सरकार ने विपक्ष के नेता को भी नियुक्ति समिति में शामिल किया।
मुख्य चुनाव आयुक्त मामले पर सर्वोच्च न्यायालय में नोटिस जारी, जल्द सुनवाई अपेक्षित।
PM मोदी के 25 वर्ष के शासनकाल — 12 साल गुजरात CM और 13 साल प्रधानमंत्री — पर निरुपम ने उनकी निरंतरता को रेखांकित किया।

शिवसेना के प्रवक्ता संजय निरुपम ने 7 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में चुनाव आयोग और एसआईआर (SIR) प्रक्रिया के विरोध में निकाले गए विपक्षी मार्च पर कड़ा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि मंगलवार को विपक्षी सांसदों का यह प्रदर्शन लोकतंत्र बचाने का नहीं, बल्कि अपने-अपने परिवारों को बचाने का प्रयास था।

विपक्ष पर निरुपम का सीधा हमला

निरुपम ने कहा, 'मैंने यह कल भी कहा था और आज फिर कह रहा हूँ: मंगलवार को विपक्षी सांसदों का प्रोटेस्ट मार्च, जिसके बारे में उन्होंने दावा किया कि वह लोकतंत्र बचाने के लिए है, असल में उनके अपने परिवारों को बचाने के लिए था।' उन्होंने आरोप लगाया कि इनमें से कई नेता अपनी पार्टियों को 'प्राइवेट लिमिटेड कंपनियों' की तरह चलाते हैं।

निरुपम के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सत्ता में आने के बाद से इन दलों का राजनीतिक प्रभाव लगातार कम होता जा रहा है और वे लगातार चुनाव हारते रहे हैं। उन्होंने कहा कि इन दलों को अपनी हार के वास्तविक कारणों की पड़ताल करनी चाहिए, न कि हर बार चुनाव आयोग, ईवीएम या मुख्य चुनाव आयुक्त पर दोष मढ़ना चाहिए।

चुनाव आयोग की संवैधानिक भूमिका पर जोर

शिवसेना प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है, जिसकी स्थापना और कार्यप्रणाली संविधान द्वारा निर्देशित है। उन्होंने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त एवं अन्य आयुक्तों की नियुक्ति और उन्हें हटाने की प्रक्रिया दोनों संवैधानिक प्रावधानों के अंतर्गत हैं। निरुपम ने विपक्ष को सलाह दी कि 'नाटकबाजी' से कुछ हासिल नहीं होगा और उन्हें जमीन पर उतरकर बुनियादी मुद्दों पर काम करना चाहिए।

एसआईआर और सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी

निरुपम ने कहा कि एसआईआर प्रक्रिया संवैधानिक रूप से और सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी में चल रही है। उन्होंने याद दिलाया कि इस प्रकार की प्रक्रिया कांग्रेस के शासनकाल में भी होती थी। गौरतलब है कि उन्होंने कांग्रेस के कार्यकाल पर भी निशाना साधते हुए कहा कि उस दौर में केवल प्रधानमंत्री ही चुनाव आयुक्त की नियुक्ति तय करते थे।

इसके विपरीत, निरुपम ने कहा कि मोदी सरकार ने एक समिति गठित की है जिसमें विपक्ष के नेता को भी शामिल किया गया है — जो पहले की तुलना में अधिक पारदर्शी व्यवस्था है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मुख्य चुनाव आयुक्त से जुड़ा पूरा मामला सर्वोच्च न्यायालय में लंबित है और न्यायालय ने नोटिस जारी किया है, इसलिए जंतर-मंतर पर आंदोलन से कोई ठोस परिणाम नहीं निकलेगा।

मोदी के 25 वर्ष के शासनकाल पर टिप्पणी

प्रधानमंत्री मोदी के सरकार का नेतृत्व करते हुए 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर निरुपम ने कहा कि मोदी ने लगभग 12 साल गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में और पिछले 13 वर्षों से देश के प्रधानमंत्री के रूप में काम किया है। यह ऐसे समय में आया है जब विपक्ष जंतर-मंतर पर 'सीजन-2' आंदोलन की घोषणा कर चुका है।

आगे क्या होगा

सर्वोच्च न्यायालय में मुख्य चुनाव आयुक्त और दोनों चुनाव आयुक्तों को नोटिस का जवाब देना है। एसआईआर से जुड़े तमाम सवालों पर न्यायालय में सुनवाई होनी है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह विवाद आने वाले हफ्तों में और तीखा हो सकता है क्योंकि दोनों पक्ष अपनी-अपनी जमीन मजबूत करने में जुटे हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

इसलिए उनकी विश्वसनीयता को विपक्ष चुनौती दे सकता है। मुख्य सवाल यह है कि सर्वोच्च न्यायालय में मामला लंबित होने के बावजूद राजनीतिक बयानबाजी दोनों ओर से क्यों तेज़ हो रही है — यह संकेत देता है कि असली लड़ाई न्यायालय से ज़्यादा जनमत की है। एसआईआर प्रक्रिया पर विपक्ष की आपत्तियाँ केवल तभी वैध मानी जाएँगी जब वे ठोस दस्तावेज़ी साक्ष्य पेश करें — अब तक की बहस अधिकतर प्रतीकात्मक रही है।
RashtraPress
8 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

संजय निरुपम ने विपक्ष के प्रोटेस्ट मार्च पर क्या कहा?
शिवसेना प्रवक्ता संजय निरुपम ने कहा कि मंगलवार को विपक्षी सांसदों का प्रोटेस्ट मार्च लोकतंत्र बचाने के लिए नहीं, बल्कि अपने परिवारों को बचाने के लिए था। उनके अनुसार विपक्षी नेता अपनी पार्टियों को 'प्राइवेट लिमिटेड कंपनियों' की तरह चलाते हैं।
एसआईआर प्रक्रिया क्या है और इस पर विवाद क्यों है?
एसआईआर (SIR) एक चुनावी प्रक्रिया है जो संवैधानिक रूप से और सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी में चलाई जा रही है। विपक्ष इस प्रक्रिया पर सवाल उठा रहा है, जबकि निरुपम का कहना है कि ऐसी प्रक्रिया कांग्रेस के शासनकाल में भी होती थी।
चुनाव आयुक्त की नियुक्ति प्रक्रिया में क्या बदलाव आया है?
निरुपम के अनुसार, कांग्रेस के कार्यकाल में केवल प्रधानमंत्री ही चुनाव आयुक्त तय करते थे। मोदी सरकार ने एक समिति बनाई है जिसमें विपक्ष के नेता को भी शामिल किया गया है, जिसे निरुपम अधिक पारदर्शी व्यवस्था बताते हैं।
मुख्य चुनाव आयुक्त विवाद में सर्वोच्च न्यायालय की क्या भूमिका है?
सर्वोच्च न्यायालय ने मुख्य चुनाव आयुक्त से जुड़े मामले में नोटिस जारी किया है और आने वाले दिनों में मुख्य चुनाव आयुक्त तथा दोनों चुनाव आयुक्तों को उस नोटिस का उत्तर देना है। एसआईआर से संबंधित सभी मुद्दों पर भी न्यायालय में सुनवाई होनी है।
PM मोदी के 25 वर्ष के शासनकाल के बारे में निरुपम ने क्या कहा?
निरुपम ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लगभग 12 साल गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में और पिछले 13 वर्षों से देश के प्रधानमंत्री के रूप में काम किया है, यानी कुल 25 साल से वे सत्ता के शीर्ष पर बने हुए हैं।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 4 घंटे पहले
  2. 2 दिन पहले
  3. 5 दिन पहले
  4. 2 सप्ताह पहले
  5. 2 महीने पहले
  6. 3 महीने पहले
  7. 8 महीने पहले
  8. 10 महीने पहले